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दिल्‍ली में 1 अक्‍टूबर से शुरू होगा सिंगापुर फिल्‍म फेस्टिवल 0

दिल्‍ली में 1 अक्‍टूबर से शुरू होगा सिंगापुर फिल्‍म फेस्टिवल

डेस्‍क ♦ तीन दिनों का सिंगापुर फिल्‍म फेस्टिवल एक अक्‍टूबर से इंडिया हैबिटैट सेंटर (नयी दिल्‍ली) में शुरू हो रहा है। फेस्टिवल में सिंगापुर की चार बेहतरीन फिल्‍में दिखायी जाएंगी, जिन फिल्‍मों ने अपनी पहचान अंतरराष्‍ट्रीय स्‍तर पर बनायी है। शुरुआत एक तारीख को 2007 में बनी रॉयस्‍टॉन टैन की फिल्‍म 881 से होगी। 881 दो दोस्‍तों की कहानी है, जिनकी असीम सांगीतिक महत्‍वाकांक्षाएं हैं। हैबिटैट के स्‍टेन ऑडिटोरियम में शाम सात बजे से इस फिल्‍म की स्‍क्रीनिंग होगी। साथ ही फिल्‍म के निर्देशक रॉयस्‍टॉन टैन से हिंदी सिनेमा के नये चितेरे अनुराग कश्‍यप का एक संवाद भी होगा, जिसमें ऑडिएंस भी हिस्‍सा ले पाएगी। पर इस फेस्टिवल की इंट्री पास के साथ होगी, जो आपको सिंगापुर हाई कमीशन के ऑफिस से कलेक्‍ट करना होगा। आप चाहें तो सहूलियत के लिए सुचित्रा सिंह को suchitra_singh@sgmfa.gov.sg पर इस बाबत मेल कर सकते हैं।

‘कवि के साथ’ में सबसे पहले कुंवर, अरुण और अनुज 0

‘कवि के साथ’ में सबसे पहले कुंवर, अरुण और अनुज

डेस्‍क ♦ ‘कवि के साथ’ के पहले आयोजन में हिंदी के वरिष्ठ कवि कुंवर नारायण, युवा कवि अरुण देव और अनुज लुगुन का काव्य-पाठ होगा। कुंवर नारायण जी वर्ष 2005 के ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हो चुके हैं और 2009 में इनको भारत सरकार ने पद्म भूषण से भी नवाजा था। 2008 में इनका नवीनतम संग्रह ‘वाजश्रवा के बहाने’ नाम से छप कर आया है।

कल यादों का इडियट बॉक्‍स खुला था, कुछ गीत भी थे… 12

कल यादों का इडियट बॉक्‍स खुला था, कुछ गीत भी थे…

अविनाश ♦ बात बस इतनी सी है कि नीलेश मिश्रा और शिल्‍पा राव की टीम कल दिल्‍ली में थी, मोहल्‍ला लाइव था और लोग ही लोग थे। छोटे शहर का बंदा था, छोटे शहर की कहानी थी। प्‍यार, घर से भाग कर शादी और रिश्‍तों की कसक के किस्‍से नीलेश सुना रहे थे और शिल्‍पा राव और अभिषेक उस पूरी कहानी को सुर और लय दे रहे थे… यादों के इडियट बॉक्‍स में क्या क्या चलता है देखो तो… बैंड कॉल्‍ड नाइन के जोशीले और युवा संगीत और संगतकारों ने 15 जून 2011 की शाम को जादुई बना दिया।

मोहल्‍ला लाइव के दो साल, 15 को कंसर्ट, जुलाई से पत्रिका 45

मोहल्‍ला लाइव के दो साल, 15 को कंसर्ट, जुलाई से पत्रिका

डेस्‍क ♦ मोहल्‍ला लाइव डॉट कॉम के दो साल पूरे हो गये। इन दो सालों के सफर को हम इसी 15 जून को सेलिब्रेट कर रहे हैं। इंडिया हैबिटैट सेंटर के सहयोग से मशहूर म्‍यूजिक बैंड NINE का कंसर्ट हमने रखा है। नीलेश मिश्र की किस्‍सागोई के साथ बॉलीवुड के नामी संगीतकार इसमें परफॉर्म करेंगे। साथ ही जुलाई से मोहल्‍ला लाइव जुलाई से प्रकाशित भी होगी। लाइव रिपोर्टिंग और लाइफ स्‍टाइल पत्रिका का फोकस एरिया होगा।

“देसवा” सिर्फ फिल्‍म नहीं, एक मुहिम है, उसका साथ दें! 40

“देसवा” सिर्फ फिल्‍म नहीं, एक मुहिम है, उसका साथ दें!

