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संसद में भी बलात्‍कारी मानसिकता मौजूद है

♦ जावेद अख्‍तर सर, सवाल यह है, गुस्‍सा इस बात पर है कि उस आदमी का इंटरव्‍यू क्‍यों लिया गया? गुस्‍सा इस बात पर है कि उस आदमी ने इतनी गलत बातें क्‍यों की?...

कविता शब्दों में नहीं शब्दों के बीच के सन्नाटे में होती है 6

कविता शब्दों में नहीं शब्दों के बीच के सन्नाटे में होती है

ओम थानवी ♦ रघुवीर सहाय की एक कविता की पंक्ति है : बोले तो बहुत, पर कहा क्या? संसद में जावेद अख्तर की तकरीर सुनकर वही पंक्ति बरबस याद आयी। सीधी-साफ बात सामने रखने के लिए इतनी कलाबाजी की क्या दरकार? इतनी गलेबाजी? शब्दों की फिजूलखर्ची एक शायर को – भले फिल्मी ही क्यों न हो – शोभा नहीं देती। जब बोलने की जगह परफॉर्म करने लगते हैं, तो जायज बात का असर भी घट जाता है, चाहे उस वक्त तालियां क्यों न बटोर लें (हालांकि सूनी संसद में वह भी खास हासिल न हुईं)। पता नहीं कितनी बार दोनों हाथ हवा में लहराये, फिर माइक की जड़ों में पटके। यह नर्वस होने की निशानी है। गले की नसों का खिंचना भी। बहरहाल मुंह खोला यह अच्छा किया, काम की बात भी उठायी। पर विस्तार अनावश्यक था।

वक्‍त की छलनी में चेहरे गुम हो जाते हैं, गीत अमर रहता है 4

वक्‍त की छलनी में चेहरे गुम हो जाते हैं, गीत अमर रहता है

जावेद अख्‍तर ♦ मैं उस मुल्‍क का बाशिंदा हूं कि जिस मुल्‍क में मैं पच्चीस बार आरएसएस के खिलाफ स्‍टेटमेंट दे चुका हूं, लेकिन जब मुझे कॉपीराइट की जरूरत पड़ती है, तो मैं अरुण जेटली साहब के पास जाता हूं और वे मेरी बात सुनते हैं और कहते हैं कि मैं तुम्‍हारी मदद करूंगा। यह है हिंदुस्‍तान! हिंदुस्‍तान यह है कि मैं आगरा गया और मैंने जब ताजमहल देखा, तो वहां जो पत्तियां बनी थीं, मैंने पूछा कि ये किन लोगों ने बनायी हैं? अब ऐसे लोग क्‍यों नहीं हैं? तो बोले, आइए दिखा देते हैं। हमें ले गये, लड़के एक लाइन से बैठे हुए वहीं संगमरमर की पत्तियां बना रहे थे। मैंने पूछा तो बताया कि गुजरात में एक जैन मंदिर बन रहा है। उनका नाम पूछा तो सब मुसलमान थे। ये है हिंदुस्‍तान!

मधु कोड़ा और राजकुमार अग्रवाल के साथ बढ़ता हुआ झारखंड 0

मधु कोड़ा और राजकुमार अग्रवाल के साथ बढ़ता हुआ झारखंड

सुनील तिवारी ♦ बकौल राजकुमार अग्रवाल देश के नब्बे फीसदी नेता हैं भ्रष्ट, देश को कर रहे हैं नष्ट और कहते हैं कि हम पर करो ट्रस्‍ट। वाह राजकुमार जी, क्या खूब कहा आपने। तभी तो आपने राज्यसभा चुनाव में अपने इस कथन को प्रमाणित कर इतिहास ही कायम कर दिया। कुछ दिनों पहले मधु कोड़ा एंड कंपनी ने झारखंड का नाम देश-विदेश में रौशन किया था, इस बार आपने लोकतंत्र एवं उसके पहरेदारों को उसकी औकात बताने का काम कर झारखंड को कलंकित करने की रही-सही कसर भी पूरी कर दी। आप जैसे धनपशुओं की वजह से भी झारखंड रोज दस कदम पीछे खिसक रहा है। पहले नेताओं मंत्रियों को घर बुलाकर फुल्का खिलाते हैं, फिर उनसे जायज नाजायज काम करवाते हैं।

