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बुरे दिनों में चुटकुला भी एक हथियार है

➧ अरुण माहेश्‍वरी हिटलर के जमाने के व्हिस्‍पर जोक्स नाजी सैनिक और जासूस जानते थे, लेकिन इन्हें रोकते नहीं थे, क्योंकि यह उनके वश में नहीं था। आदमी बुरी से बुरी स्थिति में भी...

अघोषित आपातकाल की आहट 1

अघोषित आपातकाल की आहट

आनंद प्रधान ♦ सरकार आज माओवादियों से सहानुभूति रखनेवाले बुद्धिजीवियों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं को निशाना बना रही है और उन्हें चुप करने में सफल रहने के बाद कल वो विकास में रोड़ा अटकाने या राष्ट्रीय एकता और अखंडता को चोट पहुंचाने या फिर ऐसे ही किसी और बहाने पत्रकारों और बुद्धिजीवियों का मुंह बंद करने की कोशिश करने से नहीं चूकेगी। याद रखिए, हिटलर और नाजियों ने भी पहले यहूदियों, फिर कम्युनिस्टों, उसके बाद ट्रेड यूनियन कार्यकर्ताओं, फिर मानवाधिकारवादी कार्यकर्ताओं को निशाना बनाया और बाक़ी उनसे मुंह मोड़े रहे क्योंकि वो इनमें से कोई नहीं थे। लेकिन जब वो आम लोगों को मारने लगे, तो उनके लिए बोलने वाला कोई नहीं बचा था।