Category: रिपोर्ताज

एक मामूली ‘गालिब’ की कहानी, जो असदउल्‍ला खां नहीं है 16

एक मामूली ‘गालिब’ की कहानी, जो असदउल्‍ला खां नहीं है

♦ सोपोर से लौटकर विश्‍वदीपक एक वो गालिब था. एक ये गालिब है…कितना फर्क है. वक्त खामोशी से हमें अपने इशारे पर नचाता जाता है और हमें पता भी नहीं चलता. 2006 में मासूम...

पुलिस कुंभ में पुलिस नजर आती है 0

पुलिस कुंभ में पुलिस नजर आती है

♦ विकास कुमार इलाहाबाद में संगम के किनारे कुंभ सजा है। बांस-बल्लियों के सहारे बसा एक पूरा शहर। एक अलग समाज…! इस समाज को सुरक्षा भी चाहिए ही। सुरक्षा के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस,...

जै गंगा …! 0

जै गंगा …!

आंचलिक संलग्नता, रागात्मक कथादृष्टि और रचनात्मक व अदभुत भाषा-शैली के अमर उपन्यासकार फणीश्वरनाथ रेणु ने आंचलिक उपन्यासों की परंपरा को स्थापित करने का सबसे पहला प्रयास किया। उन्होंने उपन्यास लेखन के पहले से चली...

जहां रेल यात्रा नरक यंत्रणा है 0

जहां रेल यात्रा नरक यंत्रणा है

♦ एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास रेलवे लाइनों के दोनों तरफ राजनीतिक संरक्षण से हुए व्यापक अतिक्रमण और झुग्गी झोपडि़यों की कतारों की वजह से ट्रेनें तेज गति से चल ही नहीं सकतीं। रेल लाईन पर...

मोदी को पता है किस पर गुर्राना है, किसे लाड़ दिखाना है 1

मोदी को पता है किस पर गुर्राना है, किसे लाड़ दिखाना है

एनडीटीवी के कार्यकारी संपादक रवीश कुमार इन दिनों गुजरात चुनाव कवर कर रहे हैं। टीवी के लिए जो वो दिखा-बोल रहे हैं, उसके अलावा कुछ झलकियां सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर भी छींट रहे हैं।...

राजशेखर व्‍यास की किताब में अमेरिका का बेबाक विश्‍लेषण 0

राजशेखर व्‍यास की किताब में अमेरिका का बेबाक विश्‍लेषण

♦ हरि जोशी ऊर्जावान एवं प्रतिभा संपन्‍न लेखक राजशेखर व्‍यास की सद्य: प्रकाशित कृति “आंखों देखा अमेरिका” अभी-अभी पूरी पढ़ी है। लेखक ने जिस अनूठी दृष्टि से अमेरिका को देखा है वह सचमुच मननीय...

चांद पर श्री गणेश जी बैठे हैं और चांद ट्रक पर सवार है! 1

चांद पर श्री गणेश जी बैठे हैं और चांद ट्रक पर सवार है!

संजय झा मस्‍तान ♦ चांद पर श्री गणेश जी बैठे हैं और चांद ट्रक पर सवार है! गणेश जी के साथ ट्रक पर बेसुध भक्त भी हैं! चप्पल पहने पैर लटकाये भक्तों ने ट्रक पर अपनी झालर बना के अपनी ही झांकी निकाल ली है! आज वे सब स्व-मूर्त हो गये हैं! तभी चांद पर से गणेश जी को उतारते हुए ट्रक पर एक भक्त ज्यादा झुक गया और बप्पा के हाथ के थाल से एक लड्डू लुढ़क गया! बात कानो कान फैल गयी! हाथों हाथ लोग लड्डू ढूंढ़ने लगे! सामने तट था! किनारे पर अफरा तफरी मच गयी! अचानक इस बात की होड़ लग गयी कि लड्डू किसको मिलता है! सब अपने अपने अनुमान की दिशा में लपक लिये! लोग ऐसे भाग रहे थे जैसे घर भागा जा रहा हो! वहीं मेडिकल का कचड़ा खुले में बह रहा था! कचरे का सिरिंज सबको चुभ रहा था, लोग बेखबर थे!

