Tagged: varanasi

बनारस में तीन दिनों की पुस्‍तक प्रदर्शनी, पुस्‍तक चर्चा भी 2

बनारस में तीन दिनों की पुस्‍तक प्रदर्शनी, पुस्‍तक चर्चा भी

गौरीनाथ ♦ देश की सांस्कृतिक राजधानी बनारस में त्योहारों का मौसम बड़ी साहित्यिक हलचलों के साथ शुरू हो रहा है। अंतिका प्रकाशन साहित्य प्रेमियों के लिए समकालीन विषयों पर नवीनतम पुस्तकें लेकर आ रहा है। तीन दिनों तक शहर के प्रमुख विश्वविद्यालयों में पुस्तक-प्रदर्शनियों के साथ-साथ विमर्श, विमोचन और गोष्ठियों-चर्चाओं की धूम रहेगी। गत वर्ष से बढ़-चढ़ कर इस बार अंतिका प्रकाशन ने बनारस के साहित्य प्रेमियों की इच्छाओं का सम्मान करते हुए तीन दिनों का कार्यक्रम रखा है। कार्यक्रम की शुरुआत 27 सितंबर को दोपहर एक बजे काशी विद्यापीठ से हो रही है जहां दूधनाथ चतुर्वेदी सभागार में जैगम इमाम के नवीनतम उपन्यास “मैं मुहब्‍बत” का लोकार्पण वरिष्ठ कथाकार काशीनाथ सिंह करेंगे।

अन्ना हजारे के समर्थन में जुट रहे भ्रष्टतम 11

अन्ना हजारे के समर्थन में जुट रहे भ्रष्टतम

अफलातून ♦ अन्ना हजारे जन लोकपाल विधेयक के समर्थन में आज से अनशन पर रहेंगे। देश भर में, कई शहरों-कस्बों में आज उनके समर्थन में दिन भर का प्रतीक अनशन होगा। मेरे शहर बनारस के भ्रष्टतम लोगों की जमात ‘जागो बनारस’ के नाम पर लामबंद हैं। स्कू्ली पढ़ाई के धंधे से जुड़ा शहर का सबसे बदनाम व्यक्ति इस पहल का प्रमुख है। दीपक मधोक नगर पालिका में नौकरी करता था और साथ में ठेकेदारी। ठेकेदारी ज्यादा चलने लगी, तो नौकरी छोड़ दी। पैसेवालों के लिए स्कूलों का जाल बिछा दिया। स्वाभाविक है, कई जगह ऐतिहासिक महत्व के भूखंडों पर कब्जा करके भी इनके स्कूल बने हैं। क्या दो तरह की तालीम रहेगी और देश भ्रष्टाचार विहीन हो जाएगा?

दो चार दिन बनारस : छोटी गैबी में छन्‍नूलाल जी से मिले 10

दो चार दिन बनारस : छोटी गैबी में छन्‍नूलाल जी से मिले

अविनाश ♦ छन्‍नूलाल जी ऐसे मिले, जैसे कोई बेहद अपना मिलता है। ढेरों किस्‍से बताये। पद्मभूषण से मिलने वाली खुशी बतायी। हमने कहा कि आप इन तमाम पुरस्‍कारों से बड़े हैं। उन्‍होंने कहा कि बिना कहे मिला इसलिए खुशी है। अब कलक्‍टर भी सलाम करता है। क्‍योंकि राष्‍ट्रपति ने सम्‍मानित किया है। जब देश का राष्‍ट्रपति ही सम्‍मान दे, तो कलक्‍टर को तो खड़ा होना ही पड़ेगा। ऐसी निश्‍छल खुशी और बिंदास बनारसी बातों में शाम का अंधेरा नजदीक आने लगा। हालांकि उनके कमरे में दिन-रात का फर्क नहीं पता चलता। रोशनी के लिए कहीं से कोई खिड़की नहीं थी। एक बॉल्‍व से हल्‍की सी रोशनी छन कर आती थी। हमने रियाज के बारे में पूछा, तो उन्‍होंने बताया कि अब 77 साल की उम्र में क्‍या रियाज।

