Category: uncategorized

पेड न्यूज रोकने के लिए होगी चुनाव प्रचार नियमों में ढील 0

पेड न्यूज रोकने के लिए होगी चुनाव प्रचार नियमों में ढील

♦ गजेंद्र यादव चुनाव प्रचार के सख्त नियमों में छूट मिलने की संभावना है, अर्थात भविष्य में होने वाले चुनाव प्रचार फीके नहीं रहेंगे। चुनाव आयोग के यह कदम उठाने के पीछे धन लेकर...

मंदी और चुनाव से निपटने का एक और हिंसक प्रयास: बजट 2013 0

मंदी और चुनाव से निपटने का एक और हिंसक प्रयास: बजट 2013

♦ अंजनी कुमार लगभग महीना भर पहले वित्त मंत्री चिदम्बरम का बयान छपा थाः ‘आर्थिक वृद्धि राष्ट्रीय सुरक्षा का मसला है’। 28 फरवरी को उनके बजट की मुख्य चिंता बजट घाटे को कम करने...

कोई किसी से प्‍यार नहीं करता, सब नाटक करते हैं 3

कोई किसी से प्‍यार नहीं करता, सब नाटक करते हैं

डेस्‍क ♦ स्‍त्री और पुरुष के बीच का साहचर्य, रिश्‍ता अब भी उतना ही अनसुलझा है, जितना पहली बार मनुष्‍य की ये दो प्रजातियां एक दूसरे से परिचित हुई होंगी। हां, उस पहली मुलाकात में यह भाव अंतिम बार रहा होगा कि मेरा मुझमें कुछ नहीं जो कुछ है सो तोर। क्‍योंकि न तो तब परिवार की परिकल्‍पना थी, न ही संपत्ति की अवधारणा। सभ्‍यताओं के विकास के साथ ही रिश्‍तों का नामकरण होता गया और उनमें जिम्‍मेदारी, नैतिकता के अर्थ डाले गये। एकनिष्‍ठता भी आधुनिक सामंती समाज के मूल्‍य हैं, मन के नहीं। मन हमेशा ही आदिम होता है, लेकिन उसकी अभिव्‍यक्ति क्‍योंकि सामाजिक होती है, इसलिए वह अक्‍सर संयमित तरीके से हमारे बर्तावों को नियंत्रित करता है।

आज महिषासुर और लार्ड मैकाले का बहुजन पाठ करेगा जेएनयू 2

आज महिषासुर और लार्ड मैकाले का बहुजन पाठ करेगा जेएनयू

लार्ड मैकाले की जयंती की पूर्व संध्‍या पर ALL INDIA BACKWARD STUDENTS FORUM ( AIBSF) & UNITED DALIT STUDENTS FORUM (UDSF) का संयुक्‍त कार्यक्रम लार्ड मैकाले और महिषासुर : एक पुर्नपाठ दिनांक – 24...

वो दिमाग जो खुशामदी नहीं है, सरकारों के लिए खतरा है! 10

वो दिमाग जो खुशामदी नहीं है, सरकारों के लिए खतरा है!

निखिल आनंद ♦ बिहार में फेसबुक पर लिखने के कारण नौकरी से निलंबन की इस घटना को हल्के से कोई भले ही ले लेकिन 21वीं शताब्दी के सूचना क्रांति दौर में हुई ये घटना परम आश्चर्य का विषय है। विचार-अभिव्यक्ति पर खतरे से जुड़ी इस पूरी परिस्थिति के निर्माण में मीडिया भी कम दोषी नहीं है।

2011 का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार अनुज लुगुन को 27

2011 का भारत भूषण अग्रवाल पुरस्‍कार अनुज लुगुन को

डेस्क ♦ समकालीन युवा कविता का सर्वाधिक प्रतिष्ठित सम्मान, भारत भूषण अग्रवाल कविता पुरस्कार अनुज लुगुन को उनकी कविता ‘अघोषित उलगुलान’ के लिए दिया जाएगा। इस वर्ष के निर्णायक उदय प्रकाश ने इसका चयन किया है। यह कविता ‘प्रगतिशील वसुधा’ के अप्रैल-जून 2010 के अंक में प्रकाशित हुई थी।

याचक से शासक बना है बीसीसीआई 0

याचक से शासक बना है बीसीसीआई

राहुल कुमार ♦ कभी क्रिकेट पर इंगलैंड का राज इसलिए था कि वे इस खेल के जन्मदाता थे, वेस्टइंडीज का इसलिए रहा कि वे विवियन रिचर्ड्स और माइकल होल्डिंग जैसे खिलाड़ियों से लैस थे, ऑस्ट्रेलिया का राज भी क्रिकेट पर उनके शानदार खेल की वजह से ही रहा। भारतीय क्रिकेट का राज इसलिए है कि उसके पास अकूत दौलत है, क्रिकेट का बड़ा बाजार है, गजब की प्रशासन क्षमता है और वह दुनिया की बेहतरीन टीमों में से एक है। भारतीय क्रिकेट पिछले आकाओं की तरह किसी एक वजह से राजा नहीं है।

महासचिव पद छोड़ेंगे बर्धन 0

महासचिव पद छोड़ेंगे बर्धन

विधानसभा चुनावों में मिली करारी शिकस्त से आहत भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी [भाकपा] के महासचिव ए.बी. बर्धन अपना पद छोड़ देंगे। बर्धन इसे चुनावी हार नहीं बल्कि वाम मोर्चे की राजनीतिक शिकस्त मानते हैं। उनका...

बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर उकेरने की कोशिश है कुरजां 1

बुलंद भारत की बुलंद तस्वीर उकेरने की कोशिश है कुरजां

सूरज प्रकाश ♦ ये शताब्दी स्मरण अंक है और इसमें हिंदी, उर्दू, अंग्रेजी, गुजराती, तेलुगू साहित्य की विराट परंपरा को आगे बढ़ाने वाले महानायकों को नमन करते हुए न केवल इन भाषाओं के मनीषी साहित्यकारों की रचनाएं जुटायी गयी हैं, बल्कि उन पर दुर्लभ संस्म‍रण और आलेख भी कुरजां के इस अंक में दिये गये हैं। संगीत, फिल्म और कला के क्षेत्र में जिन महानायकों का योगदान रहा है और संयोग से जिनकी शताब्दी‍ इन दिनों मनायी जा रही है, उन्हें भी पत्रिका में पूरा सम्मान दिया गया है।