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Articles tagged with: mahatma gandhi international hindi university

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[6 Jan 2011 | 2 Comments | ]

वर्धा संवाददाता ♦ >कुलदीप नैयर, रजी अहमद आदि की उपस्थिति में राय ने अपनी छद्म प्रतिबद्धता का नया स्वांग रचा। हम सब को फिर से चौंकाते हुए बंधु ने विनायक सेन के खिलाफ कोर्ट के फैसले की खूब आलोचना की। अभी बहुत दिन नहीं हुए हैं, जब राय को 31 जुलाई को हंस की संगोष्ठी से भागना पड़ा था, राज्य के पक्ष में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर दमन को जायज ठहराने के बाद। दरअसल यह सारी कवायद छिनाल प्रकरण से अपनी फजीहत को कम करने के प्रयास के तौर पर है। अब हमारी त्रासदियों में प्रतिबद्धता के प्रहसन से बेहतर तरीका और क्या हो सकता था। वैसे विभूति एक अनिवार्य परिघटना हैं, एक आईना भी, जो अपने जैसे कई विदूषकों का प्रतिरूप खोज रहा है, राजकिशोर, आलोकधन्वा, रामशरण जोशी, जैसा कोई भी।

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[25 Nov 2010 | One Comment | ]

इलाहाबाद डेस्‍क ♦ 26 नवंबर यानी कल इलाहाबाद में महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय का क्षेत्रीय विस्‍तार केंद्र “आलोचना इस समय” विषय पर एक गोष्‍ठी का आयोजन कर रहा है। गोष्‍ठी की अध्‍यक्षता कोई ओपी मालवीय करेंगे। मुख्‍य अतिथि होंगे स्‍वयं कुलपति वीएन राय। वक्‍ता रहेंगे जीवन सिंह, भारत भारद्वाज, सूरज पालीवाल, शंभू गुप्‍त, श्रीराम त्रिपाठी, रघुवंश मणि और निशांत। वक्‍ताओं में इलाहाबाद का कोई व्‍यक्ति नहीं है। जाने माने आलोचक डॉ राजेंद्र कुमार को इस गोष्‍ठी से दूर रखा गया है। छिनाल प्रकरण से पहले डॉ राजेंद्र कुमार हिंदी विश्‍वविद्यालय की पत्रिका बहुवचन के संपादक थे। छिनाल प्रकरण के बाद यह पहला अवसर है, जब कुलपति वीएन राय इलाहाबाद आ रहे हैं।

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[24 Nov 2010 | 3 Comments | ]

वर्धा डेस्‍क ♦ विभूति नारायण राय अपने माफीनामे से पलट गये हैं। नागपुर के हाई कोर्ट में उन्होंने पिछले दो अगस्त को अपने बिना शर्त माफीनामे को अपनी सफाई बतायी है और फिर से “छिनाल” शब्द की व्याख्या प्रस्तुत की है। पिछले 21 अक्तूबर को राय साहब ने नागपुर उच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर दो अगस्त को अपने बिना शर्त माफीनामे को “सफाई” बताते हुए वर्धा कोर्ट में उनपर चल रहे इस मामले के मुकदमे को ख़ारिज करने की अर्जी डाल दी है। इस क्रम में उन्होंने याचिकाकर्ता संजीव चंदन के साथ ही रवींद्र कालिया, राकेश मिश्रा और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस भिजवायी है।

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[17 Nov 2010 | 10 Comments | ]

डेस्‍क ♦ महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय से दूसरी खबर ये है कि पिछले दिनों निलंबित किये गये छात्र उत्पल कांत अनीश को कुलपति विभूति नारायण राय ने दो सालों के लिए निष्कासित कर दिया। इसके पहले 7 सितंबर को अनीश को निलंबित करने के बाद 17 सितंबर को “क्यों नहीं निलंबन किया जाए” आशय का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। लगभग डेढ़ महीने बाद जब नोटिस अनीश को थमाया गया और इससे पहले कि अनीश इसका जवाब दे, उसे निष्कासित कर दिया गया। निष्कासन के लिए अनीश के जो अपराध गिनाये गये हैं, उसमें कहा गया है कि उसने कुलपति के खिलाफ आंदोलन छेड़ने का प्रयास किया व विवि मे मौजूद होमगार्डों के साथ मारपीट की।

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[16 Nov 2010 | 4 Comments | ]

डेस्‍क ♦ खबर है कि महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के कुलाधिपति का पद नामवर सिंह से खाली होना है और उनके बाद इस पद के लिए महात्‍मा गांधी के पौत्र और राजगोपालाचारी के दौहित्र गोपालकृष्‍ण गांधी के नाम का एलान किया गया, लेकिन उन्‍होंने इस पद को लेने से इनकार कर दिया। भारत के राष्ट्रपति ने बंगाल के पूर्व गवर्नर गोपालकृष्ण गांधी को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय का कुलाधिपति बनाने का निर्देश जारी किया था। गोपालकृष्ण गांधी ने दो नवंबर को राष्‍ट्रपति को पत्र लिखकर उक्त पद को स्वीकार करने से मना कर दिया… इधर सूत्र बताते हैं कि विभूति अपने नये पैंतरे के तौर पर महाश्वेता देवी को कुलाधिपति बनाना चाहते हैं।

नज़रिया, विश्‍वविद्यालय, शब्‍द संगत »

[12 Oct 2010 | 15 Comments | ]