राज्‍यसभा की मीडिया सलाहकार समिति का एलान 3

राज्‍यसभा की मीडिया सलाहकार समिति का एलान

डेस्‍क ♦ दैनिक भास्कर समूह से जुड़े पत्रकार उर्मिलेश को राज्यसभा की मीडिया सलाहकार समिति का चेयरमैन मनोनीत किया गया है। यह पहली बार है, जब हिंदी के किसी पत्रकार को राज्‍यसभा की मीडिया सलाहकार समिति चेयरमैन बनाया गया है। उर्मिलेश अपनी तीखी राजनीति रपटों के लिए जाने जाते रहे हैं और उनकी कई किताबें भी आ चुकी हैं। इससे पहले अंग्रेजी के पत्रकार ही इस समिति का नेतृत्‍व करते थे। पंद्रह सदस्यीय मीडिया सलाहकर समिति में उर्मिलेश के अलावा एनडीटीवी के राहुल श्रीवास्तव को वाइस चेयरमैन, वार्ता (तेलुगु) के आर राजगोपालन को सचिव और द टेलीग्राफ की राधिका रामाशेषन को संयुक्त सचिव मनोनीत किया गया है। वरिष्‍ठ पत्रकार अनिल चमड़‍िया को भी सलाहकार समिति में जगह दी गयी है।

माननीय महोदय, इंटरनेट पर पोर्नोग्राफी बंद करवाएं… 2

माननीय महोदय, इंटरनेट पर पोर्नोग्राफी बंद करवाएं…

राम प्रकाश ♦ महोदय, इंटरनेट पर बढ़ रही नग्नता (पोर्नोग्राफी) एक अत्‍यंत गंभीर मसला है। यह अश्‍लीलता भारतीय जीवन मूल्यों एवं संस्कृति के नितांत विरुद्ध है। स्थिति यह है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को भी उपहास का विषय बनाने से परहेज नहीं किया गया था। सभ्य समाज इंटरनेट के माध्यम से घर-घर तक पहुंच रही अश्‍लील सामग्री से व्यथित एवं चिंतित है। इस पोर्नोग्राफी का न केवल बच्चों पर कुप्रभाव पड़ रहा है, अपितु समस्त समाज में बुराई फैल रही है। भारत के कई तटवर्ती राज्यों एवं महानगरों में सेक्‍स पर्यटन के अभिप्राय से विदेशी निरंतर आ रहे हैं। इतना पानी सिर से गुजर गया है कि अब इंटरपोल अपने 188 सदस्य देशों के सहयोग से ऐसी वेबसाइट ब्लॉक करने तथा उन्हें तैयार करने वालों का पता लगाने की योजना बनाने की सोच रही बतायी जाती है।

महोदय, क्‍या जोशी कमेटी की रिपोर्ट लागू होगी? 0

महोदय, क्‍या जोशी कमेटी की रिपोर्ट लागू होगी?

अंबिका सोनी ♦ 1997 में प्रसार भारती स्थापित की गयी। वह बिल्कुल एक autonomous organisation के रूप में स्थापित की गयी और क्‍या रूल्स बनाने हैं, क्‍या रिक्रूटमेंट रूल्स बनाने हैं, किस तरह से लोगों को भर्ती करना है, यह अब प्रसार भारती के अधिकारों के तहत आता है। वर्ष 2006 में एक ग्रुप ऑफ मिनिस्टर्स बनाया गया था। कुछ मुद्दे उनके सामने रखे गये थे, जिनमें यह मुद्दा भी था कि जो लोग 1997 में प्रसार भारती को सरकार की तरफ से भेजे गये थे, उनका क्‍या स्टेटस होना चाहिए? तो जीओएम ने यह तय किया था कि 5 अक्‍टूबर, 2007 तक जो लोग उनके ज़रिए प्रसार भारती में रिक्रूट किये गये या सरकार की तरफ से भेजे गये थे, उसके बाद किसको भर्ती करना है, कैसे vacancies भरनी हैं, यह प्रसार भारती को खुद तय करना है।

