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डेस्क ♦ फैशन की सरहद कपड़े से तय होती है। फिल्मों में राजकपूर निहायत ही साहसी माने गये, जब उन्होंने बॉबी में डिंपल को बिकनी में दिखाया, राम तेरी गंगा मैली में मंदाकिनी की छाती दिखायी और मेरा नाम जोकर में सिमी ग्रेवाल को पूरी तरह नग्न दिखाया। सेंसर बोर्ड को इन दृश्यों पर कोई आपत्ति नहीं थी और ये फिल्में आज भी दूरदर्शन पर दिखायी जाती हैं। सिनेमा में नग्नता के साथ कथा का तर्क दिया जाता है, लेकिन फैशन में महज प्रदर्शन का। हम जानते हैं कि फैशन शो पहनावे की चल रही रवायत के हिसाब से नहीं होता। वह भविष्य में पहनावे की पटकथा होता है। लिहाजा हम मानते हैं कि फैशन टीवी पर बैन नहीं लगना चाहिए।
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ब्रजेश कुमार झा ♦ चांदनी चौक के नजदीक तुर्कमान गेट से एक पतला रास्ता बुलबुली खान की तरफ जाता है। यही वह इलाका है जहां रजिया सुल्तान यानी इतिहास की पहली महिला सुल्तान को दफनाया गया था। आज इस कब्रगाह की हालत देखेंगे तो महिला दिवस का डंका बजाने वालों की हकीकत समझ में आएगी। देखिए, देश के सबसे बड़े ओहदे पर महिला है। सरकार के भी कान खींच-खींचकर फिलहाल उसे एक महिला ही चला रही है। उस पर से दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का रुतबा देख लें। इनके राज में इल्तुतमिश की बेटी और एक जमाने की क्रांतिकारी महिला की कब्र उपेक्षित है। वह एक गौरवशाली इतिहास लिये लेटी है। अपनी कब्र पर एक छत को तरसती हुई।
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डेस्क ♦ यह अमेठी की घटना है। यहां से राहुल गांधी सांसद हैं। यहां एक आदमी का क़त्ल हुआ। पुलिस वालों ने इस मामले में पूछताछ के लिए उसी बीवी को थाने बुलाया। पूछताछ इस अंदाज़ में की कि बताओ तुम्हारे आदमी की हत्या किसने की? क्या तुमने की? महिला सफाई देती रही, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। पुलिस ने महिला को पीटना शुरू कर दिया। वहीं एक महिला कांस्टेबल भी खड़ी थी। महिला दलित जाति से आती है। इस घटना को उजागर करने वाले स्वतंत्र पत्रकार ने कहा कि वह पुलिस वाले की करतूत को कैमरे में कैद कर रहा था ताकि उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सके। इस वजह से वह ऐन वक्त पर महिला की मदद नहीं कर सका। दरअसल उस टेप की वजह से ही कैलाश द्विवेदी नाम के इस पुलिस वाले को बर्खास्त किया गया है।
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रीतेश ♦ वैसे ये तस्वीरें पहले भी यहां-वहां चिरकुट तरीके से दिखी हो सकती हैं लेकिन इसे एक जगह जुटाकर और सजाकर इस कैप्शन के साथ छापना कि लो उठ गयी स्कर्ट और देख लो कैमरे ने क्या कैद किया है, इस गैलरी में छपी छह महिलाओं के लिए अपमानजनक है। नवभारत टाइम्स की साइट पर फोटो धमाल के नाम पर ऐसी-ऐसी तस्वीरें गैलरी में छुपा-छुपा कर लगायी गयी हैं जिन्हें देखने की इजाजत अब कुछ सर्च इंजन भी नहीं देती। एक अखबार की साइट पर ख़बर या शिक्षा देने का काम होता है। सवाल ये उठता है कि ये गैलरी किस दर्जे में रखी जाए।
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डेस्क ♦ उदय प्रकाश हमारे समय के एक विलक्षण कथाकार हैं। उनकी मशहूरियत का अंदाज़ा लगा पाना आसान नहीं। वे उन लेखकों की पांत के संभवत: अंतिम स्तंभ हैं, जो फ्रीलांसर की तरह जीवन जीने में भरोसा रखते हैं। बंधी बंधायी लीक उनका स्वभाव नहीं है और यात्रा के बग़ैर उन्हें चैन नहीं हैं। वे घूमते हैं। सरहद के भीतर। सरहद के पार। इन दिनों वे जर्मनी की यात्रा पर हैं। उनके एक जासूस प्रशंसक ने वहां से उनकी दो करतबी तस्वीर हमें भेजी है। दोनों तस्वीर मोहल्ला लाइव के पाठकों की नज़र।
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रोचक कुमार ♦ dan और alejandra borris ने मिल कर 2010 का यह कैलेंडर तैयार किया है। इसे तैयार करने में alegandra ने श्वानों को योग मुद्राएं सिखायी हैं। सारी योग मुद्राएं सही तरीके से तो मनुष्य नहीं कर पाते, फिर श्वानों के लिए तो यह और भी मुश्किल था। बाद का काम फोटोशॉप ने कर दिया है। अमेरिका की योग प्रशिक्षक suzi teitelman ने कभी कल्पना की थी कि वह अपने पालतू श्वान को योग सिखाएंगी। वह जब योग करती थीं तो उनका श्वान उनकी नक़ल करता था। 2010 का यह कैलेंडर धड़ल्ले से बिक रहा है और लोग इसे पसंद कर रहे हैं। अगर आप श्वान प्रेमी हैं, तो भी दुखी न हों, क्योंकि dan और alajandra morris फोटोशॉप से सब हासिल किया है।


