Articles tagged with: abraham hindiwala
मोहल्ला मुंबई, सिनेमा »
अब्राहम हिंदीवाला ♦ आप सभी जानते हैं कि मुंबई मिरर में छपी ऐश्वर्या राय से संबंधित एक खबर से बच्चन परिवार नाराज है। वे चाहते हैं कि मुंबई मिरर माफी मांगे। उस खबर को लेकर आहत अमिताभ बच्चन और अभिषेक बच्चन ने ब्लॉग और ट्विटर पर लिखा कि कोई आपकी मां, बहन या बीवी के बारे में ऐसी बातें लिखे, तो आप क्या करेंगे? मुझे लगा कि हर वर्ग और समाज में औरतों को कमतर माना जाता है। पुरुष सदस्य अपने समाज की स्त्रियों की संरक्षा और सुरक्षा को नैतिक जिम्मेदारी मानते हैं। झूठी खबर के खिलाफ यह लड़ाई ऐश्वर्या राय अकेले भी लड़ सकती थीं। लेकिन नहीं, बच्चन बाप-बेटे ने इसे अपना कर्तव्य समझा और हमें बताया कि ऐश्वर्या राय की ब्रांड वैल्यू जो भी हो, वह हैं एक अबला औरत।
मोहल्ला मुंबई, शब्द संगत, स्मृति »
अब्राहम हिंदीवाला ♦ डा हरिवंश राय बच्चन की 102 वीं वर्षगांठ के अवसर पर इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। बच्चन संध्या का संयोजन पुष्पा भारती ने किया है। पुष्पा जी बच्चन परिवार की करीबी रही हैं। अमिताभ बच्चन के शुरुआती दौर में उन्होंने बच्च्न परिवार पर धर्मयुग में ढेर सारे लेख लिखे थे। अमिताभ बच्चन हमेशा पुष्पा भारती और धर्मवीर भारती का सादर स्मरण करते हैं। अमिताभ बच्चन अपने पिता की स्मृति में बहुत कुछ करना चाहते हैं। अपनी फिल्मी व्यस्तता के कारण सही प्लानिंग नहीं कर पा रहे हैं। प्रसून जोशी की सलाह पर वे कवि सम्मेलनों की शुरुआत करने पर विचार कर रहे हैं। इस काव्यांजलि की खास बात यह है कि बच्चन परिवार के सभी सदस्य इसमें शामिल होंगे। वे सभी बच्चन की रचनाओं का पाठ करेंगे।
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अब्राहम हिंदीवाला ♦ हिंदी फिल्मों में विद्या बालन ने परिणीता से शुरुआत की। इस फिल्म के लिए उनकी काफी तारीफ़ हुई। पहली फिल्म में मैच्योर रोल कर उन्होंने दर्शकों को चौंका दिया था। पता नहीं आप लोग विद्या बालन के बारे में क्या सोचते हैं? मुझे तो वह इस दौर की सबसे संवेदनशील अभिनेत्री लगती हैं। वह भारत के मध्य वर्ग का सही प्रतिनिधित्व करती हैं। बाकी हीरोइनें भी अच्छी हैं, लेकिन उनमें किसी का भी मध्यपर्गीय चेहरा नहीं है। प्रियंका चोपड़ा मेहनत करें तो मध्यवर्गीय लग सकती हैं। मुझे तो विद्या बालन का पारंपरिक सौंदर्य अच्छा लगता है। उसमें गरिमा, हया और स्िथरता है।
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अब्राहम हिंदीवाला ♦ हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में समरथ को नहि दोस गुसाईं का मुहावरा का सटीक बैठता है। आप कमज़ोर हों और आप ने किसी ताक़तवर पर उंगली उठा दी हो तो आप के करियर का बंटाधार होना लाज़िमी है। फिल्मों के इतिहास में ऐसे अनेक उदाहरण हैं, जब कमज़ोर को मुंह की खानी पड़ी है। ताज़ा मामला विवेक ओबेराय का है। विवेक ओबेराय ने रामगोपाल वर्मा की फिल्म कंपनी से शुरुआत की और रातोंरात इंडस्ट्री के चहेते बन गये। उन्हें धड़ाधड़ फिल्में मिलने लगीं। उनके मैनरिज्म को ध्यान में रख कर फिल्में लिखी जाने लगीं। एक समय वे ऐश्वर्या राय के साथ क्यों हो गया न? के हीरो थे। इस फिल्म ने उन्हें उत्कर्ष के साथ ही ज़मीन भी दिखायी। अर्श से फर्श पर आये।
