Tagged: Shayari

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जीते रहो और किसी न किसी पर मरते रहो!

एक ख़त जॉन एलिया का, अनवर मक़सूद के नाम 26 नवंबर 2008 को कराची आर्ट्स कौंसिल में जॉन एलिया की याद में एक शाम मनायी गयी थी। उसमें अनवर मक़सूद साहब ने जन्नत से...

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आज एक बरस और बीत गया उसके बिना

♦ सैयद एस तौहीद आधुनिक शायरी की मकबूल शख्सियत अहमद फराज अदब के नुमाया सितारे थे। शायरी को इजहार का सरमाया बनाने वाले फराज में कारगर कलामों की दिलचस्प ताकत रही। सामाजिक-सयासती-शकाफती हवालों को...