Category Archives: कोसी

अभिषेक मनु सिंघवी का यह वीडियो सिर्फ वयस्‍कों के लिए है!

डेस्‍क ♦ अभिषेक मनु सिंघवी के सेक्‍स वीडियो को लेकर सियासी हलकों में ढेर सारे गॉशिप्‍स बिखरे पड़े हैं। अदालत ने इस वीडियो के प्रसारण पर हालांकि रोक लगा दी है, फिर भी कल सोशल मीडिया पर इसे अपलोड कर दिया गया। यूट्यूब ने एक घंटे के भीतर इस वीडियो को बैन कर दिया, लेकिन फेसबुक पर किसी सज्‍जन ने नये सिरे से अपलोड कर दिया। साथ ही धमकी दी कि अगर इसे बैन किया गया, तो चिदंबरम का सेक्‍स वीडियो भी सार्वजनिक कर दिया जाएगा। कांग्रेस और बीजेपी जैसी पार्टियों में शीर्ष नेताओं का ये चाल चरित्र बताता है कि वहां सत्ता का उपयोग किस तरह से किया जा रहा है। अपनी नैतिकता को फिलहाल स्‍थगित रखते हुए हम सत्ता द्वारा आरोपित सेंसरशिप का विरोध करते हैं और वह वीडियो यहां जारी करते हैं।

नदी एक नौजवान ढीठ लड़की है

अरविंद दास ♦ सेन आपसे लिपटना चाहती है। लिपटती है। वह आपको चूमना चाहती है। चूमती है। आप उसके कोमल और नरम हाथों की गरमाहट महसूस करते हैं। कल कल करती हुई वह बात-बेबात हंसती रहती है। जब आप उससे नाराज़ होने का अभिनय करते हैं, वह और हंसती चली जाती है। एक और चुंबन। उसकी सांसों की ऊष्णता आपमें गुदगुदी भरती है। उसकी आंखों की कोर में जाड़े की सुबह का उजास और गर्मी की शाम की सुरमई चमक एक साथ डोलती है। आप उसे फिर-फिर छूना चाहते हैं। और बलखाती, इठलाती-इतराती वो गयी। प्रेम में पगी लड़की की तरह उसका अनायास जाना भी सायास है। सेन चिरयौवना है। उसकी वजह से पेरिस की फिजा में रोमांस है। आप कवि हो ना हो, सेन आपमें जीवन के प्रति राग पैदा करती है।

फिर डर रहे हैं कोसी की बाढ़ से प्रभावित लोग

पटना, 8 जुलाई। पिछले वर्ष कोसी नदी की विभिषिका का ख्याल जेहन में आते ही कोसी प्रभावित लोगों के जख्म हरे हो जा रहे हैं। पिछले 18 अगस्त को आई बाढ़ से प्रभावित लोग अभी से ही मन ही मन ऊंचे स्थानों की तलाश शुरू कर चुके हैं या फिर परिजनों को अन्य रिश्तेदारों के यहां भेजने लगे हैं। ज्ञात हो कि अभी पूरी तरह बरसात नहीं हुई है परंतु कोसी ने कई तटबंधों तथा बैराज पर अपना दबाव बनाना प्रारंभ कर दिया है। हालांकि प्रशासन इस बार अपनी तैयारी से संतुष्ट है।

बिहार में फिर बाढ़ की दस्‍तक, असम में भी तबाही

पटना/गुवाहाटी, 3 जुलाई। बिहार में इस बार भी कोसी ने अपने रंग दिखाने शुरू कर दिये हैं। कोसी के कैचमेंट एरिया के ज़‍िले सुपौल और मधेपुरा में एक बार फिर लोग का भय सतह पर आ गया है। उधर असम में मूसलाधार बारिश से लगभग 200,000 लोग बेघर हो गए हैं।

