Tagged: swapnil kant dixit

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साइबर बुलींग प्रताड़ना का नया कल्‍चर है

♦ मोनिका लेंविस्‍की आपके सामने एक ऐसी औरत खड़ी है, जो सार्वजनिक तौर पर दस साल से ख़ामोश रही। ज़ाहिर है, वो ख़ामोशी टूट रही है, और ये हाल में ही शुरू हुआ है।...

एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना! 2

एक अकेला थक जाएगा, मिलकर बोझ उठाना!

हावर्ड रेनगोल्ड ♦ आधुनिक अर्थशास्त्र का मौलिक सिद्धांत आपको बताएगा कि आता हुआ एक रुपया सिर्फ इसलिए अस्वीकार करना गलत है क्योंकि किसी दूसरे अनजान आदमी को तो 99 रुपये मिल रहे हैं। लेकिन हजारों अमरीकी, यूरोपीय और जापानी विद्यार्थियों के साथ प्रयोगों में एक बड़ी संख्या में वो सारे विभाजन निरस्त हो गये, जो 50-50 के आसपास नहीं थे।

जब तक खुद को निर्दोष साबित नहीं करते, आप अपराधी हैं! 0

जब तक खुद को निर्दोष साबित नहीं करते, आप अपराधी हैं!

क्ले शर्की ♦ पीपा और सोपा इस मीडिया मोनोपोली और नागरिक अधिकार के बीच युद्ध की दूसरी कड़ी है। मगर जहां डीएमसीए अंदर घुस कर काम करता था … कि हम आपके कंप्‍यूटर में घुसे हैं, आपके टीवी का हिस्सा हैं, आपके गेम मशीन में मौजूद हैं, और उसे वो करने से रोक रहे हैं, जिसके वादे पर हमने उन्हें खरीदा था … पीपा और सोपा तो परमाणु विस्फोट जैसे हैं और ये कह रहे हैं कि हम दुनिया में हर जगह पहुंच कर कंटेंट को सेंसर करना चाहते हैं।

आप उद्यमी बनना चाहते हैं, तो बदतमीजी मत कीजिए 7

आप उद्यमी बनना चाहते हैं, तो बदतमीजी मत कीजिए

नंदिनी वैद्यनाथन ♦ मेरी सबसे बड़ी शिकायत तो ये है कि आप अपने ईमेल का जवाब समय पर नहीं देते! आज के जमाने में, क्या आपको लगता है कि आप ये बहाना मार सकते हैं कि ‘ओह मैंने मेल नहीं चेक किया’। ये बात किसी को भी आपसे नाराज करने में सक्षम है, खासकर मेरे जैसी व्यक्ति जो कि लगभग उसी सेकेंड जवाब भेजती है, जिस सेकेंड आप मेल भेजते हैं।

जागृति यात्रा की तैयारी पूरी, 24 को मुंबई से चलेगी रेल 1

जागृति यात्रा की तैयारी पूरी, 24 को मुंबई से चलेगी रेल

डेस्‍क ♦ जागृति यात्रा 15 दिनों की एक 7500 किमी लंबी वार्षिक रेलयात्रा है, जो 24 दिसंबर 2011 से मुंबई से शुरू होने जा रही है। इस यात्रा में भारत के बीस से पच्‍चीस साल की उम्र तक के सावधानीपूर्वक चुने गये 425 सजग और संभावनाशील युवाओं का परिचय सामाजिक और आर्थिक उद्यमियों से करवाया जाता है।

मीटिंगों में आड़ी-तिरछी रेखाएं खींचने वालो, लगे रहो! 2

मीटिंगों में आड़ी-तिरछी रेखाएं खींचने वालो, लगे रहो!

