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Articles in the फ फ फोटो फोटो Category

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[30 Jun 2010 | 16 Comments | ]
आइए, तस्‍वीरों के साथ उड़ें, “उड़ान” के नजारे लें…

अब्राहम हिंदीवाला ♦ विक्रमादित्‍य मोटवाणी की ‘उड़ान’ कान फिल्‍म फेस्टिवल के ‘अनसर्टेन रिगार्ड’ खंड के लिए चुनी गयी थी। सात सालों के बाद किसी भारतीय फिल्‍म को यह अवसर मिला था। मजेदार तथ्‍य यह है कि उन दिनों कान में मौजूद हमारे स्‍टारों को इतनी फुर्सत भी नहीं मिली कि वे ‘उड़ान’ के शो में जाकर भारत के गौरव में शामिल हों। और मीडिया… उसकी आंखें तो कंगूरों (लंगूरों) से हटती ही नहीं… इसलिए ‘उड़ान’ की कोई खबर और फुटेज नहीं दिखी। निराश न हों अनुराग, संजय और विक्रमादित्‍य… आप अपने दर्शकों का नया समूह तैयार कर रहे हैं। (किसी भी मीडिया में पहली बार पेश है उड़ान की एक्‍सक्‍लूसिव तस्‍वीरें)

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[29 Jun 2010 | One Comment | ]
इन तस्वीरों पर गृह मंत्रालय को NHRC का नोटिस

डेस्‍क ♦ इन तस्वीरों को पूरी दुनिया ने देखा है। ये तस्वीरें 17 और 18 जून को अख़बारों में छपी थीं। पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर जिले में सुरक्षाबलों ने अपने अभियान में जिन लोगों को मारा था, उनके शवों भेड़-बकरियों की तरह टांग कर ले गये थे। इन्हीं तस्वीरों के आधार पर अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को नोटिस भेजा है। आयोग ने मंत्रालय से इस मसले पर 27 जुलाई तक अपनी रिपोर्ट सौंपने को कहा है। मानवाधिकार आयोग की तरफ से जारी बयान में कहा गया है कि अख़बारों में छपी रिपोर्ट सही हैं तो यह एक गंभीर मसला है।

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[7 Jun 2010 | 3 Comments | ]
नजर पर पर्दा या जिस्‍म पर पर्दा… देखिए स्‍पेशल रिपोर्ट!

डेस्‍क ♦ एनडीटीवी इंडिया हर शुक्रवार को प्राइम टाइम में रात साढ़े नौ बजे रवीश की रिपोर्ट नाम से, मुद्दों से जुड़ा विशेष कार्यक्रम प्रसारित करता है। इसी कड़ी में, मुस्लिम महिलाओं के बुर्के को लेकर जारी किये गये देवबंद के एक मौलाना के फतवे पर उठे व्यापक वाद-विवाद को समेटते हुए परदे में नजर प्रसारित हुआ। रवीश एक परिपक्व और मंझे हुए रिपोर्टर हैं। पिछले 15 वर्षों के रिपोर्टिंग के अनुभवों ने उन्हें मुद्दे की संवेदनशीलता और व्यापकता दोनों को सहेजने में माहिर बना दिया है। इसी महारत के साथ उन्होंने इस संवेदनशील और अंतरराष्‍ट्रीय बन चुके मुद्दे को भी उसके तमाम पहलुओं के साथ उभारा। इस मसले पर जब दुनिया भर में बच्चे से ले कर बूढ़ा तक एक तयशुदा नजरिया बना चुका है, रवीश ने पक्ष-विपक्ष के स्वर उभारे।

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[3 Jun 2010 | 3 Comments | ]
पत्रकार संगठन ने किया घूस का स्टिंग ऑपरेशन

डेस्‍क ♦ प्रयाग महिला विद्यापीठ में एमए हिंदी की मौखिक परीक्षा के दौरान परीक्षार्थियों से पांच-पांच सौ रुपये रिश्वत लेते हुए एक अध्‍यापिका कैमरे में कैद हो गयी है। स्टिंग जेयूसीएस के पत्रकारों ने किया। स्टिंग वीडियो जारी करते हुए जेयूसीएस के सदस्‍यों राघवेंद्र प्रताप सिंह, शाहनवाज आलम और राजीव यादव ने उपरोक्त परीक्षा को तत्काल रद्द करने और कालेज प्रशासन पर मुकदमा दर्ज करने की मांग की है। जेयूसीएस ने इस बाबत यूजीसी और राज्यपाल को भी तथ्यों को कार्यवाही के लिए पत्रक भेजा है। इस वीडियो टेप को 1 जून को 10 बजकर पचपन मिनट से 11 बजकर दस मिनट के बीच सूट किया गया। इस टेप में प्रयाग महिला विद्यापीठ की एक अध्यापिका और एक बाबू पांच-पांच रुपये के नोट ले रहे हैं।

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[2 Jun 2010 | 4 Comments | ]
नई दुनिया का ब्‍लंडर : राहुल गांधी को राजीव गांधी लिखा

