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जीते रहो और किसी न किसी पर मरते रहो!

एक ख़त जॉन एलिया का, अनवर मक़सूद के नाम 26 नवंबर 2008 को कराची आर्ट्स कौंसिल में जॉन एलिया की याद में एक शाम मनायी गयी थी। उसमें अनवर मक़सूद साहब ने जन्नत से...

Why we never stop loving men? 2

Why we never stop loving men?

Taslima Nasreen ♦ Men throw acid on us with the intention of injuring and disfiguring us. Men throw acid on our bodies, burn our faces, smash our noses, melt our eyes, and walk away as happy men. Acid attack is common in Pakistan, Bangladesh, India, Afghanistan, Nepal, Cambodia, and a few other countries. Men throw acid on us because men are angry with us for refusing sexual harassment, sexual exploitation, proposals of marriage, demands for dowry, for attending schools, for not wearing Islamic veils, for not behaving well, for speaking too much, for laughing loudly and for pure fun.

इंसान में भगवान | अल्लाह निगहबान, यहां भी है वहां भी! 9

इंसान में भगवान | अल्लाह निगहबान, यहां भी है वहां भी!

स्नेहवीर गुसाईं ♦ मुझे याद है कई सालों पहले हमारे बीच ये सरहद नहीं थी। एक दिल एक जां एक जुबां मगर हमारा मुस्तकबिल एक न हो सका। कंटीली तारों ने हमें दो जमीन में बांट दिया, मगर उर्दू नहीं बंटी, ठुमरी नहीं बंटी, पंजाबी नहीं बंटी, न गालिब को बांट पाये न इकबाल को, नोट बदल गये, वोट बदल गये, इबादत नहीं बदली, सियासत नहीं बदली।

पाक से बेहतर रिश्‍ते के अलावा कोई विकल्‍प नहीं 4

पाक से बेहतर रिश्‍ते के अलावा कोई विकल्‍प नहीं

सैय्यद अली अख्तर ♦ वास्तविकता तो यह है कि भारत और पाकिस्तान एक दूसरे के पड़ोसी हैं। जैसा मैं समझता हूं, पड़ोसी कैसा भी हो उसके साथ रहना एक विवशता है क्योंकि आप मित्र तो बदल सकते हैं, पड़ोसी नहीं बदला जा सकता। हमारा एक हजार साल से ऊपर का साझा इतिहास, संस्कृति और परंपरा है। हमें सोचना पड़ेगा कि इतना सब कुछ सांझा होने के बावजूद ऐसा क्या है जो हमें बांट रहा है। क्या हम अनंत काल तक एक दूसरे का खून बहाते या फिर चूसते रहेंगे। अगर उत्तर है नहीं, तो प्रश्न यह उठता है कि फिर क्यों न एक अच्छे पड़ोसी की तरह रहा जाए। क्या यह संभव है। मुझे दोनों तरफ के राजनीतिज्ञों, सेना से कोई उम्मीद नहीं है। इस संबंध में दोनों देशों की सिविल सोसाइटी को पहल करनी होगी।

मंसूर सईद साठ के दशक के नौजवानों के हीरो थे 0

मंसूर सईद साठ के दशक के नौजवानों के हीरो थे

शेष नारायण सिंह ♦ मंसूर सईद मौलाना अहमद सईद के पोते थे, और सफदर हाशमी के भाई। उन्होंने दिल्ली के जामिया स्कूल और एंग्लो-अरबिक स्कूल में शुरुआती तालीम पायी। दिल्ली के दयाल सिंह कॉलेज और दिल्ली कॉलेज से बीए और एमए किया। कॉलेज के दिनों में वे वामपंथी छात्र आंदोलन से जुड़े। उन दिनों दिल्ली में वामपंथी छात्र आंदोलन में सांस्कृतिक गतिविधियों पर ज्यादा जोर था और इसी दौरान मंसूर सईद ने मशहूर जर्मन नाटककार ब्रेख्त के नाटकों का अनुवाद हिंदुस्तानी में किया, जो बहुत बार खेला गया। अपनी पूरी जिंदगी में मंसूर सईद ने हार नहीं मानी हालांकि बार बार ऐसी परिस्थितियां पैदा हुईं कि लोगों को लगता था कि वे हार गये हैं। लेकिन वे हमेशा जीत की तरफ बढ़ते रहे।

पाकिस्तान का नया घिनौना चेहरा 1

पाकिस्तान का नया घिनौना चेहरा

मुशर्रफ़ आलम ज़ौक़ी ♦ एक ज़माना था, जब मजदूरों का शायर हबीब जालिब हुकूमत के जाबिराना रवैये के ख़िलाफ मुंह खोलता था और जेल की चहारदीवारी का फाटक उसके लिए खोल दिया जाता था। ज़रा अलेक्‍सांद्र सोल्‍झेनिस्‍तीन की ‘गुलाल आर्किपिलागो’ का वो दृश्य याद कीजिए। एक व्यक्ति पत्नी-बच्चों के साथ सैर-सपाटे को निकला है। अचानक कोई सामने से आकर कहता है, हैलो, मुझे पहचाना। अजनबी कहता है, वो बस दो मिनट उससे बात करना चाहता है। सोल्‍झेनिस्‍तीन बताते हैं कि आप ये न समझें कि यह मुलाकात दो मिनट मे खत्‍म हो जाएगी। क्योंकि उस निरपराध को किसी अज्ञात आरोप में साइबेरिया भेज दिया गया है। यह दो मिनट बीस वर्ष भी हो सकते हैं।

पाकिस्‍तान को खलीफा राज बनाने की साज़‍िश 0

पाकिस्‍तान को खलीफा राज बनाने की साज़‍िश

लंदन, 5 जुलाई। ब्रिटेन स्थित एक इस्लामिक आतंकवादी संगठन ने पाकिस्तान में रक्तरहित विद्रोह के जरिए तख्ता पलट करने और वहां खलीफा राज स्थापित करने की योजना बनाई है। समाचार पत्र ‘द संडे टाइम्स’ ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि कट्टरपंथी संगठन हिज्ब उत-तहरीर के सदस्यों ने इस्लामाबाद में रक्तरहित तख्ता पलट कर एक ऐसे खलीफाराज स्थापित करने की योजना बनाई है जिसमें कड़े इस्लामी कानून लागू किए जा सकें।