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Articles in the मोहल्ला मुंबई Category

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[3 Mar 2010 | 4 Comments | ]
लांछित होने के बावजूद बच्‍चन की लालसा

अब्राहम हिंदीवाला ♦ आप सभी जानते हैं कि मुंबई मिरर में छपी ऐश्‍वर्या राय से संबंधित एक खबर से बच्‍चन परिवार नाराज है। वे चाहते हैं कि मुंबई मिरर माफी मांगे। उस खबर को लेकर आहत अमिताभ बच्‍चन और अभिषेक बच्‍चन ने ब्‍लॉग और ट्विटर पर लिखा कि कोई आपकी मां, बहन या बीवी के बारे में ऐसी बातें लिखे, तो आप क्‍या करेंगे? मुझे लगा कि हर वर्ग और समाज में औरतों को कमतर माना जाता है। पुरुष सदस्‍य अपने समाज की स्त्रियों की संरक्षा और सुरक्षा को नैतिक जिम्‍मेदारी मानते हैं। झूठी खबर के खिलाफ यह लड़ाई ऐश्‍वर्या राय अकेले भी लड़ सकती थीं। लेकिन नहीं, बच्‍चन बाप-बेटे ने इसे अपना कर्तव्‍य समझा और हमें बताया कि ऐश्‍वर्या राय की ब्रांड वैल्‍यू जो भी हो, वह हैं एक अबला औरत।

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[19 Dec 2009 | 8 Comments | ]
विभा रानी को पहला “राजीव सारस्वत स्मृति सम्मान”

डेस्‍क ♦ पहला राजीव सारस्वत स्मृति सम्मान सुप्रसिद्ध लेखिका विभा रानी को दिया गया है। राजीव सारस्वत हिंदुस्‍तान पेट्रोलियम में प्रबंधक (राजभाषा) के रूप में कार्य कर रहे थे। पिछले साल यानी 2008 के 26/11 के आतंकवादी हमले के वे शिकार हो गये। हादसे के वक़्त वे ताज होटल में कंपनी की तरफ से दी गयी अपनी ड्यूटी पर थे। ताज होटल, ट्राइडेंट होटल, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, नरीमन हाउस -इन सभी पर उस रात आतंकवादियों ने कहर ढाया था, जिसकी चपेट में सैकडों लोग आ गये थे। राजीव सारस्वत भी उनमें से एक थे। विभा रानी हिंदी व मैथिली की सुपरिचित कथाकार, नाटककार, रंगमंच की कुशल अभिनेत्री व सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता हैं।

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[5 Dec 2009 | 5 Comments | ]
बाल ठाकरे गीदड़ है, बाहर भभकता है, ‘अंदर’ टभकता है

आशीष कुमार ‘अंशु’ ♦ पिछले दिनों महाराष्‍ट्र में बाल ठाकरे के संपादन में निकलने वाले मराठी अखबार ‘सामना’, पुणे संस्करण देखने का मौका मिला। बाल ठाकरे को तो आपलोग जानते होंगे। शिव सेना प्रमुख बाल ठाकरे। जिनके सैनिक महाराष्‍ट्र में भारतीय संस्कृति के स्वयंभू ठेकेदार हैं। ये सैनिक हर साल 14 फरवरी (वेलेंटाइन डे) के आस-पास अतिरिक्त सक्रिय हो जाते हैं। चूंकि उस दौरान भारतीय संस्कृति को पतन से बचाने की बड़ी जिम्मेवारी इनके सिर होती है। इनके अखबार की पंचलाइन है, ‘ज्वलंत हिन्दुत्वाचा पुरस्कार करणारे एकमेव मराठी दैनिक’, और अगले ही पृष्‍ठ पर मिलता है, फिल्म ‘सात कच्ची कलियां’ (23 नवंबर 09, पृष्‍ठ 02) का विज्ञापन।

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[2 Dec 2009 | 7 Comments | ]
नंगई को यहां से देखो

