Tagged: Sadhvi Niranjan Jyoti

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एक कविता, अनेक भारत [ViA Tagore]

अरुण माहेश्‍वरी ➡ पिछले दिनों कृष्ण कल्पित की कविता की एक पंक्ति ने चौंका दिया था, मैं चाहे कबूतर की सूखी हुई बीट हूं, पर मैं कवि नहीं हूं…, आज मुकेश कुमार की पूरी...

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हां, हम सब हरामजादे हैं! #MukeshKumar

पिछले महीने, दिल्ली में, केंद्रीय मंत्री निरंजन ज्योति ने ‘रामजादे’ बनाम ‘हरामजादे’ वाला चर्चित घोर सांप्रदायिक वक्तव्य अपने एक भाषण में दिया था, उससे कितनों की ‘भावनाएं आहत हुईं’ इसका हिसाब कौन रखेगा? लेकिन...