Category: व्याख्यान

एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना! 2

एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना!

हावर्ड रेनगोल्ड ♦ आधुनिक अर्थशास्त्र का मौलिक सिद्धांत आपको बताएगा कि आता हुआ एक रुपया सिर्फ इसलिए अस्वीकार करना गलत है क्योंकि किसी दूसरे अनजान आदमी को तो 99 रुपये मिल रहे हैं। लेकिन हजारों अमरीकी, यूरोपीय और जापानी विद्यार्थियों के साथ प्रयोगों में एक बड़ी संख्या में वो सारे विभाजन निरस्त हो गये, जो 50-50 के आसपास नहीं थे।

समय आ गया है कि हम सबको पत्रकार बनना होगा! 6

समय आ गया है कि हम सबको पत्रकार बनना होगा!

शुभ्रांशु चौधरी ♦ मैं हमारे राष्ट्रीय कवि रवींद्रनाथ टैगोर की एक कविता के साथ अपनी बात खत्म करता हूं। उन्होंने बहुत साल पहले लिखा था, बांग्ला में : आमरा सोबाई राजा, आमादेर एई राजार राजोत्ते। अर्थात लोकतंत्र के इस नये राज में हम सभी राजा हैं। समय आ गया है कि हम सब को पत्रकार बनना होगा, जिससे कि वही लोकतंत्र मजबूत हो, और हमारा कल बेहतर हो।

जब तक खुद को निर्दोष साबित नहीं करते, आप अपराधी हैं! 0

जब तक खुद को निर्दोष साबित नहीं करते, आप अपराधी हैं!

क्ले शर्की ♦ पीपा और सोपा इस मीडिया मोनोपोली और नागरिक अधिकार के बीच युद्ध की दूसरी कड़ी है। मगर जहां डीएमसीए अंदर घुस कर काम करता था … कि हम आपके कंप्‍यूटर में घुसे हैं, आपके टीवी का हिस्सा हैं, आपके गेम मशीन में मौजूद हैं, और उसे वो करने से रोक रहे हैं, जिसके वादे पर हमने उन्हें खरीदा था … पीपा और सोपा तो परमाणु विस्फोट जैसे हैं और ये कह रहे हैं कि हम दुनिया में हर जगह पहुंच कर कंटेंट को सेंसर करना चाहते हैं।

अगर वाकई कुछ करना है, तो डिग्रियों को फेंक दीजिए! 20

अगर वाकई कुछ करना है, तो डिग्रियों को फेंक दीजिए!

बंकर रॉय ♦ मैं अपनी बात ये कहके खत्‍म करना चाहूंगा कि कि समाधार आपके अंदर ही होता है। समस्‍या का हल अपने अंदर ढूंढिए। और उन लोगों की बात सुनिए, जो आपसे पहले समाधान कर चुके हैं। सारी दुनिया में ऐसे लोग मौजूद हैं। चिंता ही मत करिए। विश्‍व बैंक की बात सुनने से बेहतर है, आप जमीनी लोगों की बातें सुनें। उनके पास दुनिया भर के हल हैं।

हमारा सिनेमा स्‍थानीय होगा, तभी वह मौलिक भी होगा! 1

हमारा सिनेमा स्‍थानीय होगा, तभी वह मौलिक भी होगा!

मनोज वाजपेयी ♦ लोकल ग्लोबल तभी हो सकता है, जब वह अपनी मिट्टी से जुड़ा हो। इरान में बहुत बाधाएं हैं, फिर भी वहां की बन रही फिल्में विश्व भर में संदेश दे रही हैं। अपने यहां कई तरह की बाधाएं हैं। सेंसर भी एक बड़ी बाधा है। सिनेमा से मैं भी बहुत इंस्पायर्ड हुआ। मैं मानता हूं कि मुंबई का केंद्रीकरण टूटना चाहिए। जब तक हमारे ही लोग अपनी कहानी को नहीं ढूंढेंगे, अपने समाज को पर्दे पर लाने की नहीं सोचेंगे, तो दूसरे से यह आशा करना बेकार है। जरूरी है कि हम फिल्में देखें तकनीक सीखने के लिए, कहने की कला सीखने के लिए।

मीटिंगों में आड़ी-तिरछी रेखाएं खींचने वालो, लगे रहो! 2

मीटिंगों में आड़ी-तिरछी रेखाएं खींचने वालो, लगे रहो!