बड़ी चुनौती कोसी से सिल्ट निकालने की है

कुसहा के बाएं तटबंध पर खड़े होकर हिमालय की ओर नजर डालें तो 16वें स्पर पर बीच कोसी में किनारे से ढाई से तीन किलोमीटर दूर एक टापू दिखता है। यह टापू पानी की सतह से कम से कम 5 से 7 फुट ऊपर तो होगा ही। जनकार बताते हैं कि इस टापू का क्षेत्रफल कम से कम 600 से 700 वर्गमीटर है। जितना यह पानी की वर्तमान सतह के ऊपर दिखता है उससे अनुमान लगाना सहज है कि पानी के नीचे यह कम से कम 30 से 35 फिट गहरा तो होगा ही। यह टापू रातों-रात नहीं बना। यह कोसी के सिल्ट जमने का नतीज है और सिल्टेशन की जो वज्ञानिक गति मानी गई है उसके अनुसार यह कम से कम 40 से 50 वर्षों का परिणाम है।

अलार्म बजा रहे हैं जंगल में गुम हो गए स्पर

भीमनगर के भंटाबारी बाजर से गुजरकर कुसहा तक पहुंचना आज काफी उत्साहवर्धक लगता है लेकिन थोड़ा आगे बढ़ने पर कई सवाल जेहन में कौंधने लगते हैं। पूर्वी एफलक्स बांध के बाईं ओर ‘ठहरी हुई’ कोसी बह रही है। उसे देखकर नहीं लगता कि इसने कभी इतना रौद्र रूप भी लिया होगा। आर्मी टावर से आगे जोगसर और चतरा की ओर बढ़ने पर कोसी निगाह से ओङाल होने लगती है। निगाह और कोसी के बीच अचानक घने जंगल आ जते हैं। दरअसल पिछली बाढ़ के बाद जब कुसहा में काम शुरू हुआ था तब पूरे प्रभावित इलाके में जंगल काटे गए थे। लेकिन यह सब एक सीमित क्षेत्र से ही हुआ था।

इस बार कोसी की राह बनने को सुरक्षित हैं दो नए ठिकाने

पिछले साल कोसी कई गांवों को लील गयी थी। पुराने हो चले बांध टूटे और सिस्‍टम का कॉलर पकड़ कर चीख़ पड़े – भ्रष्‍टाचारी! उन दिनों जाने-माने पत्रकार नागेंद्र ने डूबे हुए गांवों के ऊपर से नाव पर चल कर रपटें जमा कीं और किस्‍तों में हिंदुस्‍तान में लिखा। वे दैनिक हिंदुस्‍तान, भागलपुर के स्‍थानीय संपादक हैं। इस बार फिर कोसी के मुहाने पर बसे गांव डूबने को तैयार हैं। लोकसभा में दुदुंभी बजा कर जीती राज्‍य सरकार उन्‍हें उबारने को तैयार नहीं। क्‍या है साज़‍िश, क्‍या है पेंच – अपने अख़बार में लगातार लिख रहे हैं नागेंद्र। उनके रिपोर्ताजों से मालूम पड़ता है कि लाखों लोगों को इस बार भी सरकार मरने के लिए छोड़ देगी।

कोसी: असली समय शुरु होता है अब

कुसहा (नेपाल)। कोसी तटबंध के मरम्मत की तीसरी तय समय सीमा भी खत्म हो गई, लेकिन काम फिर भी खत्म नहीं हुआ। पहले 31 मार्च, फिर अप्रैल और अब 31 मई भी बीत चुकी है। पूर्वी कोसी तटबंध (एफलक्स बांध) पर काम अब भी चालू है। 31 मई की शाम पांच बजे यहां कुसहा प्वाइंट पर मिट्टी डाली ज रही थी। कुसहा से राजबांस के रास्ते में आर्मी टावर के बाद दो स्पर अभी बनने शुरू ही हुए हैं। एक की तो टीथ (नींव) ही पड़नी शुरू हुई है। यह रेणु की भयावह कोसी की विनाशलीला के नौ माह बाद का सच है। जिस तरह मानसून जल्दी आने का संकेत दे रहा है उसमें यह काम प्रभावित होना तय है।