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Articles tagged with: gorakhpur

संघर्ष, समाचार »

[3 Jun 2011 | No Comment | ]

नागरिक मोर्चा ♦ मजदूरों ने मालिकों पर दबाव बनाकर यह तय कराया कि जांच समिति में प्रबंधन की तरफ से कोई नहीं होगा। इसमें ऑफिस स्टाफ के दो सदस्य तथा एक मजदूरों द्वारा चुना गया प्रतिनिधि होगा। दूसरी ओर, संयुक्त मजदूर अधिकार संघर्ष मोर्चा की आज हुई बैठक में फैसला लिया गया है कि यदि घायलों को मुआवजा देने, मजदूरों पर दायर फर्जी मुकदमे वापस लेने, गोलीकांड की न्यायिक जाँच कराने तथा मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कराने की उनकी मांगों को प्रशासन गम्भीरतापूर्वक नहीं लेता है तो मजदूर सत्याग्रह का तीसरा चरण शुरू किया जाएगा।

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[2 Jun 2011 | One Comment | ]

नागरिक मोर्चा ♦ सोमवार को, मजदूरों ने धागा मिल पर कब्‍जा कर लिया और उसकी सभी शॉप्‍स कब्‍जे में ले ली। तभी से वे पुलिस और पीएसी से मिल रही धमकियों के बावजूद कारखाने पर कब्‍जा किए हुए हैं। इस बीच, बड़ी संख्‍या में मजदूर कारखाने के बाहर निगरानी कर रहे हैं और अंदर मौजूद मजदूरों तक खाना पहुंचा रहे हैं। संयुक्‍त मजदूर अधिकार संघर्ष मोर्चा ने कहा है कि जब तक सभी निष्‍कासित मजदूरों को काम पर वापस नहीं लिया जाएगा और बिना शर्त कारखानों को चालू करने की घोषणा नहीं की जाएगी, तबतक मजदूर कारखाने से बाहर नहीं आएंगे।

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[30 May 2011 | No Comment | ]

नागरिक मोर्चा ♦ गोरखपुर में मज़दूरों के दमन और उत्तर प्रदेश सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के विरोध में कोलकाता में सैकड़ों मज़दूरों ने प्रदर्शन किया तथा राज्यपाल के माध्यम से मुख्यमंत्री मायावती को ज्ञापन भेजा। श्रमिक संग्राम समिति के बैनर तले कोलकाता इलेक्ट्रिक सप्लाई कारपोरेशन, हिन्दुस्तान इंजीनियरिंगएंड इंडस्ट्रीज लि., भारत बैटरी, कोलकाता जूट मिल, सूरा जूट मिल, अमेरिकन रेफ्रिजरेटर्स कं. सहित विभिन्न कारखानों के 500 से अधिक मज़दूरों ने कल कोलकाताके प्रशासकीय केंद्र एस्प्लेनेड में विरोध प्रदर्शन किया। दिल्ली, पंजाब तथा महाराष्ट्र में भी कुछ संगठन इस मुद्दे को लेकर प्रदर्शन की तैयारी कर रहे हैं।

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[26 May 2011 | One Comment | ]

नागरिक मोर्चा ♦ दो महिला कार्यकर्ताओं श्वेता तथा सुशीला देवी को जमानत मिलने के बाद कल देर रात जेल से रिहा कर दिया गया था। रिहा होने के बाद आज जारी एक बयान में श्वेता ने पुलिस पर गिरफ्तार मजदूर नेताओं के साथ दुर्व्‍यवहार करने और लगातार डराने-धमाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पुलिस के कुछ अधिकारी मालिकों की ओर से मजदूरों को ”देख लेने” और उनके नेताओं को ”ठिकाने लगाने” की धमकियां दे रहे हैं।

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[11 May 2011 | 2 Comments | ]

गोरखपुर की डाक ♦ सरकारी दमन तथा मालिक-प्रशासन-सांप्रदायिक ताकतों के गंठजोड़ द्वारा जारी अंधेरगर्दी के विरुद्ध भारी जन आक्रोश और व्यापक जनदबाव के कारण यह छोटी-सी जीत मिली है लेकिन गोरखपुर के मजदूरों के सामने अभी बहुत कठिन लड़ाई है और देशभर के इंसाफपसंद नागरिकों तथा किसी भी मोर्चे पर काम करने वाले कार्यकर्ताओं को उनका साथ देना होगा। दमन-उत्पीड़न के तात्कालिक मसले पर मजदूरों को थोड़ी राहत मिली है लेकिन जिन बुनियादी मांगों को लेकर गोरखपुर में मजदूरों ने आवाज उठायी थी, वे आज भी यथावत हैं।

नज़रिया, संघर्ष »

[11 May 2011 | 5 Comments | ]

