Articles tagged with: jagadishwar chaturvedi
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जगदीश्वर चतुर्वेदी ♦ अब Google वाले अपने सर्च इंजन में आने वाले हर आदमी का हिसाब रखने वाले हैं। आपकी निजी सूचनाओं का इस्तेमाल कभी भी आपके ख़िलाफ़ किया जा सकता है। Google की नयी प्रणाली के अनुसार अब बुक सर्च करने वालों का हिसाब रखा जाएगा। आप नेट पर कौन-सी किताब पढते हैं, कहां से पढ़ते हैं, कितने पेज़ पढ़ते हैं, प्रत्येक पेज़ पर कितना समय देते हैं – साथ ही मार्जिन में क्या लिखते हैं, यह सब Google के रिकॉर्ड में रहेगा। इसके जरिये यूज़र की रीडिंग आदतों का हिसाब रखा जाएगा। साथ ही उसकी प्राइवेसी पर भी नज़रदारी रहेगी। प्रत्येक यूज़र का व्यापक हिसाब-किताब डिजिटल डोजियर में रहेगा।
नज़रिया, समाचार »
जगदीश्वर चतुर्वेदी ♦ अमेरिकी गुप्तचर संस्था सीआईए ने अपने पैर इंटरनेट पर रख दिये हैं। सीआईए की नज़रदारी का काफी गंभीर अर्थ है। अब सीआईए के ई जासूस आपके ब्लॉग पढ़ना चाहते हैं। ट्विटर और फेसबुक में आप क्या कर रहे हैं, उसे देखना चाहते हैं। यहां तक कि वे यह भी जानना चाहते हैं कि इंटरनेट से आप कौन सी किताब अमाजॉन से ख़रीद रहे हैं, कौन सी किताब आप इंटरनेट पर पढ़ रहे हैं – इस सबका हिसाब सीआईए तैयार कर रहा है। अमेरिका की एक निवेश कंपनी इन क्यू टेल ने अपनी पूंजी का बड़ा हिस्सा इस क्षेत्र में निवेश करने का फ़ैसला लिया है। यह फर्म सीआईए की सहयोगी कंपनी है।
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जगदीश्वर चतुर्वेदी ♦ आदिवासी, औरत और अल्पसंख्यकों के प्रतीक या आइकॉन के रूप में हमारे बीच में एक औरत है, जो लोकतंत्र के इस प्रहसन में ताली बजाने को तैयार नहीं है। वह लोकतंत्र में हिस्सा लेना चाहती है। वह दर्शक बने रहना नहीं चाहती। उसके लिए मानवाधिकार कागजी चीजें नहीं हैं। वह एक लेखिका है। उसने सैंकड़ों कविताएं लिखी हैं। उसे अपनी कविता के लिए लोकतंत्र की तलाश है। वह लोकतंत्र और मानवाधिकारों के बिना जिंदा नहीं रहना चाहती। इसके लिए वह दस साल से भूख हड़ताल पर है। वह शांतिपूर्ण प्रतिवाद कर रही है।
नज़रिया »
जगदीश्वर चतुर्वेदी ♦ भारतीय मीडिया परिदृश्य में 2006 तक इंटरनेट के ग्राहकों की संख्या सवा तीन करोड़ से ज़्यादा थी। इनमें दो करोड़ दस लाख नियमित ग्राहक हैं। तकरीबन 59 मिलियन पीसी साक्षर हैं और ये इंटरनेट विज्ञापनों के लक्ष्यीभूत श्रोता हैं। 2008 तक इंटरनेट के नियमित ग्राहकों की संख्या साढ़े तीन करोड़ का आंकड़ा पार कर जाएगी। एक अनुमान के अनुसार टेलीविजन उद्योग की आय 22 फीसद प्रति वर्ष की दर से बढ़ रही है। आंकड़ों के मुताबिक यह 4.34 बिलियन डॉलर से बढ़ कर 11.78 बिलियन हो जाने की संभावना है। जबकि प्रिंट उद्योग की आय 13 फीसद सालाना की दर से बढ़ रही है। यानी 2.90 बिलियन डालर से बढ़ कर 5.27 बिलियन डॉलर हो जाने की संभावना है।
मोहल्ला दिल्ली, स्मृति »
जगदीश्वर चतुर्वेदी ♦ कैंपस में चौकसी और मीटिंगें चल रही थीं। आसपास के इलाकों में जेएनयू के बहादुर छात्र अपनी पहलकदमी पर जाकर आग बुझाने का काम कर रहे थे। सारा कैंपस इस आयोजन में शामिल था। श्रीमती गांधी के अंतिम संस्कार होते ही उसके बाद वाले दिन हमने दिल्ली में शांतिमार्च निकालने का फ़ैसला लिया। मैंने दिल्ली के पुलिस अधिकारियों से प्रदर्शन के लिए अनुमति मांगी। उन्होंने अनुमति नहीं दी। हमने प्रदर्शन में जेएनयू के शिक्षक और कर्मचारी सभी को बुलाया। जेएनयू के अब तक के इतिहास का यह सबसे बड़ा शांतिमार्च था। इसमें सारे कर्मचारी, छात्र और सैंकड़ों शिक्षक शामिल हुए। ऐसे शिक्षकों ने इस मार्च में हिस्सा लिया था, जिन्होंने अपने जीवन में कभी किसी भी जुलूस में हिस्सा नहीं लिया था।
नज़रिया, मीडिया मंडी, समाचार »
जगदीश्वर चतुर्वेदी ♦ मीडिया के द्वारा जिन स्रोतों के जरिये ख़बरें दी जाती हैं, उनकी भी दशा सोचनीय है। आमतौर पर पुरुषों के स्रोत के आधार पर ख़बरें तैयार की जाती हैं। प्रकाशित ख़बरों में 85 फ़ीसदी ख़बरें पुरुष स्रोत के हवाले से लिखी गयीं। इनमें 92 फ़ीसदी गोरे थे। यही स्थिति भारत की भी है, यहां पर अधिकांश ख़बरों के स्रोत पुरुष हैं और हिंदू हैं। और अधिकतर ख़बरें पार्टीजान स्रोत से लिखी जाती हैं। हमें भारत के संदर्भ में यह भी देखना चाहिए कितनी ख़बरें खाते-पीते, खुशहाल लोगों के स्रोत के आधार पर लिखी गयीं और कितनी गरीबों के स्रोत के आधार पर लिखी गयीं?