विनीत कुमार ♦ देसवा भोजपुरी की पहली फिल्म है, जो अपने को एलीट समाज के बीच विमर्श करने के लिए स्पेस तैयार करती है। माइनस वल्गरिटी भोजपुरी सिनेमा का दूसरा नाम देसवा है। हालांकि फिल्म को साफ-सुथरी और सामाजिक तौर पर सचेत करनेवाली बनाने की कोशिश में वो हिंदी सिनेमा लगने लग जाती है। भोजपुरी कल्ट, उसकी अपनी तासीर कमने लग जाती है। तो भी भोजपुरी का मतलब सिर्फ ढिंचिक नाच, तिरंगा, चोली और स्त्रियों पर मर्दवाद की फब्तियां नहीं है।

लेखक बेहतर राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता हो सकते हैं, पर वे सुस्‍त हैं 25

लेखक बेहतर राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता हो सकते हैं, पर वे सुस्‍त हैं

डेस्‍क ♦ साहित्य और मीडिया दो ऐसे पड़ोसी देश की तरह हैं जो हमेशा एक दूसरे से लड़ते रहते हैं। इनकी दुश्मनी पुरानी है। फिर भी साहित्य को मीडिया की जरूरत है। मीडिया को साहित्य की जरूरत है। मशहूर कथाकार और हंस के संपादक राजेंद्र यादव ने ये बातें मंगलवार को दिल्‍ली के इंडिया हैबिटैट सेंटर के गुलमोहर सभागार में कहीं। मौका था मोहल्‍ला लाइव, जनतंत्र और यात्रा बुक्‍स की साझेदारी में पहले बहसतलब का। मीडिया में साहित्‍य की खत्‍म होती जगह पर बोलते हुए उन्‍होंने कहा कि हमें एक खास तरह के साहित्य को ही साहित्य मानने की मानसिकता से उबरने की जरूरत है। जिस वक्त ऐसा होने लगेगा इस बहस को एक निष्कर्ष मिलता दिखाई देने लगेगा।

साहित्‍य और मीडिया पर आज बहसतलब, हैबिटैट आएं 13

साहित्‍य और मीडिया पर आज बहसतलब, हैबिटैट आएं

डेस्‍क ♦ क्‍या हिंदी साहित्‍य मीडिया के लिए सेलेबल कमॉडिटी (बिकाऊ माल) क्‍यों नहीं है? इस मसले पर हिंदी की वर्चुअल दुनिया के सबसे पॉपुलर मंच जनतंत्र/मोहल्‍ला लाइव और पेंगुइन प्रकाशन के हिंदी सहयोगी यात्रा बुक्‍स के साझा प्रयास से एक सेमिनार का आयोजन किया गया है। 18 मई की शाम सात बजे इंडिया हैबिटैट सेंटर, नयी दिल्‍ली के गुलमोहर सभागार में आयोजित इस सेमिनार में हिंदी साहित्‍य और मीडिया के पांच जरूरी नाम सेमिनार में अपनी बात रखेंगे। ये वक्‍ता होंगे : राजेंद्र यादव, सुधीश पचौरी, ओम थानवी, रवीश कुमार और शीबा असलम फहमी।

रंगकर्मी ने कहानी पढ़ी, पाठकों ने कहानी सुनी 3

रंगकर्मी ने कहानी पढ़ी, पाठकों ने कहानी सुनी

विनीत कुमार ♦ पाठकों का रचना से सीधा रिश्ता कायम हो, इस क्रम में यात्रा बुक्स और पेंग्विन इंडिया का प्रयोग सफल रहा। दिल्ली की कंपकंपा देनेवाली ठंड में भी इंडिया हैबिटेट सेंटर का गुलमोहर सभागार लगभग भरा हो तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि रचना पाठ को लेकर पाठक अब भी कितने उत्‍सुक हैं। एक प्रकाशक की हैसियत से यात्रा बुक्स और पेंग्विन इंडिया ने इस बात की पहल की है कि रचना और पाठक के बीच एक स्वाभाविक संबंध विकसित हो। एक ऐसा संबंध, जो कि अख़बारों की फॉर्मूलाबद्ध समीक्षाओं और आलोचकों की इजारेदारी के बीच विकल्प के तौर पर काम कर सके। यह संबंध पाठक की गरिमा को बनाये रखे, उसे विज्ञापनदार समीक्षा पढ़ कर ग्राहक बनने पर मजबूर न करे।

कुछ नया कुछ पुराना : आज इंडिया हैबीटैट सेंटर में 3

कुछ नया कुछ पुराना : आज इंडिया हैबीटैट सेंटर में

डेस्‍क ♦ पेंगुइन बुक्स इंडिया और यात्रा बुक्स की ओर से ‘कुछ नया, कुछ पुराना’ के तहत कुछ गद्य अंशों के नाट्य-पाठ का आयोजन किया गया है। वाचक होंगे प्रसिद्ध युवा रंगकर्मी सुमन वैद्य। कृतियां होंगी चंगेज़ का बयान (मोहसिन हामिद), ज़िंदगी ज़‍िंदादिली का नाम है (ज़किया ज़हीर), मार्था का देश (राजी सेठ), गेंद और अन्य कहानियां (चित्रा मुदगल) और आख़री मुग़ल/दि लास्ट मुग़ल (विलियम डेलरिंपल)। आज शाम सात बजे इंडिया हैबीटेट सेंटर, लोदी रोड, नयी दिल्ली के गुलमोहर सभागार में ये आयोजन है और इसके लिए तीन नंबर गेट से इंट्री‍ है। शुरू होने से आधा घंटा पहले पेंगुइन बुक्स इंडिया और यात्रा बुक्स ने दर्शकों के लिए चाय-पानी का भी इंतज़ाम किया हुआ है।