Tagged: Vatsala Shrivastava

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Dastan-E-Amir Hamza in Berkeley [California]

➧ vatsala shrivastava Audience is the most ruthless critic. Performer’s stature or surprising gimmicks cannot draw undeserved praise from it. It strikes its palms together only for a special moment in which an artiste...

Parents do it too!!!

➧ vatsala shrivastava Are “we the people of India”, wired to judge morally whenever sexuality unbuttons itself in unconventional settings? Has the era of FIDA (Facebook inbox display of affection) and the virtual paradises...

आप नास्तिक हैं पर बच्‍चों को झूठ बोलना तो नहीं सिखाते 2

आप नास्तिक हैं पर बच्‍चों को झूठ बोलना तो नहीं सिखाते

नईफ़ अल-मुतावा ♦ अल-मामून ने अपने सलाहकारों से कहा, “मुझे वो सारे विद्वान चाहिए, जो सारी किताबों का अरबी में अनुवाद कर दें… मैं उन्हें उनकी किताबों के वजन के बराबर सोना दूंगा।” कुछ दिन बाद, सलाहकारों ने शिकायत की। उन्होंने कहा, “महाराज, ये विद्वान धोखा कर रहे हैं। वो बड़े अक्षरों में लिख रहे हैं, ज्यादा सोने के लालच में।” तो खलीफा बोला, “करने दो, क्योंकि वो हमें वो दे रहे हैं जिसकी कीमत सोने से कहीं ज्यादा है।”

कला हमारा हथियार है, संस्कृति हमारे विरोध का जरिया है 10

कला हमारा हथियार है, संस्कृति हमारे विरोध का जरिया है

शीरीं निशात ♦ मैं एक बाहरी व्यक्ति थी जो कि ईरान आयी थी अपनी जगह खोजती हुई, मगर मैं इस स्थिति में नहीं थी कि मैं सरकार की आलोचना कर सकूं या फिर इस्लामिक क्रांति के सिद्धांतों की। धीरे-धीरे ये सब बदला और मुझे अपनी आवाज मिली और मैंने उन चीजों को खोजा जो मुझे कभी नहीं लगा था कि मैं खोज पाऊंगी। और मेरी कला थोड़ी और ज्यादा आलोचनात्मक हो गयी। मेरा खंजर थोड़ा और तीखा हो गया। और मैं फिर से देश-निकाले का जीवन जीने पर मजबूर कर दी गयी। अब मैं एक खानाबदोश कलाकार हूं। मैं मोरक्को में, तुर्की में, मेक्सिको में काम करती हूं। मैं हर जगह में ईरान को खोजती फिरती हूं।