Category: संघर्ष

पेरूमल मुरुगन को फिर से जीना होगा

➧ प्रणय कृष्‍ण लेखक पेरूमल मुरुगन मर गया। वह भगवान नहीं है, लिहाजा वह खुद को पुनरुज्जीवित नहीं कर सकता। वह पुनर्जन्म में भी विश्वास नहीं करता। आगे से, पेरूमल मुरुगन सिर्फ एक अध्यापक...

आज खामोश रहे तो कल सन्नाटा छाएगा!

➧ अशोक कुमार पांडेय बहुत पेचीदा समय है यह और इससे मुठभेड़ करने की रणनीति तलाशने से पहले हमें भूमिका के बतौर न सिर्फ इसे समझना होगा बल्कि जिम्मेदारीपूर्वक इसे दूसरों तक पहुंचना और...

1

बापू हम शर्मिंदा हैं! तेरे कातिल जिंदा हैं!!

गोडसे मंदिर निर्माण पर प्रतिक्रिया : सिधौली, सीतापुर में हुई सभा गुजरात में सरदार पटेल की विशाल लौह प्रतिमा लगाने और पटेल जयंती को राष्‍ट्रीय एकता दिवस घोषित करने वाली मौजूदा केंद्र सरकार से...

0

हिंसा के विरुद्ध कला के बढ़ते कदम

♦ अरुण माहेश्‍वरी फ्रांस में जो हुआ, वह दुनिया के किसी भी कोने में कभी भी हो सकता है। भारत में जो आज जिस प्रकार धर्म, जाति, भाषा, क्षेत्र आदि के नाम पर संगठित...

0

कलम आज अपनी जय बोल! #CharlieHebdo

कलम में तलवार से अधिक ताकत होती है। ये कहावत पुरानी है और पेरिस में कलम की ताकत का अंदाजा भी हो गया जब शार्ली एब्‍दो पत्रिका के व्‍यंग्‍य बाणों से उखड़ कर आतंकियों...

2

खुले वेब मंचों के खिलाफ सरकार, विरोध करें

भारत सरकार ने 32 वेबसाइट को बंद कर दिया है। सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए। सरकार की दलील है कि इन वेबसाइट्स पर भारत विरोधी सामग्री परोसी जा रही थी। इन वेबसाइट्स...

0

असम के बेबस आदिवासियों को सहारा दें

2014 के 31 दिसंबर की रात के आखरी पहर में सारी दुनिया नये वर्ष के स्वागत में खुशियां बांट रही थी। लोग एक दूसरे को बधाइयां देकर, दिलकश पकवान खा कर, खिलाकर, नाच रहे...

0

भारत एक नवउपनिवेशवादी देश है

नवगठित नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी माओवादी के संयोजक कॉमरेड नेत्रा बिक्रम चंद ‘बिप्लव’ से विष्णु शर्मा की बातचीत पहले पुष्प कमल दहाल (प्रचंड) के नेतृत्व वाली एनेकपा (माओवादी) का विभाजन हुआ और मोहन बैद्य (किरण)...

0

सिनेमा में गांव की याद #HeeraMoti

♦ सैयद एस तौहीद मुंशी प्रेमचंद की चुनिंदा रचनाओं का फिल्मों में रूपांतरण हुआ था, जिसमें ‘दो बैलों की कथा’ पर आधारित और बलराज साहनी अभिनीत हीरा मोती का स्मरण कर रहा हूं। बलराज...

0

ध्वनि प्रदूषण वाले धर्म पर हमला है #PK

♦ मनोज खरे एक उत्कृष्ट फिल्म “PK” में कोई तथ्यात्मक मुद्दा नहीं मिला, तो अब फिल्म में एक मुसलमान एक्टर होने को ही टारगेट बना कर सब पिल पड़े हैं। अरे महान आत्माओं, फिल्म...