Tagged: mahmood farooqui

0

Dastan-E-Amir Hamza in Berkeley [California]

➧ vatsala shrivastava Audience is the most ruthless critic. Performer’s stature or surprising gimmicks cannot draw undeserved praise from it. It strikes its palms together only for a special moment in which an artiste...

हर तरह के सिनेमा को जीने का हक है, उसे जीने दें … 3

हर तरह के सिनेमा को जीने का हक है, उसे जीने दें …

विनीत कुमार ♦ गांड, चोद (अनुराग कश्यप) के बाद अब बहनचोद और बंदूक की तरह खड़ा लौड़ा सेमिनारों में बड़े इत्मीनान से इस्तेमाल किया जाने लगा है। दर्शक किस दैवी शक्ति से इसे पचा ले रहे हैं, नहीं मालूम। लेकिन मैंने जो बात कही थी कि गालियों का अगर बहुत इस्तेमाल होने लगे तो ये किसी भी विधा के लिए रिवेन्यू जेनरेट करने का जरिया नहीं रह जाएगा।

जुलिआनो की याद में हिल्‍ले ले झकझोर दुनिया हिल्‍ले ले! 2

जुलिआनो की याद में हिल्‍ले ले झकझोर दुनिया हिल्‍ले ले!

प्रकाश के रे ♦ तीस अप्रैल की शाम राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय दिल्ली के सम्मुख सभागार में जाने-माने फलस्तीनी-इजरायली फिल्मकार और नाटककार जुलिआनो मेर खमीस को दिल्ली के कलाकारों और कलाप्रेमियों ने श्रद्धांजलि दी। इसी साल चार अप्रैल को फलस्तीन के जेनिन में गोली मार कर जुलिआनो की हत्या कर दी गयी थी। पेश हैं उस अवसर की कुछ तस्वीरें और एक छोटा-सा विडियो…

क्‍या हिंदुस्‍तान का मतलब भारत सरकार हो गया है? 17

क्‍या हिंदुस्‍तान का मतलब भारत सरकार हो गया है?

विनीत कुमार ♦ इस मुल्क का जो हिस्सा घर, गांव, जंगल और कस्बों के बजाय सैनिक छावनी में तब्दील कर दिया गया हो, लोग घरों के बजाय लश्करों में रहने पर मजबूर हों, हिंदुस्तान के राष्ट्रगान से पंजाब, सिंध, गुजरात, मराठा छिटककर राजनीतिक पार्टियों का एक तिलिस्म बन गया हो, जिसे देश की जनता नहीं अय्यार जादूगर चलाता हो, हिंदुस्तान का मतलब भारत सरकार हो गया हो, जिसे मिली-जुली संस्कृति नहीं, मिली-जुली लंगड़ी-अपाहिज पार्टियां चला रही हों, वहां अन्ना हजारे और उनके समर्थकों के साथ श्रद्धानत होकर सारे जहां से अच्छा हिंदोस्‍तां हमारा गाना मजबूत कलेजे के ही बूते की चीज है। हम जैसे लोगों के लिए ऐसा करने के पहले अभिनय कला की शार्टटर्म ही सही लेकिन कोर्स करने की जरूरत पड़ जाएगी।

सफ़दर की जनवरी थी और सौ साल के फैज़ अहमद फैज़ थे 1

सफ़दर की जनवरी थी और सौ साल के फैज़ अहमद फैज़ थे

अविनाश ♦ जमशेदपुर से आये एक खासे बुजुर्ग साथी ने फैज की नज्‍म पर बहुत खूबसूरत नृत्‍य पेश किया। रेखा राज की आवाज मानो इकबाल बानो की आत्‍मा से निकल रही थी, जब ताज उछाले जाएंगे, जब तख्‍त गिराये जाएंगे – हम देखेंगे। पाकिस्‍तान से आये नौजवान गायक अली सेठी ने फैज को जवां दिलों की धड़कन बताया। मुरली मनोहर प्रसाद सिंह के संपादन में निकला नया पथ का फैज पर निकला अंक लोकार्पित हुआ… और शाम में हमारे समय के निहायत ही समझदार फिल्‍मकार-रंगकर्मी महमूद फारूकी और दानिश हुसैन ने फैज की दास्‍तान सुनायी। रात की ठंडी हवाएं हड्डी में घुसने को बेताब थीं, लेकिन मेले की भीड़ का आलम था कि खुले आसमान के नीचे भी जगह जगह लोग अपनी अपनी टोलियों में गुफ्तगू कर रहे थे।

उस्‍ताद सरकार की जमूरी अदालतों को बंद करो! बंद करो! 6

उस्‍ताद सरकार की जमूरी अदालतों को बंद करो! बंद करो!

विनीत कुमार ♦ हमारे देश की सरकार भी एक सुरक्षित मुल्क बनाने में जी-जान से जुटी है। वो देश के नागरिकों को सुरक्षा देना चाहती है। लेकिन बिना उनसे पूछे और बिना उनसे जानें कि उन्हें उस सुरक्षा की जरूरत है भी या नहीं या फिर लोग आखिर सुरक्षा चाहते भी हैं तो किससे। बिना जनता की इच्छा के जो सुरक्षा मिलती है, उसे आप क्या कहेंगे? छत्तीसगढ़ की सरकार तो मानकर चल रही है कि उनकी जनता बहुत तकलीफ में है और असुरक्षित भी। तकलीफ की बात तो बाद में देखेंगे लेकिन फिलहाल तो उन्हें सुरक्षित रखना जरूरी है। ये मौका थोड़े ही है कि जनता तय करे कि उन्हें सुरक्षा चाहिए कि नहीं। जब सरकार को पता है कि उसकी जनता सुरक्षित नहीं है तो फिर जानते हुए वो अपनी प्यारी जनता को मरने कैसे दे।

पीपली लाइव क्‍या? पीपली लाइव ये! पीपली लाइव वो! 6

पीपली लाइव क्‍या? पीपली लाइव ये! पीपली लाइव वो!

आशुतोष श्‍याम पोतदार ♦ इस फिल्‍म का फॉर्म अलग है। सटायर का मामला ऐसा ही होता है। और निर्देशक ने बखूबी से दिखाया है। उसके लिए उनका अभिनंदन करना जरूरी है। मुझे लगता है कि निर्देशक बहुत अंदर से जानते हैं मीडिया वालों का हंगामा। इनसाइडर का रोल अदा करते हुए वो आउटसाइड रहके भी देख सकते हैं। ये इसकी महत्‍वपूर्ण खूबी है। उसको सराहना चाहिए। आजकल जो अर्बन और रूरल में बढ़ती हुई दूरियां हैं, वो कॉम्‍प्‍लेक्सिटी से दिखाने का प्रयत्‍न करती है ये फिल्‍म। बट ये सिर्फ प्रयत्‍न कहूंगा। इस प्‍वाइंट को लेकर मुझे रिजर्वेशन है फिल्‍म के बारे में। रूरल खड़ा नहीं कर पाती है। सिर्फ हारमोनियम पर गाना गाने से या रूरल जियोग्राफी से रूरल नहीं आएगा। उसका कॉन्‍टेक्‍स्‍ट नहीं आता है। ये इस फिल्‍म की कमी है।