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बीएचयू के कुलपति घनघोर जातिवादी हैं, ये देखिए! 8

बीएचयू के कुलपति घनघोर जातिवादी हैं, ये देखिए!

संवाददाता ♦ प्रो डीके सिंह जो कुलपति के सजातीय हैं, वे इस समय विश्‍वविद्यालय के केंद्रीय ग्रंथालय के कर्ता-धर्ता हैं। मूलत: फ्रेंच के अध्यापक हैं, पर जुगाड़ की बदौलत प्रो इंचार्ज बन गये हैं। इन्‍होंने आते ही तमाम भर्तियां कीं, जिसका कच्चा-चिट्ठा नीचे दी गयी लिस्ट में है। लाइब्रेरी असिस्‍टेंट पद के लिए विश्‍वविद्यालय में अटेंडेंट के पद पर काम करने वालों ने भी आवेदन किया था। लेकिन एक (रमेश चंद्र) को छोड़कर सभी असफल रहे जबकि सभी के पास दस-दस वर्ष का अनुभव था। पर जातीय सोच रखने वाले कुलपति डीपी सिंह, रेक्टर बीडी सिंह और प्रो डीके सिंह ने नंगा नाच किया और अपने स्वजातियों का ही किया। लिस्ट उठाकर देखिए। सामान्य श्रेणी में 16 में 11 ठाकुर यानी राजपूत जाति के हैं।

बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय में ये हो क्‍या रहा है? 7

बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय में ये हो क्‍या रहा है?

संवाददाता ♦ बीएचयू में उषा त्रिपाठी की नियुक्ति में अनुसूचित जाति /अनुसूचित जनजाति का कोई नामिनी नहीं बैठा है, जो गलत है। दूसरी तरफ मुक्ति पांडे को पांच अतिरिक्त इनक्रीमेंट दिया गया है, जबकि इनके पास कोई खास योग्यता नहीं है। सिवा इसके कि इनके पति बनारस हिंदू विश्‍वविद्यालय में उप कुलसचिव हैं।

कलाओं पर ये कैसा पहरा…? 17

कलाओं पर ये कैसा पहरा…?

उत्तमा दीक्षित ♦ स्टूडेंट लाइफ में जब मैं न्यूड फिगर बनाती थी, तब अपने ही घर में मुझे लगता था कि सभी अच्छा फील नहीं कर रहे। हर सीखने वाले स्टूडेंट के साथ ऐसा ही होता होगा। न्यूड स्टडी करने के लिए किताबों का ही सहारा लेना पड़ता है चाहें वो मार्केट से ली जाएं या लाइब्रेरी से। स्टूडेंट को यह किताबें छिपाकर रखनी पड़ती हैं। डर ऐसा होता है कि कोई क्राइम कर रहा हो। मॉडल न्यूड हो या कपड़ों में, आर्टिस्ट के लिए महज एक आब्जेक्ट है। उसी तरह जैसे सामने कोई चीज़ रखी हो और उसका उसे चित्रांकन करना हो। जयशंकर प्रसाद की कामायनी पर पेंटिंग करने के दौरान जब मैंने श्रद्धा और मनु को कैनवास पर उतारा तो मुझे लगा कि कपड़ों के बिना दोनों पात्रों को ज़्यादा बेहतर अभिव्यक्त किया जा सकता है। ग्वालियर में इस सीरीज़ की पेंटिंग्स की एक्जीबिशन पर मैंने खूब हंगामा झेला। स्त्री होकर भी एक स्त्री को मैंने इस रूप में क्यों बनाया, यह सवाल मुझसे पूछा गया। मैं परेशान और दुखी थी।

उत्तमा की कामायनी : मनु और श्रद्धा के कुछ चित्र-प्रसंग 69

उत्तमा की कामायनी : मनु और श्रद्धा के कुछ चित्र-प्रसंग

उत्तमा दीक्षित ♦ प्रलय के दौरान मनु और श्रद्धा का प्रेम मुझे प्रेरक लगा। कल्पना की उस समय की। मैं जैसे खो सी गयी। मैंने तत्काल पेपर पर स्केच बनाना शुरू किया और देखते ही देखते मनु का चित्र उतर आया। बेशक, अन्य कल्पनाओं की तरह यह कल्पना भी मुश्किल नहीं थी। पहले चित्र का स्केच मनमुताबिक आना शुरू हुआ तो उत्साह बढ़ा। हालांकि विषय की संवेदना और भाव-भंगिमा को चित्र में उतारने में बाद में खासी मेहनत करनी पड़ी। प्रलय के कारण भावशून्य हुए मनु के रूप में मुझे मन दिखाना था और श्रद्धा के रूप में दिल। रहस्य, स्वप्न, आशाएं, कर्म, काम, वासना, आनंद, लज्जा, ईर्ष्या और चिंता के भावों का चित्रण करना सचमुच चुनौतीपूर्ण है।