विभा रानी ♦ आप कहते हैं कि इससे और भी व्यभिचार बढ़ेगा। दरअसल इससे नज़रिया और उदार हुआ है। हम बचपन में मेले ठेले में पान की दुकान पर फ्रेम मढ़ी तस्वीरें देखते थे, उन तस्वीरों में एक महिला या तो केवल ब्रा में रहती थी या उसे ब्रा का हुक लगाते हुए दिखाया जाता था। ये तस्वीरें इसलिए लगायी जाती थीं ताकि पान की दुकान पर भीड बनी रहे। लोग भी पान चबाते हुए इतनी हसरत और कामुक भरी नज़रों से उन तस्वीरों को देखते थे कि लगता था कि यदि वह महिला सामने आ जाए तो शायद वे सब उसे कच्चा ही चबा जाएं। मगर अब या तो पश्चिम की देन कहिए या अपना बदलता नज़रिया या महानगरीय सभ्यता, आज लड़कियां कम कपड़े में भी होती हैं, तो कोई उन्हें घूर-घूर कर नहीं देखता।

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[29 Nov 2009 | 5 Comments | ]
हिंदी मराठी ज़िंदाबाद, भारतमाता कौन हैं आप?

वीना ♦ तभी तिरंगी पट्टी थामे कुछ हाथ मैदान में आये और शब्दों की पट्टी गले में पहने एक कन्या को बिन चेहरे के हथियारों के बीच खड़ा कर गायब हो गये। पट्टी पर लिखा है – ‘मराठी हिंदी की छोटी बहन या मौसी है। एक के प्रयोग से दूसरे के अपमान का सवाल ही नहीं उठता।’ कन्या के दो मुखौटे हैं। एक पर लिखा है ‘हिन्दी’ और दूसरे पर ‘मराठी।’ अपनी जान आफत में देख कन्या डरी-सहमी थर-थर कांप रही है। तिरंगे पट्टीधारी हाथों की इस हरकत से मुकुटधारी और नफ़रत से भर गये। इधर अकेली कन्या को देख दोनों तरफ के बिन चेहरे के हथियार अपना आपा खो बैठे, और कन्या के जिस्म से वस्त्र नोचने लगे।

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[28 Nov 2009 | Comments Off | ]
एनडीटीवी लाइफस्टाइल के बाद अब इमैजिन बेचने की तैयारी

जनतंत्र डेस्क ♦ इंडियन एक्सप्रेस की यह ख़बर सही निकलती है तो एनडीटीवी के प्रमोटर अब एनडीटीवी इमैजिन को बेचने की तैयारी में जुटे हैं। करीब डेढ़ साल पहले यह चैनल बड़े तामझाम के साथ शुरू हुआ था। लेकिन कंपनी की माली हालत इतनी ख़राब है कि अब वह इस सफेद हाथी को ज्यादा दिनों तक नहीं पाल सकती। आर्थिक संकट से उबरने के लिए एक हफ़्ते पहले ही एनडीटीवी ने अपना लाइफस्टाइल चैनल एनडीटीवी गुडटाइम्स के 69 फीसदी शेयर एक विदेशी कंपनी स्क्रिप्स को बेच दिए थे। रिपोर्ट के मुताबिक इमैजिन के सौदे के लिए टाइम वार्नर से बातचीत अंतिम चरण में है। इस सौदे से जुड़े दो करीबी लोगों ने बताया है कि एनडीटीवी अपनी पूरी हिस्सेदारी करीब 75-80 फीसदी टर्नर ब्रॉडकास्टर्स को बेच सकती है।

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[28 Nov 2009 | 2 Comments | ]
मुंबई में बच्‍चन संध्‍या