सुन्‍नी ब्राउन ♦ जो लोग शब्दों में निहित जानकारी देखते समय कागज पर आड़ी-तिरछी रेखाएं खींचते हैं, वो उसका ज्यादा बड़ा हिस्सा याद रख पाते हैं, अपने डूडल-हीन साथियों की तुलना में। ऐसा माना जाता है कि डूडल करने वाले का ध्यान भंग हो चुका है, मगर असलियत ये है कि डूडल बनाने से आपका ध्यान बंटने से बचा रहेगा।

भूखें रहें | मासूम रहें | जिज्ञासु रहें | गलतियां करें… 13

भूखें रहें | मासूम रहें | जिज्ञासु रहें | गलतियां करें…

स्‍टीव जॉब्‍स ♦ आपका जीवनकाल सीमित है; उसे दूसरे किसी की जिंदगी जीने में व्यर्थ न कीजिए। सिद्धांतों में मत फंसिए – जो कि दूसरों की सोच का निष्‍कर्ष है। दूसरों के मतों के शोर द्वारा अपनी अंदरूनी आवाज का कत्ल मत होने दीजिए। और सबसे जरूरी, अपने दिल और अपने मन की बात करने की हिम्मत रखिए। दिल और मन को पता होता है कि आप सच में क्या बनना चाहते हैं।

भारत के लिए चीन तक पहुंचना फिलहाल आसान नहीं! 2

भारत के लिए चीन तक पहुंचना फिलहाल आसान नहीं!

याशेंग हुआंग् ♦ लोग मानते हैं कि भारत में विकास नहीं हो रहा है? एक कारण ये है कि वो हमेशा भारत की तुलना चीन से करते हैं। मगर चीन तो अपवाद है, आर्थिक विकास के मामले में। यदि आप क्रिकेट के खिलाड़ी हैं, और आपकी तुलना हमेशा सचिन तेंदुलकर से की जाएगी, तो लगेगा कि आप कुछ खास नहीं हैं। पर इसका मतलब ये तो नहीं है कि आप एक खराब क्रिकेट खिलाड़ी हैं।

आप नास्तिक हैं पर बच्‍चों को झूठ बोलना तो नहीं सिखाते 2

आप नास्तिक हैं पर बच्‍चों को झूठ बोलना तो नहीं सिखाते

नईफ़ अल-मुतावा ♦ अल-मामून ने अपने सलाहकारों से कहा, “मुझे वो सारे विद्वान चाहिए, जो सारी किताबों का अरबी में अनुवाद कर दें… मैं उन्हें उनकी किताबों के वजन के बराबर सोना दूंगा।” कुछ दिन बाद, सलाहकारों ने शिकायत की। उन्होंने कहा, “महाराज, ये विद्वान धोखा कर रहे हैं। वो बड़े अक्षरों में लिख रहे हैं, ज्यादा सोने के लालच में।” तो खलीफा बोला, “करने दो, क्योंकि वो हमें वो दे रहे हैं जिसकी कीमत सोने से कहीं ज्यादा है।”

कला हमारा हथियार है, संस्कृति हमारे विरोध का जरिया है 10

कला हमारा हथियार है, संस्कृति हमारे विरोध का जरिया है

शीरीं निशात ♦ मैं एक बाहरी व्यक्ति थी जो कि ईरान आयी थी अपनी जगह खोजती हुई, मगर मैं इस स्थिति में नहीं थी कि मैं सरकार की आलोचना कर सकूं या फिर इस्लामिक क्रांति के सिद्धांतों की। धीरे-धीरे ये सब बदला और मुझे अपनी आवाज मिली और मैंने उन चीजों को खोजा जो मुझे कभी नहीं लगा था कि मैं खोज पाऊंगी। और मेरी कला थोड़ी और ज्यादा आलोचनात्मक हो गयी। मेरा खंजर थोड़ा और तीखा हो गया। और मैं फिर से देश-निकाले का जीवन जीने पर मजबूर कर दी गयी। अब मैं एक खानाबदोश कलाकार हूं। मैं मोरक्को में, तुर्की में, मेक्सिको में काम करती हूं। मैं हर जगह में ईरान को खोजती फिरती हूं।