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हमने यह कैसा समाज रच डाला है!!!

समझ में नहीं आ रहा कि India’s Daughter में ऐसा क्‍या है कि भारत सरकार इसे देश की नजरों से दूर रखना चाहती है। बलात्‍कारी, उसका वकील और इन जैसे ही कुछ लोग लड़कियों...

सुना है कि बिहार में प्रेस की आजादी बंधक है, क्‍या ये सच है? 3

सुना है कि बिहार में प्रेस की आजादी बंधक है, क्‍या ये सच है?

जस्टिस काटजू ♦ बिहार के बारे में कुछ कहना चाहूंगा। मैंने सुना है कि लालू राज की तुलना में इस सरकार ने कानून व्यवस्था को सुधारा है। पर दूसरी बात मैंने ये भी सुनी है कि लालू के राज में फ्रीडम ऑफ प्रेस होती थी, लेकिन अब यहां फ्रीडम ऑफ प्रेस नहीं है।

सबा अरब बेचारे और एक अन्‍ना हजारे! (कट-पेस्‍ट : BBC) 3

सबा अरब बेचारे और एक अन्‍ना हजारे! (कट-पेस्‍ट : BBC)

विनोद वर्मा ♦ अन्ना हजारे ने एक लहर जरूर पैदा की है। लेकिन अभी लोग उन लहरों पर अपनी नावें निकालने को तैयार नहीं हैं। भारत का उच्च वर्ग तो वैसे भी घर से नहीं निकलता। ज्यादातर वह वोट भी नहीं देता। ग़रीब तबका इतना ग़रीब है कि वह अपनी रोजी-रोटी का जुगाड़ एक दिन के लिए भी नहीं छोड़ सकता। बचा मध्य वर्ग। भारत का सबसे बड़ा वर्ग। और वह धीरे-धीरे इतना तटस्थ हो गया है कि डर लगने लगा है।

सहारा से गये, लेकिन फायदे में रहे संजीव श्रीवास्‍तव 3

सहारा से गये, लेकिन फायदे में रहे संजीव श्रीवास्‍तव

डेस्‍क ♦ सहारा मीडिया से संजीव श्रीवास्तव की विदाई से मीडिया हलके में काफी हलचल है। लेकिन यह उसी दिन तय हो गया था, जब संजीव और उपेंद्र राय दोनों ने सहारा मीडिया में एक साथ कमान संभाली। किसी भी संस्थान के लिए दो पॉवर सेंटर सही नहीं होते। सहारा में यही हुआ। विदाई की वजह से संजीव श्रीवास्तव की छवि को झटका लगा है, लेकिन आर्थिक तौर पर वो फायदे में रहे हैं। सहारा सूत्रों के मुताबिक संजीव को साइनिंग अमाउंट के तौर पर पचास लाख रुपये मिले थे और हर महीने बारह लाख रुपये की पगार। इस लिहाज से देखा जाए तो सहारा में चार महीने काम करने के एवज में संजीव को मोटी रकम मिल गयी है।

उसे मिटाओगे! एक भागी हुई लड़की को मिटाओगे!! 8

उसे मिटाओगे! एक भागी हुई लड़की को मिटाओगे!!

सुशील झा ♦ निरुपमा ने और उसके अजन्मे बच्चे ने विजातीय प्रेम की बड़ी कीमत चुकाई है। निरुपमा ने तो जीवन के 23 साल देखे। प्रेम भी किया लेकिन उस बच्चे का क्या कसूर था जो उसके गर्भ में था। अगर निरुपमा के गर्भ में बेटी थी तो अच्छा हुआ वो दुनिया में आने से पहले ही चली गयी क्योंकि ऐसे समाज में लड़की होकर पैदा होना ही शायद सबसे बड़ा गुनाह है। मुझे घिन आती है ऐसे समाज में जिसमें हम खुद को जन्म देने वाली नारी को भी मार डालने से नहीं चूकते हैं वो भी एक ऐसी पहचान (जातिगत) जिसका कोई अर्थ नहीं। निरुपमा के हत्यारों को सज़ा मिलनी ही चाहिए चाहे ये हत्यारे उसके मां बाप ही क्यों न हो।

सऊदी कवयित्री की नज़्मों से कोहराम 3

सऊदी कवयित्री की नज़्मों से कोहराम

बीबीसी हिंदी ♦ अपने लेखन से चरमपंथियों पर निशाना साधने वाली एक सऊदी कवयित्री हिसा हिलाल अबू धाबी में चल रही एक प्रतियोगिता में सबसे मज़बूत दावेदार बनकर उभरी हैं। सिर से पैर तक काले बुर्के में ढकी इस महिला ने अरबी भाषा में लिखी अपनी नज़्मों में कट्टरपंथी मुसलमानों को आड़े हाथों लिया है। प्रतियोगिता के अंतिम दौर में दर्शकों और निर्णायकों दोनों ने हिसा हिलाल की नज़्मों की तारीफ़ की। उनकी कविता का शीर्षक था – फ़तवे से मचा कोहराम। हिसा हिलाल की नज़्मों की वजह से इस्लामी चरमपंथी संगठनों की वेबसाइटों पर उन्हें जान से मारने की धमकी दी जा चुकी है।

