Category: नज़रिया

कोई भी ख़बर सिर्फ़ ख़बर नहीं होती है। हमारे लिए ख़बर से ज़्यादा ज़रूरी उसको देखने का नज़रिया है।

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जहां जाति नहीं, वहां भी वह चिपका दी जाती है

♦शशिभूषण छत्तीसगढ़ के बस्तर में काम कर रही सामाजिक कार्यकर्ता बेला भाटिया कुछ दलित बौद्धिकों की नज़र में सवर्ण महिला हैं। महानगरों में टिके हुए इन चिंतकों को इससे फ़र्क़ नहीं पड़ता कि बेला...

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जाहिलों पर क्‍या कलम खराब करना!

➧ नदीम एस अख्‍तर मित्रगण कह रहे हैं कि मालदा पर मैं क्यों नहीं लिख रहा। मेरा जवाब है कि नहीं लिखूंगा। भीड़ की शक्ल में दानव की जेहनियत लिए उन जाहिलों पर अपनी...

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साइबर बुलींग प्रताड़ना का नया कल्‍चर है

♦ मोनिका लेंविस्‍की आपके सामने एक ऐसी औरत खड़ी है, जो सार्वजनिक तौर पर दस साल से ख़ामोश रही। ज़ाहिर है, वो ख़ामोशी टूट रही है, और ये हाल में ही शुरू हुआ है।...

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तुम बिल्कुल हम जैसे निकले!

➧ आकार पटेल तुम बिल्‍कुल हम जैसे निकले अब तक कहां छिपे थे भाई वो मूरखता, वो घामड़पन जिसमें हमने सदी गंवायी आखिर पहुंची द्वार तुम्‍हारे अरे बधाई, बहुत बधाई! ➧ फहमीदा रियाज़ आम...

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बलात्‍कारी सोच पर तमाचा है इंडियाज डॉटर

➧ पवन रेखा निर्भया रेप कांड पर बनी डॉक्युमेंट्री ‘इडियाज डॉटर’ को लेकर संसद से सड़क तक हंगामा मचा हुआ है। भारत सरकार ने तो बैन लगा दिया लेकिन फिर भी लोगों ने इसे...

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संसद में भी बलात्‍कारी मानसिकता मौजूद है

♦ जावेद अख्‍तर सर, सवाल यह है, गुस्‍सा इस बात पर है कि उस आदमी का इंटरव्‍यू क्‍यों लिया गया? गुस्‍सा इस बात पर है कि उस आदमी ने इतनी गलत बातें क्‍यों की?...

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हमने यह कैसा समाज रच डाला है!!!

समझ में नहीं आ रहा कि India’s Daughter में ऐसा क्‍या है कि भारत सरकार इसे देश की नजरों से दूर रखना चाहती है। बलात्‍कारी, उसका वकील और इन जैसे ही कुछ लोग लड़कियों...

Parents do it too!!!

➧ vatsala shrivastava Are “we the people of India”, wired to judge morally whenever sexuality unbuttons itself in unconventional settings? Has the era of FIDA (Facebook inbox display of affection) and the virtual paradises...

तुम हिंदी क्‍यों नहीं सीख लेते डेविड वार्नर?

ईयान वुलफोर्ड मेलबोर्न के ला ट्रोब विश्‍वविद्यालय में हिंदी भाषा और साहित्‍य के प्राध्‍यापक हैं। डेविन वार्नर और रोहित शर्मा के बीच हुए भाषाई विवाद में वे हिंदी के पक्ष में बोले। ऐसे वक्‍त...

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इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यों है?

➧ विजय कुमार सीने में जलन आंखों में तूफान सा क्यों है? इस शहर में हर शख़्स परेशान सा क्यों है? पिछले दिनों मुंबई के बांद्रा–कुर्ला कॉम्पलेक्स में एक भव्य इमारत में किसी कार्यक्रम...