राजकिशोर ♦ दो और तीन अक्टूबर को श्रेष्ठता का जो समवाय दिखाई पड़ा, उसके प्रभाव का वर्णन किये बिना मैं रह नहीं सकता। करीब चालीस लेखक बाहर से आये थे – नामवर सिंह से लेकर दिनेश कुशवाहा तक। मानो साहित्य सूर्य की रश्मियों का पूरा स्पेक्ट्रम खुल गया हो। सबकी अपनी-अपनी छटा थी। इन छटाओं की खुशबू ने जैसे विश्वविद्यालय के वातावरण को अपनी घनी उपस्थिति से भर दिया हो। सभी की चेतना का स्तर अचानक कुछ ऊपर उठ चला। रोजमर्रा की बातचीत के बीच अज्ञेय, शमशेर, नागार्जुन, फैज वगैरह हमारे बीच आ बैठे। यह कुछ-कुछ ऐसे ही था, जैसे कोई सच्चा संत गांव में आता है, तो गांव का माहौल अपने आप बदल जाता है… या किसी पुस्तकालय में पैर रखते हैं तो मानसिकता बदल जाती है।

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[6 Oct 2010 | 17 Comments | ]

अरविंद शेष ♦ अगर राजेंद्र यादव मानते हैं कि स्त्री और दलित इस समाज के वंचित और शोषित तबके रहे हैं तो शोषण के वे सूत्र क्या रहे हैं और विचार से लेकर भाषा और व्यवहार तक में शोषण और वंचना का यह सामाजिक मनोविज्ञान किस-किस भेस में छिपा अपना काम करता रहता है? क्या महिलाओं का मामला सचमुच उतना परम पावन नहीं है कि कोई जब चाहे उनके ‘सम्मान’ में उन्हें ‘निंफोमेनियाक कुतिया’ या ‘छिनाल’ कह दे? क्या इसके बाद अब वे यह कहना चाहेंगे कि अगर कोई ‘चोर-चमार’ या ‘भंगी कहीं के’ जैसा (आपराधिक) जुमला उछालता है तो इसके बदले उसकी आरती उतारी जानी चाहिए और इसके लिए कोई हाय-तौबा मचाने की जरूरत नहीं?

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[6 Oct 2010 | 10 Comments | ]

वर्धा से एक अनाम छात्र ♦ छिनाल प्रकरण के बाद यह आयोजन विभूति के लिए शुद्धि यज्ञ जैसा था, जिसमें देवताओं के आशीर्वाद से दानव को अभय प्राप्त होना था। दानव तो भारतीय रुपये कि शक्ल में ऐश्वर्य लुटाने के लिए तैयार बैठा था। यथायोग्य  सुरा की व्यवस्था तो है ही। उधर पौरोहित्य के लिए नामवर सिंह हमेशा तैयार होते हैं। शर्त वही, मणिकांचन, सुरा और सम्मान। यजमनिका में शिष्य भी बहुत हैं आचार्य के पास, जो किसी भी शुद्धि यज्ञ में होता को आशीर्वाद देते हैं, खगेंद्र ठाकुर सहित अनेक प्रलेस कुलजन्मा। तो यह वित्त का ही माजरा है, जो राजकिशोर साहब से कुछ कैफियत लिखवाती है। अन्यथा वे जिस उदार विभूति के चारणत्व में अपना लोक परलोक बिगाड़  रहे हैं, उनकी कुछ काली करतूतें भी उन्हें कैसे दिखाई देंगी।

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[6 Oct 2010 | 12 Comments | ]

आजाद अंसारी ♦ मैं आजाद अंसारी, वल्द किताबुद्दीन अंसारी, रिहाइश सिवान, कौडिया, अंसारी टोला, बिहार, हिंदी विश्वविद्यालय में रहते हुए विभूति नारायण राय द्वारा जबर्दस्त रूप से दिनदहाड़े उत्पीड़‍ित किया गया हूं। हिंदी विश्वविद्यालय में मुस्लिम शोधार्थियों की संख्या मुझे जोड़कर महज तीन थी। अब मात्र दो बची है। मुझे परिसर से बाहर निकाल दिया गया है। मुझे इरादतन पीएचडी की कोर्स वर्क की परीक्षा में असफल कर दिया गया है। वह भी एक बार नहीं, पूरे दो बार। इसके साथ ही मेरा पंजीयन रद्द कर दिया गया है और पुलिस बुलाकर मुझे छात्रावास से बाहर निकाल दिया गया है। और अब मैं न्याय के लिए संघर्षरत हूं।

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[2 Oct 2010 | 5 Comments | ]

अभिषेक श्रीवास्‍तव ♦ विभूति नारायण राय के विवादास्‍पद साक्षात्‍कार का जख्‍म अब भी हरा है उन लेखकों-पत्रकारों की चेतना में, जिन्‍होंने दिल्‍ली से लेकर वर्धा तक राय और उनका साक्षात्‍कार छापने वाले नया ज्ञानोदय के संपादक रवींद्र कालिया के खिलाफ पिछले दिनों अपनी आवाज उठायी थी। हिंदी जगत में जैसा कि हमेशा होता आया है, कि छोटे-छोटे सम्‍मान और व्‍याख्‍यान के बहाने विरोध के स्‍वरों को कोऑप्‍ट कर लिया जाता रहा है और जिसकी आशंका विवाद के दौरान भी जतायी ही जा रही थी, आज इसी की शुरुआत महात्‍मा गांधी अंतरराष्‍ट्रीय हिंदी विश्‍वविद्यालय के परिसर में हो रही है। गौरतलब है कि यह वर्ष अज्ञेय, नागार्जुन, शमशेर व फैज अहमद फैज की जन्‍मशती का है। इस मौके पर एक साथ चारों रचनाकारों का मूल्‍यांकन करने के उद्देश्‍य से विश्‍वविद्यालय ने दो दिन का एक विमर्श आयोजित किया है, जिसमें हिंदी के कई स्‍वनामधन्‍य लेखक शिरकत कर रहे हैं।