डेस्‍क ♦ आज नई दुनिया ने एक ब्‍लंडर किया है। दिल्‍ली, इंदौर सहित कई शहरों से प्रकाशित होने वाले नई दुनिया के दिल्‍ली के संस्‍करण में सातवें नंबर पन्‍ने पर एक तस्‍वीर छपी है। तस्‍वीर में यूपीए सरकार के एक साल पूरे होने पर रिपोर्ट कार्ड जारी करने वाली सभा में कांग्रेसी लीडरों की कतार है। इसमें यूपीए सरकार के मौजूदा मंत्रियों के साथ राहुल गांधी भी हैं, लेकिन उनका नाम राहुल गांधी की जगह राजीव गांधी छपा हुआ है। यह राहुल गांधी में राजीव गांधी की छवि देखने का मसला है, या डेस्‍क की लापरवाही से हो गयी एक सामान्‍य सी गलती – इस बारे में हम कुछ नहीं कह सकते। सिवा इसके कि इस गलती को हम वर्चुअल स्‍पेस के लोगों के साथ शेयर कर सकते हैं।

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[16 Apr 2010 | One Comment | ]
परंपराओं की छांव में कला की आहट

विनीत उत्पल ♦ रचनात्मकता और कलात्मकता किसी परिचय का मोहताज नहीं होता। हां, यह जरूर है कि एक प्लेटफार्म मिलने से उन्हें एक पहचान मिलती है। सिंधु घाटी सभ्यता से लेकर गंगा-जमुनी सभ्यता में जितनी संस्कृति पनपी और विकास हुआ, उसे नकारा नहीं जा सकता है लेकिन सरकार या सरकारी छांव में जो पले-बढ़े और जो भांड-चारण हुए, उनकी योग्यता कहीं ज्यादा आंकी गयी। सृजन और इससे जुड़ी कला के बारे में यह बात सौ फीसद सही है। पिछले दिनों ललित कला अकादमी की कलावीथियों में पूर्वी उत्तरप्रदेश, बिहार और झारखंड के 43 कलाकारों के कामों से रूबरू हो कर दिल्ली के कलाकार और समीक्षक चौंक उठे।

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[28 Mar 2010 | 3 Comments | ]

( … ) ♦ चार दिन हो या चार साल, जो हमारे बीच हुआ क्‍या वो भुलाया जा सकता है? जो चार साल में होता, वो चार मिनट भी हो जाए तो भी उसके मायने वही रहते हैं। वो वक्‍त पर निर्भर नहीं करता मिस्‍टर कापड़ी।

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[23 Mar 2010 | 4 Comments | ]
सौंदर्य की नदी नर्मदा पर जादू टोने का अमावस

पुष्‍यमित्र ♦ वहां तीन दिन गुजरे और तीनों दिन सुबह नर्मदा स्नान और शाम को तटों की खूबसूरती निहारते हुए गुजरे। यह एक अनूठा अनुभव था। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि उस दौर में जहां विकास के नाम पर हर खूबसूरत चीज पर कालिख पोती जा रही है, वहां कम से कम कोई तो ऐसी जगह है जहां का माहौल शांत, सुंदर और स्निग्ध है। मगर जिस दिन लौटना था, उस सुबह अनायास निगाहों के सामने ऐसा नजारा आ गया कि उसने तीन दिनों तक मन पर पड़ी पवित्र छाप को मटियामेट करके रख दिया। ठीक उसी तरह जैसे एक सुंदर चेहरे पर किसी शैतान ने तेजाब फेंक दिया हो।

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[13 Mar 2010 | 8 Comments | ]
एफटीवी पर रोक सरकार की रूढ़ीवादी सोच की मिसाल है

डेस्‍क ♦ फैशन की सरहद कपड़े से तय होती है। फिल्‍मों में राजकपूर निहायत ही साहसी माने गये, जब उन्‍होंने बॉबी में डिंपल को बिकनी में दिखाया, राम तेरी गंगा मैली में मंदाकिनी की छाती दिखायी और मेरा नाम जोकर में सिमी ग्रेवाल को पूरी तरह नग्‍न दिखाया। सेंसर बोर्ड को इन दृश्‍यों पर कोई आपत्ति नहीं थी और ये फिल्‍में आज भी दूरदर्शन पर दिखायी जाती हैं। सिनेमा में नग्नता के साथ कथा का तर्क दिया जाता है, लेकिन फैशन में महज प्रदर्शन का। हम जानते हैं कि फैशन शो पहनावे की चल रही रवायत के हिसाब से नहीं होता। वह भविष्‍य में पहनावे की पटकथा होता है। लिहाजा हम मानते हैं कि फैशन टीवी पर बैन नहीं लगना चाहिए।

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[8 Mar 2010 | 4 Comments | ]
एक कोने में गुमसुम, रजिया सुल्‍तान का मजार

ब्रजेश कुमार झा ♦ चांदनी चौक के नजदीक तुर्कमान गेट से एक पतला रास्ता बुलबुली खान की तरफ जाता है। यही वह इलाका है जहां रजिया सुल्तान यानी इतिहास की पहली महिला सुल्तान को दफनाया गया था। आज इस कब्रगाह की हालत देखेंगे तो महिला दिवस का डंका बजाने वालों की हकीकत समझ में आएगी। देखिए, देश के सबसे बड़े ओहदे पर महिला है। सरकार के भी कान खींच-खींचकर फिलहाल उसे एक महिला ही चला रही है। उस पर से दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का रुतबा देख लें। इनके राज में इल्तुतमिश की बेटी और एक जमाने की क्रांतिकारी महिला की कब्र उपेक्षित है। वह एक गौरवशाली इतिहास लिये लेटी है। अपनी कब्र पर एक छत को तरसती हुई।