शहनाई के शहर में खून से भीगी कबीर की चादर 10

शहनाई के शहर में खून से भीगी कबीर की चादर

रामाज्ञा शशिधर ♦ काशी सिर्फ घंटों और मंदिरों का शहर नहीं है। यह करघों की खटर-पटर और शहनाई की राग-रागिनियों का भी शहर है। आधे चांद, बल खाती कमर, फसल काटते हंसिये की शक्ल वाली सांवली गंगा इसकी दिनचर्या, संवेदना, औघरपन और मस्ती को करीने से रचती है। यहां के घाट और पटिया, उससे लगीं असूर्यंपश्या गलियां संसार की सारी जगहों से अलग एक ऐसा सम्मोहन-लोक रचती हैं, जिसकी तुलना में संसार का कोई शहर नहीं ठहरता। इस शहर की गतिकी और जीवन को केवल महसूस कर समझा जा सकता है। और स्रोतों से नहीं। मेरी बदनसीबी है कि मैं इस महान शहर को दो धमाकों के बीच की यादों के सहारे महसूस करता हूं।

हर बार इनके माथे ही क्‍यों फूटता है अयोध्‍या का ठीकरा 0

हर बार इनके माथे ही क्‍यों फूटता है अयोध्‍या का ठीकरा

अवनीश ♦ यह पूरी तैयारी इस पूर्वधारणा पर आधारित है कि आम जनता सहिष्णु नहीं है और अयोध्या मामले में आने वाला फैसला जिस भी पक्ष के विरोध में जाएगा, वह विरोध में दंगे भड़का सकता है। हालांकि यह पूर्वधारणा भी जनता के बारे में गलत समझ का ही द्योतक है। यह वास्तविकता है कि भारतीय समाज में धर्म एक प्रतिनिधि चेतना है। लेकिन मौजूदा अर्थ प्रणाली ने इस मुल्क में संपन्नता और विपन्नता के कई स्तर भी पैदा किये हैं। उन स्तरों की भौतिक स्थितियां ऐसी नहीं कि किसी स्वतःस्फूर्त दंगे का हिस्सा बनें या दंगे को नेतृत्व दें। यदि भारत में दंगों का इतिहास देखें तो आम आदमी दंगों के शिकार के रूप में ही दिखेगा। वह कभी मुसलमान होगा, कभी सिख होगा और कभी मजलूम हिंदू।

एक ‘चोरगुरु’ ने पत्रकार राहुल देव को नोटिस भिजवाया 11

एक ‘चोरगुरु’ ने पत्रकार राहुल देव को नोटिस भिजवाया

डेस्‍क ♦ हिंदी विश्‍वविद्यालय वर्धा के संचार विभाग के विभागाध्‍यक्ष अनिल कुमार राय के हमनाम एक और चोरगुरु के कारनामों पर सीएनईबी चैनल ने खबर चलायी थी। चोरगुरु सीएनईबी चैनल की एक्‍सक्‍लूसिव सीरीज़ है, जो देश भर में फैले फर्जी प्राध्‍यापकों के खेल को बिगाड़ रही है। बौखलाये चोर गुरुओं ने कमर सीधी कर ली है। अभी अभी kishor4media@gmail.com के जरिये हमें सूचना दी गयी है कि वरिष्ठ मीडियाकर्मी राहुल देव एवं उनके साथी जगदीश मोहन के खिलाफ भारतीय दंड संहिता 500/501 के तहत वाराणसी कोर्ट ने सम्मन जारी किया है। वाराणसी की इस घटना के बाद जाहिर है तमाम चोरगुरु उत्‍साहित होंगे, लेकिन हम राहुल देव को भरोसा दिलाना चा‍हते हैं कि हम सब उनके अभियान के सा‍थ हैं।

हमार टीवी से छह की नौकरी गयी, बनारस विवाद थमा 2

हमार टीवी से छह की नौकरी गयी, बनारस विवाद थमा

डेस्‍क ♦ हमार टीवी के वाराणसी ब्यूरो से छह लोगों को हटा दिया गया। इसी हफ़्ते वहां तैनात 22 कर्मचारियों से इस्तीफ़े ले लिए गए थे। लगातार दो दिन तक चली बैठकों के बाद उन 22 में से छह कर्मचारियों का इस्तीफ़ा मंजू़र कर लिया गया और बाकी वो नौकरी पर बहाल कर दिया गया। इस छंटनी कार्यक्रम में हिस्सा लेने के लिए दिल्ली से चैनल के संपादक उदय चंद्र और पटना से कंपनी के मालिक मतंग सिंह के भाई कमला सिंह बनारस पहुंचे हुए थे।