सुन्‍नी ब्राउन ♦ जो लोग शब्दों में निहित जानकारी देखते समय कागज पर आड़ी-तिरछी रेखाएं खींचते हैं, वो उसका ज्यादा बड़ा हिस्सा याद रख पाते हैं, अपने डूडल-हीन साथियों की तुलना में। ऐसा माना जाता है कि डूडल करने वाले का ध्यान भंग हो चुका है, मगर असलियत ये है कि डूडल बनाने से आपका ध्यान बंटने से बचा रहेगा।

भूखें रहें | मासूम रहें | जिज्ञासु रहें | गलतियां करें… 13

भूखें रहें | मासूम रहें | जिज्ञासु रहें | गलतियां करें…

स्‍टीव जॉब्‍स ♦ आपका जीवनकाल सीमित है; उसे दूसरे किसी की जिंदगी जीने में व्यर्थ न कीजिए। सिद्धांतों में मत फंसिए – जो कि दूसरों की सोच का निष्‍कर्ष है। दूसरों के मतों के शोर द्वारा अपनी अंदरूनी आवाज का कत्ल मत होने दीजिए। और सबसे जरूरी, अपने दिल और अपने मन की बात करने की हिम्मत रखिए। दिल और मन को पता होता है कि आप सच में क्या बनना चाहते हैं।

भारत के लिए चीन तक पहुंचना फिलहाल आसान नहीं! 2

भारत के लिए चीन तक पहुंचना फिलहाल आसान नहीं!

याशेंग हुआंग् ♦ लोग मानते हैं कि भारत में विकास नहीं हो रहा है? एक कारण ये है कि वो हमेशा भारत की तुलना चीन से करते हैं। मगर चीन तो अपवाद है, आर्थिक विकास के मामले में। यदि आप क्रिकेट के खिलाड़ी हैं, और आपकी तुलना हमेशा सचिन तेंदुलकर से की जाएगी, तो लगेगा कि आप कुछ खास नहीं हैं। पर इसका मतलब ये तो नहीं है कि आप एक खराब क्रिकेट खिलाड़ी हैं।

इस इनकलाबी माहौल में जनता ही मीडिया की संपत्ति है! 5

इस इनकलाबी माहौल में जनता ही मीडिया की संपत्ति है!

वादा खानफार ♦ अल जजीरा को ऐसे खतरे के रूप में चिन्हित किया गया है, जिसके खिलाफ कठोर कदम उठाने की जरूरत है। पिछले महीनों में मिस्र, लीबिया, यमन, जौर्दन और सीरिया में हमारे साजो-सामान जब्त किये गये और हमारे संवाददाताओं को हिरासत में लिया गया और उन पर हमले किये गये।

लालू जी लालू जी क्‍या हुआ आपको, भूल गये खुद को? 11

लालू जी लालू जी क्‍या हुआ आपको, भूल गये खुद को?

डेस्‍क ♦ अब जब उनकी सत्ता कहीं नहीं है और वे एक मामूली सांसद भर हैं, उनका बर्ताव कांग्रेस को खुश करने में खर्च होता रहता है। एक बड़े कद के राजनीतिज्ञ का यह हाल देखा नहीं जाता। अभी शनिवार को संसद में उन्‍होंने जिस तरह का भाषण दिया और अन्‍ना और उनकी टीम को जिस कदर कोसा, वह काफी हास्‍यास्‍पद था।