रावलपिंडी में मिला फिक्सिंग का जिन्न 0

रावलपिंडी में मिला फिक्सिंग का जिन्न

शिवेंद्र कुमार सिंह ♦ सनसनीखेज खबरें अक्सर अर्धसत्य पर आधारित होती हैं। रावलपिंडी में भी ऐसा ही हुआ। अचानक पूर्व तेज गेंदबाज सरफराज नवाज ने मैच फिक्सिंग के भूत को जिंदा कर दिया, उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान और भारत की पूरी सीरीज फिक्स है। सरफराज नवाज ने इस खबर के प्रचार प्रसार के लिए बड़ा ही अनोखा तरीका अपनाया। जो भी पत्रकार उन्हें इंटरव्यू के लिए फोन करता, वो उसे अपने घर बुलाते। पहले शानदार मेहमान नवाजी करते – शराब पिलाते। फिर उनकी नाराजगी का सिलसिला इमरान खान की बातों से शुरू होता था। अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में बिग एंड यंग के नाम से मशहूर इस जोड़ी में सरफराज को बिग और इमरान को यंग कहा जाता था।

न “वहां” का वीजा आसानी से मिलता है, न “यहां’ का 5

न “वहां” का वीजा आसानी से मिलता है, न “यहां’ का

शिवेंद्र सिंह ♦ रजा भाई भी बड़ी दिलचस्पी से दिल्ली के बारे में पूछ रहे थे। कहने लगे यार बड़ा मन है एक बार हिंदुस्तान घूमने का। कुछ ही घंटों में उनसे इतनी आत्मीयता बढ़ चुकी थी कि उन्होंने जैसे ही हिंदुस्तान घूमने की इच्छा जतायी, हमने उन्हें अपना मेहमान बनाने की पेशकश रख दी। फिर रजा भाई थोड़े संजीदा हो गये, कहने लगे वीजा नहीं मिलता हिंदुस्तान का। उनकी ये बात इतनी ज्यादा जायज थी कि हमें पाकिस्तान का वीजा लेने के लिए की गयी अपनी कवायद याद आ गयी। हमने उन्हें पूरा किस्सा सुनाया, फिर वो खुद ही बोले – सोचिए जब आप लोग सहाफी (पत्रकार) हैं और आपको इतनी दिक्कत आयी, तो हमें कौन पूछने वाला है। हमने उनसे पूछा कि अगर हम उनसे हिंदुस्तान जाने के बाद राब्ता (संपर्क) कायम रखें और कुछ महीनों बाद उन्हें किसी शादी ब्याह के मौके पर बुलाएं तो क्या उन्हें वीजा मिल जाएगा, उनके चेहरे पर थोड़ी खुशी झलकी।

वो ईद की ईदी… लंबी नमाजें… सेवइयों की झालर… 5

वो ईद की ईदी… लंबी नमाजें… सेवइयों की झालर…

शिवेंद्र सिंह ♦ मैंने 2004 से लेकर 2006 के बीच पाकिस्तान के चार दौरे किये। आज करीब सात साल होने वाले हैं। बीते सालों में हालात बदतर होते गये। लाहौर में धमाका, रावलपिंडी में धमाका, पेशावर में धमाका, कराची में धमाका, मुल्तान में धमाका, इस्लामाबाद में धमाका… बेनजीर भुट्टो की हत्या, श्रीलंका की क्रिकेट टीम पर दिन दहाड़े हमला… और तो और, दुनिया के सबसे बड़े आतंकवादी लादेन के पाकिस्तान में मारे जाने के बाद हुई आंतकी घटनाएं। हर कोई यही सोचता है कौन जाएगा पाकिस्तान और क्यों जाएगा… मेरी जरूर बड़ी ख्वाहिश थी कि एक बार मैं पूरे परिवार के साथ पाकिस्तान जाऊंगा, उन लोगों से मिलूंगा जिन्होंने इतना प्यार दिया कि मैं अगर पाकिस्तान पर बोलना शुरू करूं तो बहुत दिन लगेंगे।