हमार में 22 मीडियाकर्मियों से लिया गया इस्‍तीफा 0

हमार में 22 मीडियाकर्मियों से लिया गया इस्‍तीफा

डेस्‍क ♦ “हमार टीवी ” इन दिनों बहुत बड़े संकट से जूझ रहा है। बीते महीने कर्मचारियों को वेतन काफी देर से मिला। अब ख़बरें आ रही हैं कि वाराणसी में मौजूद कार्यालय को बंद किया जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक न्यूज़ चैनल के संपादक उदय चंद्र और कंपनी के मालिक मतंग सिंह के भाई कमला सिंह इन दिनों वाराणसी में डेरा डाले हुए हैं। ऐसी ख़बरें भी हैं कि वहां मौजूद सभी कर्मचारियों से इस्तीफ़ा ले लिया गया है। कर्मचारियों की संख्या 22 बतायी जा रही है। इन 22 कर्मचारियों में से कौन रहेगा और कौन जाएगा, इसका फैसला कुछ दिन बात किया जाएगा। जिन्हें हटाया जाना होगा, उनका इस्तीफ़ा मंज़ूर कर लिया जाएगा।

कलाओं पर ये कैसा पहरा…? 17

कलाओं पर ये कैसा पहरा…?

उत्तमा दीक्षित ♦ स्टूडेंट लाइफ में जब मैं न्यूड फिगर बनाती थी, तब अपने ही घर में मुझे लगता था कि सभी अच्छा फील नहीं कर रहे। हर सीखने वाले स्टूडेंट के साथ ऐसा ही होता होगा। न्यूड स्टडी करने के लिए किताबों का ही सहारा लेना पड़ता है चाहें वो मार्केट से ली जाएं या लाइब्रेरी से। स्टूडेंट को यह किताबें छिपाकर रखनी पड़ती हैं। डर ऐसा होता है कि कोई क्राइम कर रहा हो। मॉडल न्यूड हो या कपड़ों में, आर्टिस्ट के लिए महज एक आब्जेक्ट है। उसी तरह जैसे सामने कोई चीज़ रखी हो और उसका उसे चित्रांकन करना हो। जयशंकर प्रसाद की कामायनी पर पेंटिंग करने के दौरान जब मैंने श्रद्धा और मनु को कैनवास पर उतारा तो मुझे लगा कि कपड़ों के बिना दोनों पात्रों को ज़्यादा बेहतर अभिव्यक्त किया जा सकता है। ग्वालियर में इस सीरीज़ की पेंटिंग्स की एक्जीबिशन पर मैंने खूब हंगामा झेला। स्त्री होकर भी एक स्त्री को मैंने इस रूप में क्यों बनाया, यह सवाल मुझसे पूछा गया। मैं परेशान और दुखी थी।

उत्तमा की कामायनी : मनु और श्रद्धा के कुछ चित्र-प्रसंग 69

उत्तमा की कामायनी : मनु और श्रद्धा के कुछ चित्र-प्रसंग

उत्तमा दीक्षित ♦ प्रलय के दौरान मनु और श्रद्धा का प्रेम मुझे प्रेरक लगा। कल्पना की उस समय की। मैं जैसे खो सी गयी। मैंने तत्काल पेपर पर स्केच बनाना शुरू किया और देखते ही देखते मनु का चित्र उतर आया। बेशक, अन्य कल्पनाओं की तरह यह कल्पना भी मुश्किल नहीं थी। पहले चित्र का स्केच मनमुताबिक आना शुरू हुआ तो उत्साह बढ़ा। हालांकि विषय की संवेदना और भाव-भंगिमा को चित्र में उतारने में बाद में खासी मेहनत करनी पड़ी। प्रलय के कारण भावशून्य हुए मनु के रूप में मुझे मन दिखाना था और श्रद्धा के रूप में दिल। रहस्य, स्वप्न, आशाएं, कर्म, काम, वासना, आनंद, लज्जा, ईर्ष्या और चिंता के भावों का चित्रण करना सचमुच चुनौतीपूर्ण है।