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Articles in the मीडिया मंडी Category

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[15 Mar 2010 | 3 Comments | ]
हिंदी के हुसैन का सम्‍मान बड़ा, पुरस्‍कारों की ऐसी की तैसी

मीडिया मैनेजमेंट: मेरा फन फिर मुझे बाजार में ले आया है

[14 March 2010 | Read Comments | ]

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ओम थानवी ♦ ‘पेड न्यूज’ अकेली बीमारी नहीं है। नयी और ज्यादा मुखर जरूर है। कुछ चीजें और हैं, जिन्हें लगे हाथ निराकरण प्रयासों के दायरे में ले आना चाहिए। जैसे राजनीतिक दलों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के हाथों मीडिया के जाने-अनजाने इस्तेमाल होने का कुचक्र।

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डेस्‍क ♦ वैद को शलाका सम्‍मान देने के अपने एलान से दिल्‍ली सरकार के पीछे हटने के बाद इस बार जब दूसरे लेखकों के लिए पुरस्‍कार का एलान किया गया, तो लगभग लेखक बिरादरी ने सरकार को अंगूठा दिखा दिया।

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[14 Mar 2010 | 6 Comments | ]
मीडिया मैनेजमेंट: मेरा फन फिर मुझे बाजार में ले आया है

ओम थानवी ♦ ‘पेड न्यूज’ अकेली बीमारी नहीं है। नयी और ज्यादा मुखर जरूर है। कुछ चीजें और हैं, जिन्हें लगे हाथ निराकरण प्रयासों के दायरे में ले आना चाहिए। जैसे राजनीतिक दलों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों के हाथों मीडिया के जाने-अनजाने इस्तेमाल होने का कुचक्र। मीडिया को कीमत मिलती है और समाज के सामने प्रायोजित सामग्री परोस दी जाती है। यह काम इतनी चतुराई से होता है कि उसे आसानी से नहीं पकड़ा जा सकता। हालांकि पकड़ना नामुमकिन नहीं है। एक पूरा तंत्र विकसित है, जो पेशेवराना तौर पर मीडिया को ‘मैनेज’ करता है। निजीकरण के दौर में भी नेहरू जी की रूसी प्रेतछाया सरकारी प्रचार तंत्र पर कायम है।

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[14 Mar 2010 | No Comment | ]
अखबार ने खबर के एवज में मांगे थे एक करोड़ : सुषमा

डेस्‍क ♦ गोष्ठी में सभी राजनीतिक वक्ताओं ने पैसे लेकर खबर छापने को एक गंभीर अपराध करार देते हुए मांग की कि इस पर रोक लगनी चाहिए। भाजपा-कांग्रेस दोनों ही पार्टियों के नेता सुषमा तथा मनीष तिवारी ने पिछले लोकसभा चुनावों में ऎसी पेशकश करने वाले मीडिया समूहों के नाम खोलने से बचते हुए कहा कि वे इसकी जानकारी सिर्फ निर्वाचन आयोग को ही दे सकते हैं। सुषमा स्वराज ने कहा कि विदिशा सीट पर चुनाव अभियान के दौरान कुछ मीडिया घरानों ने पैसे लेकर उनकी खबरें छापने की पेशकश की थी। उनके चुनाव अभियान के समय एक मीडिया संगठन ने मेरे पक्ष में खबरें छपवाने के लिए एक करोड़ रूपये का पैकेज मांगा था।

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[12 Mar 2010 | One Comment | ]
शोमा और मोनालिसा को 2009 का चमेली देवी पुरस्‍कार

डेस्‍क ♦ 2009 का चमेली देवी जैन पुरस्‍कार तहलका की कार्यकारी संपादक शोमा चौधुरी और दीमापुर से निकलने वाली पत्रिका नागालैंड पेज की संपादक मोनालिसा चांगकीजा को देने का एलान किया गया है। ये दोनों अंग्रेजी पत्रकार साहस‍िक पत्रकारिता की एक मिसाल हैं। इसकी घोषणा मीडिया फाउंडेनशन ने की। पुरस्‍कार की जूरी में स्‍तंभकार और लेखिका मधु जैन, पूर्व सूचना और प्रसारण सचिव भास्‍कर घोष और नेहरु मेमोरियल म्‍यूजियम और लाइब्रेरी के सीनियर फेलो प्रो दीपांकर गुप्‍ता थे। पुरस्‍कार समारोह का आयोजन 17 मार्च को किया जाएगा। पुरस्‍कार समारोह में एक पत्रकारिता पर एक पैन‍ल डिस्‍कशन होगा, जिसमें आउटलुक के संपादक विनोद मेहता, एनडीटीवी इंडिया के पत्रकार पंकज पचौरी और दिलीप चेरियन होंगे।

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[12 Mar 2010 | 4 Comments | ]
आईबीएन लोकमत से 70 मीडियाकर्मी निकाले गये