समाचार »
जगदीश्वर चतुर्वेदी ♦ 2009 टैक्नोरती ब्लॉग सर्वे हाल ही में प्रकाशित हुआ है। विश्व ब्लॉग जगत का यह सबसे बड़ा सर्वेक्षण है। विश्व ब्लॉग सर्वे में पाया गया कि टेलीविजन, ब्लॉग और सोशल मीडिया इन तीन माध्यमों का ज़्यादा उपभोग हो रहा है। सर्वे में शामिल ब्लॉगरों ने बताया कि वे सर्च और शेयरिंग के काम पर औसतन तीन घंटे प्रति सप्ताह और वीडियो पर प्रति सप्ताह दो घंटा खर्च करते हैं। ब्लॉग लेखकों में अधिकांश ऐसे हैं, जो प्रति सप्ताह ऑनलाइन अखबार-पत्रिका पढ़ने पर 2-3 घंटे खर्च करते हैं। ब्लॉग लेखकों में मात्र 20 प्रतिशत अपने ब्लॉग अपडेट करते हैं। 80 प्रतिशत अपडेट नहीं करते। मात्र 13 प्रतिशत हैं, जो मोबाइल के जरिये अपने ब्लॉग को अपडेट करते हैं।
मोहल्ला दिल्ली, शब्द संगत »
जगदीश्वर चतुर्वेदी ♦ जेएनयू के हिंदी-उर्दू के पूर्व छात्रों का समागम 27-29 अक्टूबर 2009 को हो रहा है। यह समागम इस अर्थ में महत्वपूर्ण है कि इसमें पहली बार नामवरजी नहीं हैं। जेएनयू का भारतीय भाषा केंद्र नामवर के बिना सूना लगता है। लगता है प्रो चमनलाल ने नामवरजी की उस बात का ख्याल रखा है जो उन्होंने जेएनयू में नामवर पुस्तक के लोकार्पण के समय दिल्ली के त्रिवेणी सभागार में कही थी। नामवरजी ने कहा था, मैं चाहता हूं कभी मुझे सुनने के लिए भी बुलाया जाए। नामवर जी के छात्रों ने लगता है, उनकी बात रख ली है। देखते हैं आगे क्या होता है। आशा है इस मौके पर आदरणीय गुरुवर सुनने तो कम से कम ज़रूर आयेंगे। वैसे भी यदि वे कार्यक्रम में आ धमके और छात्रों ने मांग कर दी तो उन्हें मंच पर आने से कौन रोक पाएगा।
नज़रिया, समाचार »
जगदीश्वर चतुर्वेदी ♦ पेंटागन ने युद्धविरोधी नॉम चोम्स्की को सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित करने का फैसला किया है। पेंटागन से पुरस्कार पाना चोमस्की के जीवन की सबसे बड़ी आयरनी होगा। देखना है कि वे यह पुरस्कार लेते हैं या ठुकराते हैं। उल्लेखनीय है कि अमेरिका में शांति के पक्ष में और युद्ध के खिलाफ जनता को गोलबंद करने, सारी दुनिया में शांति का संदेश फैलाने में उनकी केंद्रीय आइकॉन की भूमिका रही है। नॉम चोमस्की सारी दुनिया की युद्धविरोधी ताकतों के प्रतीक पुरूष हैं। उन्हें अमेरिकी सैन्य संगठन का सर्वोच्च सम्मान मिलना स्वयं में आयरनी है। विरोधाभास है। अमेरिका में उनकी किताब इंटरवेंशन पर पाबंदी भी लगायी गयी थी। पेंटागन ने यह सम्मान चोमस्की को क्यों दिया, यह अभी भी रहस्य है।
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जगदीश्वर चतुर्वेदी ♦ युद्ध की भाषा की जगह शांति की भाषा का माध्यमों और सार्वजनिक विमर्श के केंद्र में आना ओबामा की सबसे बड़ी सफलता है। वह इसके लिए नोबल पुरस्कार के हकदार हैं। विगत दो दशकों से हमारे कान शांति और सदभाव की भाषा सुनने को तरस गये। ओबामा ने वाक्-कला के जरिये अमरीकी जनता को सम्मोहित करने की कोशिश की। कहीं प्रत्यक्ष, कहीं प्रच्छन्न, कहीं रंगभेद के खिलाफ तो कहीं आर्थिकमंदी और आर्थिक कुप्रबंधन के बारे में बुश प्रशासन पर प्रत्यक्ष हमले किये। यह इमेज बनायी कि वह किसी से नफरत नहीं करता और व्यक्तिगत हमले नहीं करता। ओबामा ने अपने भाषणों में कभी भी अश्वेत और यथास्थिति को बदलने वाले की इमेज से विचलन नहीं दिखाया।



