Home » Archive

Articles tagged with: bhadas

नज़रिया, मीडिया मंडी »

[15 Jul 2009 | 6 Comments | ]
ये हिंदी पत्रकारिता का शोककाल है!!!

हर बात का समाधान कानून नहीं हो सकता है। मीडिया यदि ग़लत रिपोर्ट पेश करता है, तो तय कौन करेगा की रिपोर्ट ग़लत है। कोई जज या कानूनविद। आप ख़बरों को वस्तुनिष्‍ठ तो बनाने का प्रयास कर सकते हैं लेकिन पत्रकारिता सिर्फ और सिर्फ ख़बरों का ही नाम है क्या? वर्षों से जनमत तैयार करने का काम भी यह करते आ रहा है। फिर यह वस्तुनिष्‍ठ कैसे हो सकता है।

नज़रिया, मीडिया मंडी »

[14 Jul 2009 | 9 Comments | ]
ख़बर में मिलावट के ख़‍िलाफ़ क्‍यों न बने क़ानून?

अगर तेल या दूध में मिलावट के खिलाफ़ वह दुकानदार या कंपनी के खिलाफ़ मुक़दमा कर सकता है और उनकी बैंड बजा सकता है, तो अख़बार या टीवी की ख़बरों से वह ठगा जाता है, तो कहां जाए? ख़बरों में मिलावट पाने पर उसके लिए क्‍या गुंजाइश है? क्‍यों नहीं यहां भी उपभोक्‍ता क़ानून होना चाहिए?

नज़रिया, मीडिया मंडी, मोहल्ला दिल्ली, व्याख्यान, समाचार, स्‍मृति »

[12 Jul 2009 | 2 Comments | ]
तय कीजिए पार्टनर कि आपकी पॉलिटिक्‍स क्‍या है?

कपिल सिब्बल ने अपने भाषण में ये कह दिया कि हमें कोई फर्क नहीं पड़ता है आप क्या लिखते हैं। उनका इशारा मीडिया की विश्वसनीयता की तरफ था। एक नेता का पत्रकारों की गोष्ठी में ये कह कर चले जाना इस बात का संकेत था कि नेता आज की तारीख में मीडिया की कितनी परवाह करते हैं।

मीडिया मंडी, मोहल्ला दिल्ली »

[12 Jul 2009 | 4 Comments | ]
कपिल सिब्‍बल की बेज़ा बात, क़ुर्बान अली का करारा जवाब

शनिवार की शाम, पत्रकार स्व उदयन शर्मा की याद में हुए कार्यक्रम में कपिल सिब्बल की ओर से दिये गये बयान के बाद से पत्रकारों के बीच जबरदस्त बौखलाहट और मलाल है। क़ुर्बान अली के शब्दों में – आज हमारी हालत ये हो गयी है कपिल सिब्बल आता है और हमारे मुंह पर तमाचा मारते हुए ये कह कर निकल जाता है कि आप कुछ भी छापते रहिए हमें कोई फर्क नहीं पड़ता, हम शर्मिंदा होने के सिवाय कुछ नहीं कर सकते।