कोइराला का निधन नेपाल के लिए ‘अप्रत्यक्ष वरदान’ 6

कोइराला का निधन नेपाल के लिए ‘अप्रत्यक्ष वरदान’

आनंद स्‍वरूप वर्मा ♦ कोइराला के निधन से जो शून्य पैदा हुआ है, उससे निश्चित तौर पर नेपाल में कुछ समस्याएं पैदा हो सकती हैं लेकिन मैं मानता हूं कि इसे नेपाल के लिए एक ब्लेसिंग इन डिस्गाइज (अप्रत्यक्ष वरदान) कहा जा सकता है। अभी जो एक गतिरोध, एक ठहराव की स्थिति पैदा हो गयी थी, कई दिनों से नेपाली सेना के वक्तव्य देखने को मिल रहे हैं, जिनमें सेना के साथ जनमुक्ति सेना के एकीकरण को लेकर बेचैनी झलकती है। अब मुझे लगता है कि ध्रुवीकरण की प्रक्रिया तेज होगी। यह गतिरोध टूटेगा और लड़ाई किसी न किसी सिरे पर पहुंचेगी। या तो सेनाओं का एकीकरण सुचारू रूप से होगा या पीएलए और सेना के बीच मुठभेड़ होगी।

‘द हर्ट लॉकर’ जिंदाबाद, छह ऑस्‍कर झटके 0

‘द हर्ट लॉकर’ जिंदाबाद, छह ऑस्‍कर झटके

कैथरीन बिग्लो ने ऑस्कर में सर्वश्रेष्ठ निर्देशक का पुरस्कार जीतकर इतिहास रच दिया है। उन्हें फ़िल्म द हर्ट लॉकर के लिए ये पुरस्कार दिया गया है। 82वें ऑस्कर समारोह में द हर्ट लॉकर ने कुल छह पुरस्कार जीते जबकि ऑस्कर की बड़ी दावेदार माने जाने वाली अवतार की झोली में तीन ऑस्कर गए। ऑस्कर पुरस्कारों के इतिहास में अभी तक सिर्फ़ चार महिलाओं को सर्वश्रेष्ठ निर्देशक श्रेणी में नामांकन मिला था लेकिन पहली बार ऑस्कर जीतने का गौरव मिला है कैथरीन बिग्लो को। हॉलीवुड के कोडक थिएटर में हुए समारोह में सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का पुरस्कार जेफ़ ब्रिजिज़ के नाम रहा है. उन्होंने ये अवॉर्ड फ़िल्म क्रेज़ी हार्ट के लिए जीता. वहीं सेंड्रा बुलोक सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री बनीं ( फ़िल्म द ब्लाइंड साइड)।

आख़िर कब मिलेगा गैस पीड़ितों को इंसाफ़? 0

आख़िर कब मिलेगा गैस पीड़ितों को इंसाफ़?

राजकुमार केसवानी ♦ मेरा दुर्भाग्य है कि 28 साल पहले मेरे मन में यह आशंका पैदा हुई थी और कोशिश की थी कि अपने शहर और लोगों की मौत को रोक सकूं। वर्ष 1981 के दिसंबर महीने में कार्बाइड प्लांट में कार्यरत मोहम्मद अशरफ़ की फ़ास्जीन गैस की वजह से मौत हो गई। मैं चौंक गया। वहां पहले भी दुर्घटनाएं हुई थीं और वहां के मज़दूर और आसपास के लोग प्रभावित हुए थे। मैंने एक पत्रकार के नाते इसे पूरी तरह जान लेना ज़रूरी समझा कि आख़िर ऐसा क्या होता है इस प्लांट में। नौ महीने की जी-तोड़ कोशिशों के नतीजे में साफ़ साफ़ दिखाई दे गया कि यह कारखाना एक बिना ब्रेक की गाड़ी की तरह चल रहा है। सुरक्षा के सारे नियमों की धज्जियां उड़ाता हुआ।

गे ग्‍लोबलाइजेशन का जश्‍न 4

गे ग्‍लोबलाइजेशन का जश्‍न

‘गर्व से कहो हम गे हैं’ का नारा 1960 के दशक के अंत में अमरीका के स्टोनवाल पब से शुरू हुए दंगों से जन्मा और दो दशक के भीतर पूंजीवादी पश्चिमी समाज में एक मानवाधिकार आंदोलन के रूप में फैल गया। 1990 आते आते यूरोप और अमरीका में लगभग पूरी राजनीतिक स्वीकार्यता मिली लेकिन सामाजिक स्वीकार्यता आज भी बेहद मुश्किल है। दिल्ली हाइकोर्ट ने सहमति से होने वाले समलैंगिक यौनाचार को क़ानूनन अपराध की श्रेणी से हटा दिया, तब जिस तरह का जश्न मना – उससे यही लगा कि भारत में यही एक बड़ा मुद्दा था जो हल हो गया है। अब भारत दुनिया के अग्रणी देशों की पांत में खड़ा हो गया है।