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अब्राहम हिंदीवाला ♦ अजब प्रेम की गजब कहानी साधारण फिल्म है। इसमें हिंदी फिल्मों के आजमाये मसाले इस्तेमाल किये गये हैं। रणबीर कपूर कभी अपने पिता तो कभी दादाओं की नक़ल करते नज़र आते हैं। कहीं वे शम्मी कपूर की तरह सिर हिला रहे हैं, तो कहीं शशि कपूर की तरह बेवजह इठला रहे हैं। पिता का असर तो स्वाभाविक है। आप गोविंद नामदेव, जाकिर हुसैन को इतना घटिया काम करते हुए पहली बार पाते हैं। इस फिल्म की कामयाबी संयोग नहीं है। बहुत सोच-समझ के साथ इसे लिखा और फिल्मांकित किया गया है। कल इसकी कामयाबी का जश्न था। रण्बीर कपूर और कैटरीना कैफ के साथ राजकुमार संतोषी भी मौजूद थे। वे बधाइयां ले रहे थे और बता रहे थे कि फिल्म की जान और आत्मा आदि कौन-कौन हैं।
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अब्राहम हिंदीवाला ♦ आमिर खान के अलहदा अंदाज़ की बात कर रहा था। आमिर खान ने 3 इडिसट्स के म्यूजिक रिलीज फंक्शन के लिए नया तरीका अपनाया। उन्होंने zapak.com की टीम से बात की और सीधे इंटरनेट पर अपनी फिल्म का म्यूजिक रिलीज किया। दुनिया भर के लोगों ने नेट पर इसका सीधा प्रसारण देखा। आमिर खान स्वयं कार्यक्रम का संचालन कर रहे थे। समारोह में उनके अलावा फिल्म के मुख्य कलाकार, निर्माता, निर्देशक और गायक मौजूद थे। कह सकते हैं कि ये तो वैसे भी मौजूद रहते, लेकिन सादे समारोह में शिरकत करना आम बात नहीं होती। उन सभी ने फिल्म के गाने सुनाये।
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अब्राहम हिंदीवाला ♦ हम सभी जानते हैं उन्हें। हिंदी फिल्मों में कपूर खानदान की विरासत को संभाल रही करीना कपूर उसे नई ऊंचाइयों पर ले जाने का दम नहीं रखतीं। उनमें दंभ है। उन्हें लगता है कि 75 साल में अर्जित कपूर खानदान की प्रतिष्ठा का उन्हें फायदा तो मिलेगा ही। मिला भी। फिल्मों में आयीं तो अच्छी शुरुआत नहीं होने पर भी उन्हें मौके मिलते रहे। एक ज़माने में उन्हें फ्लॉप फिल्मों की श्रेष्ठ हीरोइन कहा जाता था। अगर उनकी फिल्मों पर गौर करें तो ज़्यादातर बिजनेस और क्वालिटी के हिसाब से कमज़ोर रही हैं। उन्होंने चमेली और ओमकारा जैसी कुछ अच्छी फिल्में की हैं। इन फिल्मों का श्रेय किसे मिलना चाहिए? आप जानते हैं।
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अब्राहम हिंदीवाला ♦ बाल्कि की नयी फिल्म है पा। इसमें अमिताभ बच्चन पोजेरिया रोग से ग्रस्त बच्चे की भूमिका निभा रहे हैं। इस भूमिका के लिए उन्हें खास मेकअप करना पड़ता था। सिर्फ मेकअप करने में कम से कम चार घंटे लगते थे और उसे उतारने में दो घंटे लगते थे। दो दिनों की शूटिंग के बाद अमिताभ बच्चन को एक दिन का आराम दिया जाता था ताकि उनकी त्वचा को आराम मिल सके। अमिताभ बच्चन ने निश्िचत ही इस मुश्किल किरदार को निभाने की चुनौती स्वीकार कर अपना विस्तार किया है। इस फिल्म में वे अभिषेक बच्चन के बेटे बने हैं। उनका नाम है औरो। अमिताभ बच्चन उम्र के ऐसे पड़ाव पर हैं, जहां किसी भी प्रकार के प्रयोग के लिए तत्पर हैं।
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अब्राहम हिंदीवाला ♦ लंदन ड्रीम्स में सलमान खान और अजय देवगन हैं। इन दोनों को आपने हम दिल दे चुके सनम में देखा होगा। उस फिल्म के हिट होने के बावजूद दोनों को साथ लेकर किसी ने फिल्म बनाने कि बात नहीं सोची। कहते हैं सलमान और अजय के बीच दोस्ती हो ही नहीं पायी। अजय अलग किस्म के सनकी आदमी हैं और सलमान के बारे में तो सभी जानते हैं। ऐसा लगता है कि सलमान किसी कि परवाह नहीं करते हैं, लेकिन करीबी बताते हैं कि सलमान को सभी की परवाह रहती है। सबसे ज़्यादा अपनी परवाह रहती है, इसलिए वे कभी दोस्ती गांठते हैं तो कभी सरेआम गाली देते हैं। आजकल उनकी शाहरुख़ खान से ठनी हुई है। शाहरुख़ ने उनकी पूर्व प्रमिका के बारे में कुछ असहनीय बोल दिया था।


