Category: नज़रिया

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क्या इस्लाम मूर्तिभंजक है? #MahendraRajaJain

♦ महेंद्र राजा जैन अरब में सातवीं सदी में एक साधारण-से मकान के दरवाजे पर एक स्त्री ने परदा टांग दिया। परदे पर पशु-पक्षियों यानी जीवित प्राणियों की आकृतियां काढ़ी हुई थीं। जब उसका...

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गीता पढ़ने के बजाय फुटबॉल खेलने से स्‍वर्ग

विवेकानंद की सोच अपने समय से कहीं आगे थी। 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत के स्वामीजी परंपरागत अर्थ में संन्यासी नहीं थे। उनके विचार इतने आधुनिक थे कि एक बार जब वे मठ...

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एमजे अकबर के अधोपतन को यहां से देखें

♦ मुकेश कुमार एक अच्छा खासा पत्रकार और लेखक सिर्फ सत्ता प्रतिष्ठान का अंग बनने के प्रलोभन में किस तरह प्रतिक्रियावादी हो जाता है, इसकी मिसाल हैं एमजे अकबर। दस जनवरी के टाइम्स ऑफ...

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आग जलनी चाहिए #FergusonProtest

♦ एचएल दुसाध अमेरिका की टाइम मैगजीन में सर्वाधिक न्यूज बटोरने में दूसरे स्थान पर रहने वाला ‘फर्ग्युसन प्रोटेस्ट’ अभी भी सुर्खिया बटोर रहा है। गौरतलब है कि अमेरिका के मिसौरी प्रांत के फर्ग्युसन...

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सांड को लाल कपड़ा दिखाते ही क्‍यों हो?

पेरिस के हादसे की चारों तरफ निंदा हो रही है। यह जायज भी है। लेकिन इस निंदा अभियान में एक बड़ा तबका है जिनके मुसलिम विरोधी मानस को बड़ा संतोष हो रहा है। इसी...

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गांधी के नाम का जाम! हे राम!! #GandhiBotBeer

एक अमेरिकी बीयर कंपनी ने न सिर्फ बापू के नाम पर बाजार में बीयर उतारा है बल्कि‍ कैन पर महात्मा गांधी की तस्वीर भी छाप रखी है। बीयर बनाने वाली न्यू इंग्लैंड ब्रूइंग कंपनी...

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ध्यानचंद, राजनीति और भारत रत्न

♦ ललित कुमार सचिन तेंदुलकर को भारत रत्‍न दिये जाने के बाद यह लेख ललित ने पिछले साल अपने ब्‍लॉग दशमलव पर लिखा था। चूंकि आज भारत सरकार ने नये भारत रत्‍नों का ऐलान...

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देशद्रोहियों को भारत रत्‍न दिया गया

यदि मालवीय को भारत रत्न दिया जा सकता है तो रविंद्र नाथ टैगोर, महात्मा फुले, तिलक, गोखले, विवेकानंद, अकबर, शिवाजी, गुरु नानक, कबीर और सम्राट अशोक को भी मिलना चाहिए… रामचंद्र गुहा भारत के...

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गैर-आदिवासी नेतृत्‍व की ओर इशारा

झारखण्ड विधानसभा के जनादेश के मायने ♦ राहुल सिंह इलेक्ट्रानिक मीडिया की छवियों से विकसित होनेवाली समझदारी के लिए भले झारखंड के चुनाव परिणाम अप्रत्याशित लगे, पर जानकार लोगों के लिए इस बार यह...

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जय हो, जय हो, हिटलर की नानी की जय हो!

कमल मिश्र ♦ दिल्ली में अपने पड़ोस के सरकारी स्कूल के बच्चों को गणतंत्र दिवस के रंग में रंगा देख कर सरकारी विधालय में गणतंत्र दिवस के उपलक्ष में बंटने वाले लड्डुओं की मिठास मुझ पर भी ताजा हो गई… लेकिन राष्ट्रपति महोदय के अभिभाषण के अतिरिक्त भी प्रायः शिक्षा और समाज निर्माण के मुद्दों पर विशेषज्ञों को सुनते हुए मैं खुद को बड़ा निराश महसूस करता हूं।