डेस्‍क ♦ अभी कुछ ही महीने पहले सीएनबीसी आवाज के ढाई सौ मीडियाकर्मियों को सड़क का रास्‍ता दिखा कर हड़कंप मचाने वाले टीवी 18 ग्रुप से एक और भयावह खबर आयी है। खबर ये है कि नागपुर में आईबीएन लोकमत के 70 मीडियाकर्मियों की सेवा समाप्‍त कर दी गयी है। टीवी 18 ग्रुप के इस मराठी चैनल में एक साथ इतने लोगों को बाहर निकाले जाने के एलान के बाद से कर्मचारियों में मायूसी छायी हुई है। इस चैनल के संपादक एक समय महानगर अखबार में बाल ठाकरे का बाजा बजाने वाले निखिल वागले हैं – लेकिन अपने ही कर्मियों के साथ इस वक्‍त वो खड़े नहीं हो पा रहे हैं।

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[8 Mar 2010 | 3 Comments | ]
“मीडिया महिलाओं के मसले मर्द के चश्‍मे से देखता है”

शीबा असलम फहमी ♦ आधुनिकता क्या केवल वस्त्रों में दिखनी चाहिए, या फिर वह हमारे भीतर विचारों के स्तर पर उतरने का पर्याय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिला दिवस का सौवां साल हमारे लिए महत्त्वपूर्ण होना चाहिए, लेकिन अगर दलित समाज की महिलाएं पच्चीस दिसंबर को अपना महिला दिवस अलग से मनाती हैं, तो क्या हमें उन तक नहीं पहुंचना चाहिए। बहुत आधुनिक हो चुके हमारे मीडिया में खासतौर पर अल्पसंख्यकों के मुद्दे को एक फैशन की तरह लिया जाता है।

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[2 Mar 2010 | No Comment | ]

Inclusive Media Team ♦ Ten journalists from all over India have been selected for the Inclusive Media Fellowships of the Centre for the Study of Developing Societies (CSDS). The Inclusive Media Project also conducts media research and runs a unique resource centre, im4change.org, on India’s rural crises.

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[27 Feb 2010 | One Comment | ]
हमार टीवी के संपादक उदयचंद्र सिंह की सरेआम पिटाई

डेस्‍क ♦ हमार के चैनल हेड उदयचंद्र सिंह को कुछ लोगों ने पीट दिया। उन्‍हें उन लोगों ने पीटा, जिन्‍हें दो दिनों पहले ही चैनल से बाहर का रास्‍ता दिखाया गया था। वे इस बात से क्षुब्‍ध थे कि चैनल के प्रति वेतन न मिलने के बावजूद कमिटमेंट के साथ काम करने पर भी उन्‍हें निकाल दिया गया। बकाया वेतन भी नहीं दिया गया। जिन दो लोगों ने उदयचंद्र सिंह की थप्‍पड़ों और घूंसों से पिटाई की, उनके बारे में कर्मचारी बता रहे हैं कि उनके साथ उदयचंद्र सिंह ने बदतमीजी की हद कर दी थी। उनके बर्ताव से आमतौर पर लोग दुखी हैं। घटना ऑफिस के बाहर सड़क पर हुई।

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[26 Feb 2010 | 5 Comments | ]
बारह की बलि लेकर मतंग ने नवंबर की सैलरी बांटी

डेस्‍क ♦ हमार और फोकस में होली से पहले कर्मचारियों में उबलते आक्रोश को ठंढा करने के लिए प्रबंधन ने एक महीने की सैलरी बांट दी है। यह सैलरी नवंबर माह की है। हम पाठकों को बता दें कि हमार और फोकस के कर्मचारियों की नवंबर, दिसंबर और जनवरी की सैलरी पेंडिंग थी। हताश कर्मचारियों का गुस्‍सा अपने अपने तरीके से फूट रहा था। इस बीच हमार पर होली की हुड़दंग कार्यक्रम शुरू हुआ, तो उनकी हताशा भी कुछ घटना‍ओं के जरिये जाहिर हुई। चैनल हेड और कर्मचारियों के बीच आपस में तू-तू मैं-मैं बढ़ गयी। इस बीच हुआ ये कि चैनल से 12 मीडियाकर्मियों को बाहर का रास्‍ता दिखा दिया गया है।

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[26 Feb 2010 | 4 Comments | ]
टीवी चैनलों की फूहड़ हिंदी में बेमज़ा बजट भाषण, ओह…

विनीत कुमार ♦ कुल मिलाकर कहानी ये है कि जब भी हिंदी के चैनल बजट जैसे अंग्रेजी कार्यक्रमों को हिंदी में दिखाने के दावे करते हैं, उनकी खोखली और व्यावसायिक घोषणा ही होती है कि अपनी भाषा में बात समझी जाए, बहुत ही फूहड़ हो जाती है। उसके भीतर अचानक से दूरदर्शन की आत्मा घुस जाती है। मामला उबाऊ और बोझिल लगने लग जाता है। ऐसे में किशोर आजवाणी और अभिसार शर्मा जैसे काबिल एंकरों की भद्द पिटती है, मिसब्रैंडिंग होती है। अगर वो भाषाई स्तर के बदलाव को बारीकी स्तर पर नहीं समझ पाते हैं, इस काम के लिए पैसे खर्च नहीं करते हैं और सिर्फ हिंदी के नाम पर भुनाने के चक्कर में होते हैं, तो वो अपनी रेगुलर ऑडिएंस भी खो देते हैं, इसकी संभावना बनी रह जाती है।