कमला पांडेय ♦ मायावती जी, मैं आपको धमकी या चेतावनी नहीं दे रही हूं। सत्ता की प्रचंड शक्ति के आगे मुझे जैसे किसी नागरिक की भला क्या बिसात? मैं आपसे अनुरोध कर रही हूं कि आप अपने स्तर से मामले की जांच कराकर न्याय कीजिए और सत्ता मद में चूर अपने निरंकुश अफसरों की नकेल कसिए। मैं इस न्याय संघर्ष में भागीदारी के अपने संकल्प की आपको सूचना दे रही हूं और विनम्रतापूर्वक बस यह याद दिलाना चाहती हूं कि लाठियों-बंदूकों से सच्चाई और इंसाफ की आवाज कुछ देर को चुप करायी जा सकती है, लेकिन हमेशा के लिए कुचली नहीं जा सकती।

समाचार »

[10 May 2011 | 2 Comments | ]

गोरखपुर की डाक ♦ कुछ दिन पहले से ही मीडिया में एक दुष्‍प्रचार अभियान शुरू किया गया था, जिसमें कहा गया था कि अपने बुनियादी अधिकारों के लिए संघर्षरत मजदूरों को बाहर से आये ”माओवादी’ भड़का रहे हैं। याद रहे कि दो साल पहले जब बरगदवा की 7 फैक्ट्रियों के मजदूरों ने अपनी मांगों को लेकर एक संगठित आंदोलन शुरू किया था, उस समय भी इस प्रकार की अफवाहें फैलाने की कोशिश की गयी थी। गोरखपुर के भाजपा सांसद योगी आदित्‍यनाथ फैक्‍ट्री मालिकों का खुले तौर पर समर्थन कर रहे हैं। वे शुरू से ही मजदूरों के आंदोलन का विरोध करते हुए मजदूर नेताओं को ”हिंसा भड़काने पर तुले माओवादी” कहते रहे हैं और पूरे मजदूर आंदोलन को यह कहकर बदनाम करते रहे हैं कि यह आंदोलन ”चर्च के पैसे से चल रहा” है।

ख़बर भी नज़र भी, रिपोर्ताज »

[16 Mar 2011 | 11 Comments | ]

अविनाश ♦ गौतम बुद्ध के शहर-नगर की यात्रा से पहले का यह चुटकुलानुमा क्षेपक अपवित्र जरूर है, लेकिन इस जीवन का क्‍या किया जाए जिसमें एक ही वक्‍त में ऐसी तमाम चीजें घटित होती हैं। जैसे यह भी घटित हुआ कि सोमवार की रात हम मोहल्‍ला अस्‍सी में काम करने वाले एक युवा अभिनेता अरिहंत जैन के घर गये, डॉक्‍टर साहब के साथ। वहां उनकी मां मिलीं, जो ब्राह्मी लिपि पढना-लिखना जानती हैं। सिखाती भी हैं। अरिहंत ने अभिज्ञान शाकुंतलम के कुछ संवाद सुनाये। एक मंगलाचरण सुनाया, जगजीत सिंह की एक गजल भी सुनायी। वहीं हमने एक नन्‍हीं कटोरी में रसमलाई खायी। बेहद स्‍वादिष्‍ट। सुजाता ने बुद्ध के लिए ऐसी ही स्‍वादिष्‍ट खीर बनायी होगी कभी।

मोहल्ला मुंबई, सिनेमा »

[28 Oct 2009 | 4 Comments | ]

अब्राहम हिंदीवाला ♦ दिल्‍ली में ओसियान फेस्‍टिवल चल रहा है। फिल्‍म पढ़ने से ज़्यादा मज़ा देखने में देती है। मौका निकालें और कुछ फिल्‍में देख आएं। वैसे अपने यहां के फेस्टिवल आम दर्शकों को डराते हैं। उनका हाल लगभग शास्‍त्रीय संगीत की तरह होता जा रहा है। अगर आप बुद्धि, अर्थ बौर कर्म से संपन्‍न हो तो फेस्टिवल में आओ। मैंने कभी किसी मज़दूर को फेस्टिवल में नहीं देखा। क्‍यों भाई, कभी उन्‍हें भी तो निमंत्रित करें। और यह जो अंग्रेज़ी का कारोबार है। उसकी वजह से मिनिमम योग्‍यता के बाद ही आप फेस्टिवल की गतिविधियों को समझ सकते हैं। वरना मुंह बाये सुनते रहिए और औंघाते रहिए।

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[21 Oct 2009 | 3 Comments | ]

पहली बार करीब पांच महीने पहले तीन कारखानों के मजूदरों ने संयुक्त मजदूर अधिकार संघर्ष मोर्चा बनाकर न्यूनतम मजदूरी देने और काम के घंटे कम करने की लड़ाई लड़ी और आंशिक कामयाबी पायी। इससे बरसों से नारकीय हालात में खट रहे हजारों अन्य मजदूरों को भी हौसला मिला। इसीलिए यह मजदूर आंदोलन इन दो कारखानों के ही नहीं बल्कि पूर्वी उत्तर प्रदेश के तमाम उद्योगपतियों को बुरी तरह खटक रहा है और वे हर कीमत पर इसे कुचलकर मजदूरों को ”सबक सिखा देना” चाहते हैं। कारखाना मालिक पवन बथवाल दबंग कांग्रेसी नेता है और भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ का उसे खुला समर्थन प्राप्त है। प्रशासन और श्रम विभाग के अफसर बिके हुए हैं।