अब्राहम हिंदीवाला ♦ डा हरिवंश राय बच्‍चन की 102 वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। बच्‍चन संध्‍या का संयोजन पुष्‍पा भारती ने किया है। पुष्‍पा जी बच्‍चन परिवार की करीबी रही हैं। अमिताभ बच्‍चन के शुरुआती दौर में उन्‍होंने बच्‍च्‍न परिवार पर धर्मयुग में ढेर सारे लेख लिखे थे। अमिताभ बच्‍चन हमेशा पुष्‍पा भारती और धर्मवीर भारती का सादर स्‍मरण करते हैं। अमिताभ बच्‍चन अपने पिता की स्‍मृति में बहुत कुछ करना चाहते हैं। अपनी फिल्‍मी व्‍यस्‍तता के कारण सही प्‍लानिंग नहीं कर पा रहे हैं। प्रसून जोशी की सलाह पर वे कवि सम्‍मेलनों की शुरुआत करने पर विचार कर रहे हैं। इस काव्‍यांजलि की खास बात यह है कि बच्‍चन परिवार के सभी सदस्‍य इसमें शामिल होंगे। वे सभी बच्‍चन की रचनाओं का पाठ करेंगे।

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[27 Nov 2009 | One Comment | ]
शरद जोशी की कहानी पर फिल्म बनाने के अधिकार खरीदे

डेस्‍क ♦ बॉलीवुड कलाकार अजय देवगन अभिनीत फिल्म ‘अतिथि तुम कब जाओगे?’ प्रख्यात लेखक शरद जोशी की लघु कथा पर आधारित है। किसी भी प्रकार की कॉपीराइट की परेशानी से बचने के लिए फिल्म के निर्माता ने कहानी पर फिल्म बनाने का अधिकार खरीद लिया है। जोशी की यह कहानी केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) की नौंवी कक्षा की हिंदी के पाठ्यपुस्तक में शामिल है। ‘अतिथि तुम कब जाओगे?’ के निर्माता कुमार मंगत के मुताबिक, “यद्यपि यह कुछ हजार शब्दों की एक लघु कहानी है, फिर भी हम कोई जोखिम नहीं उठाना चाहते थे। किसी भी प्रकार के विवाद से बचने के लिए हमने उनकी बेटी से संपर्क किया और कहानी के अधिकार खरीद लिये।”

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[26 Nov 2009 | 2 Comments | ]
एक मुंबई, जिसे टीवी ने नहीं देखा…

सीएसटी अभी भी टेलीविजन के स्क्रीन से दूर था। सीएसटी पर डोंडे अभी भी लगातार घोषणा कर रहे थे। सभी छह लोकल प्लेटफ़ार्म पर आ चुकी थीं। अब इसके बाद फ़िलहाल किसी और गाड़ी के आने की गुंजाइश नहीं थी। डोंडे लगातार प्लेटफ़ार्म पर निगाह डाल अनाउंसमेंट किये जा रहे थे। इसी बीच छह नंबर प्लेटफ़ार्म के ठीक सामने हाथ में एके-47 लिए शख्स ने उभार लिया। यह डोंडे को दिखनेवाला पहला आतंकी था। ‘एक उसके पीछे भी है।’ डोंडे के साथी उसे बताने लगे। डोंडे पूरी तरह से आतंकियों को देख नहीं पा रहे थे। लेकिन, उन्होंने अपनी घोषणाओं का सिलसिला बनाये रखा। उनके दोनों साथी शीशे से झांक-झांक कर उन दोनों आतंकियों को देख रहे थे।

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[26 Nov 2009 | No Comment | ]
26/11… मुनाफे का प्रसारण

हिमांशु शेखर ♦ भारत आतंकवाद की मार लंबे समय से झेलता रहा है। लेकिन ऐसी वारदातों के मीडिया कवरेज को लेकर पहली बार सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, जब से भारत में इलैक्ट्रानिक मीडिया के मात्रात्मक विकास ने जोर पकड़ा है तब से ही जनसंचार के इस माध्यम पर सवाल खड़े किये जाते रहे हैं। बाजारीकरण की आंधी के प्रतिरोध की अपेक्षा लोकतंत्र के चौथे खंभे से किया जाना गलत भी नहीं है। पर व्यावसायिक मजबूरियों में ही सही खबरिया चैनल खबरिया सरोकारों से भटके और अब तो यह मान भी लिया गया कि अगर बाजार में बने रहना तो दशकों पुराने आदर्शों से मुक्त होना होगा।