Tagged: Subhash Kapoor

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राष्ट्रीय सुरक्षा कवच पहन कर खेला गया एक काला हास्य

JOLLY LLB 2 ➧ अभिषेक गोस्वामी फिल्म जॉली एल एल बी टू एक ऐसे नवोदित महत्त्वाकांक्षी वकील जगदीश्वर मिश्रा ‘जॉली’ की कहानी है, जो किसी भी कीमत पर अपने आप को नामी वकीलों की...

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“जिनको डर नहीं है, वो बनाएं पॉलिटिकल सिनेमा!”

राजकुमार गुप्ता ♦ मुझे लगता है सब कुछ में पॉलिटिक्स है। मैंने आमिर और नो वन किल्ड जेसिका पॉलिटिकल सोचकर नहीं बनायी। मुझे कभी कोई दिक्कत नहीं हुई। हम सबसे बड़े डेमोक्रेटिक कंट्री हैं और मजे की बात है कि सबसे कम राजनीतिक फिल्में यहीं बनी हैं। विनीत कुमार के कथन पर मुझे जेसिका में एनडीटीवी की भूमिका पर नाराजगी है। स्थिति पहले प्रेडिक्ट की गयी थी और टूजी घोटाला बाद में आया। हमें एक ऐसे चैनल की जरूरत थी, जिसका बजट कम हो सो हमने एनडीटीवी को लिया। पॉलिटिकल फिल्म को लेकर फिल्ममेकर में एक डर है कि उसकी फिल्में रिलीज नहीं होंगी। सेंसर बोर्ड के बाद भी इतने सारे डायनामिक्स हैं कि दिक्कत आ ही जाती है। सेंसरशिप का मुद्दा अहम है।

मेनस्ट्रीम सिनेमा अपनी खामियों के बावजूद ताकतवर है 0

मेनस्ट्रीम सिनेमा अपनी खामियों के बावजूद ताकतवर है

अजय ब्रह्मात्‍मज ♦ बदलाव में ऐसा कोई बॉर्डर लाइन नहीं है। आप इंडस्ट्री में आये नये लोगों को सोच कर देखिए तो पाएंगे कि उनका बॉलीवुड से कोई पुश्तैनी नाता नहीं है, यह एक बदलाव है। शुक्रवार को रिलीज दो फिल्में ‘द लंच बॉक्स’ और ‘फटा पोस्टर निकला हीरो’ बदलाव के उदाहरण के रूप मे हैं। काफी वैक्यूम आया है पिछले समय में, भोजपुरी सिनेमा ने यह वैक्यूम काफी हद तक भरा है। बदलाव तो अब यहां तक है कि जो विदेशी रोमांस था, वह अब शुद्ध देसी रोमांस हो गया है।