चलो संसद में चलते हैं… वहां भी सेल लगती है! 0

चलो संसद में चलते हैं… वहां भी सेल लगती है!

राज मोहिंदर ♦ 1958 में लोकसभा की 125 बैठकें हुईं और राज्यसभा की 91 हुईं, लेकिन वहीं 2008 में राज्यसभा व लोकसभा की केवल 46 बैठकें हुईं। हम अपने देश की दूसरे मुल्कों के साथ तुलना नहीं करते, क्‍योंकि हमारी समस्याएं दूसरे मुल्कों से ज़्यादा हैं। वे मुल्क प्रोग्रैस कर चुके हैं, लेकिन हमें अभी प्रोग्रैस करनी है। मेरा प्रश्न यह है कि 46 दिन तो गांवों में पंचायत ही बैठ जाती है, तो कहां पंचायत और कहां पार्लियामैंट! मेरा यह प्रोपोज़ल है कि साल में पार्लियामैंट की 150 बैठकें होनी चाहिए।

“रजिस्‍ट्री के बाद सरकार कब्‍ज़ा भी दिलाये” 0

“रजिस्‍ट्री के बाद सरकार कब्‍ज़ा भी दिलाये”

राम नारायण साहू ♦ भारत में दो करोड़ से अधिक मुक़दमे ज़मीन या मकान संबंधी विवाद के बारे में विभिन्न न्यायालयों में लंबित हैं। यदि यह मानें कि एक-एक मुकदमे में कम से कम दो परिवार अर्थात दस व्यक्ति प्रभावित होते हैं, तो 100 करोड़ से अधिक आबादी वाले देश में 20 करोड़ से अधिक लोग संपत्ति विवाद की समस्या में जकड़े हैं। ज़मीनी विवादों के कारण आपसी झगड़े, मारपीट तथा हत्या जैसे गंभीर अपराध जन्म लेते हैं। साथ ही, रातोंरात धनवान एवं शक्तिशाली बनने के लिए भू-माफियागिरी का बढ़ता चलन सरकार एवं जनता दोनों के लिए गंभीर समस्या के रूप में उभरा है। इस समस्या से निपटने के लिए यदि सरकार गंभीर रूप से सोचे, तो जनता की बहुत सी समस्याएं स्वत: समाप्त हो सकती हैं।

“बचाने वाले, गिराने वाले, सब एक निकले” 3

“बचाने वाले, गिराने वाले, सब एक निकले”

अली अनवर ♦ जिसने इतना बड़ा अपराध किया है, उनको सज़ा मिलनी चाहिए, फांसी की सज़ा भी कम होगी, सज़ा मिलनी चाहिए। यहां किसी के पर्सनल लॉ से देश नहीं चलेगा, किसी की आस्था से देश नहीं चलेगा। देश चलता है संविधान से, कानून के राज से, रूल ऑफ लॉ से। इस मुल्क में जम्हूरियत है, प्रजातंत्र है। छह दिसंबर का जो हमला है, वह एक पुरानी मस्जिद कहाये जाने का मामला नहीं है, वह हमारी जो जम्हूरियत है, हमारा जो संविधान है, हमारे मुल्क की जो आत्मा है, उस पर यह हमला है। इसलिए हम कहते हैं कि कोई भी सज़ा हो, उसके लिए कम है। हम चाहते हैं, हमारी पार्टी की नीति है कि इस मसले का हल आज भी किसी की आस्था से, किसी के विश्वास से नहीं होने वाला है।