Articles tagged with: vineet kumar
ख़बर भी नज़र भी, मोहल्ला दिल्ली, मोहल्ला लाइव, विश्वविद्यालय, सिनेमा »
विनीत कुमार ♦ एक रात मैं होटल में रुका था। मुझे नींद नहीं आ रही थी। मैं वारेन हेस्टिंग्स का सांड निकालकर पढ़ने लगा। पढ़ने के बाद बहुत देर तक रोता रहा। मैं सचमुच उदय प्रकाश की कहानी पर फिल्म करना चाहता हूं। इरफान ने बहुत सम्मान से कहा, वो हिंदी में सबसे ज्यादा उदय प्रकाश को पसंद करते हैं। वो गजब के लेखक हैं। कभी अनुराग कश्यप ने नामवर सिंह की बहुत तारीफ की थी और साझा किया था कि पाश पर बात करने के लिए जब-जब फोन करता, बड़े इत्मीनान से नामवरजी सब बताते। कितना ज्ञान और समझ हैं उन्हें … और आज इरफान ने उदय प्रकाश की खुले दिल से तारीफ की। अच्छा लगता है जब हिंदी की लहालोट और छक्का-पंजा की दुनिया के बाहर भी हमारे रचनाकारों, आलोचकों की तारीफ होती है।
फेसबुक से, मीडिया मंडी »

विनीत कुमार ♦ बिहार में बहुजन ब्रेन बैंक के लीडर मुसाफिर बैठा का फेसबुक अकाउंट बहुत पवित्र हो गया है। बिहार सरकार क्या, किसी के भी खिलाफ कुछ भी नहीं है। मुझे अपने आपसे घृणा हो रही है कि मैंने क्यों ऐसे लोगों का भावनात्मक होकर साथ दिया। ऐसे लोग भरोसा तोड़ते हैं और हमें हतोत्साहित करते हैं कि आप कभी किसी का साथ न दो।
मीडिया मंडी »

विनीत कुमार ♦ पत्रकार से मीडियाकर्मी, मीडियाकर्मी से मालिक और तब सरकार का दलाल होने के सफर में नामचीन पत्रकारों के बीच पिछले कुछ सालों से मीडिया के किसी भी सेमिनार को सर्कस में तब्दील कर देने का नया शगल पैदा हुआ है। उस सर्कस में रोमांच पैदा करने के लिए वो लगातार अपनी ही पीठ पर कोड़े मारते चले जाते हैं और ऑडिएंस तालियां पीटने लग जाती है।
नज़रिया, मीडिया मंडी, संघर्ष »

विनीत कुमार ♦ किसी नेता के करियर के लिए तानाशाह के बजाय मूर्ख कहलाना ज्यादा घातक स्थिति हो सकती है। लेकिन सवाल है कि कपिल सिब्बल को इडियट या मूर्ख करार देने के बाद क्या? क्या ये सिब्बल की मूर्खताभर का हिस्सा है कि जो शख्स मोबाइल से रोज एसएमएस की शक्ल में कविताएं लिखता रहा और साल 2008 में बाजे-गाजे के साथ पेंग्विन से किताब की शक्ल में छपवा लाया, वही शख्स फेसबुक और ट्विटर पर लाखों लोगों के ऐसा किये जाने का विरोध माध्यम की अज्ञानता के कारण कर रहा है?
मोहल्ला दिल्ली »

विनीत कुमार ♦ ये कोई पहला मामला है जबकि सामाजिक सरोकार और जागरूकता के नाम पर होनेवाले कार्यक्रमों के भीतर धंधे और फिर चीटिंग के जाल बिछाये जाते हैं? शरद पेशे से कार्टून जर्नलिस्ट और सामाजिक कार्यकर्ता हैं और अलग-अलग तरीके से अपनी बात उठा सकते हैं। लेकिन क्या सब ऐसा करने की स्थिति में होते हैं?
ख़बर भी नज़र भी, मोहल्ला दिल्ली, मोहल्ला लाइव, विश्वविद्यालय, सिनेमा »
विनीत कुमार ♦ मैं लिखने को जरूरी मानता हूं इसलिए न तो रिपोर्ट लिखने को लेकर कोई आपत्ति है और न ही दिलीप मंडल की मीरा की भक्ति-भावना कहकर उपहास ही उड़ाना जरूरी समझता हूं। बस ये कि आप प्लीज ऐसा करके पीआर एजैंसियों को एक कमाऊ फार्मूला न थमा दें, जिस पर कि कल को आपका ही नियंत्रण न रह सके। ऐसे कार्यक्रम इससे सौ गुनी ताकत के साथ शुरू होने लग जाएं और कलाकारों के प्रति सदिच्छा का भाव मार्केटिंग स्ट्रैटजी में तब्दील हो जाएं। बाकी आप सब ये कहने के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं कि ओबीसी की राजनीति को लेकर दिलीप मंडल इन सबसे अलग क्या कर रहे हैं?
नज़रिया, फेसबुक से »

राहुल सिंह ♦ बात फकत इतनी है कि पूरे मामले को समझे बिना तुम उसी तात्कालिकता के फेर में उलझ गये। जो तुम होना चाहते हो, उसके लिए जिस त्याग और साहस की आवश्यकता है, उससे कोसों दूर हो, इसलिए छद्म क्रांतिकारिता से बचो। रही बात सबाल्टर्न की तो मामला दिलचस्प है। आरक्षण का विरोध करनेवाले अगर जातिवादी हैं, तो उसके समर्थक क्यों नहीं?
ख़बर भी नज़र भी, स्मृति »
विनीत कुमार ♦ कैसेट संस्कृति के बीच से लोकप्रिय होनेवाले जगजीत सिंह ने गजल की दुनिया में आखिर क्या कर दिया कि गजल सुनने और न सुननेवालों के बीच की विभाजन रेखा खत्म होती जान पड़ती है। मतलब ये कि जो अटरिया पे लोटन कबूतर रे और ए स्साला, अभी-अभी हुआ यकीं (जेड जेनरेशन) सुननेवाला भी शाम से आंख में नमी सी है गुनगुनाता है और वो इस बात का दंभ नहीं भरता कि गजल सुन और गुनगुना रहा है बल्कि जगजीत सिंह को सुन और गुनगुना रहा है?
नज़रिया, मीडिया मंडी, सिनेमा »

विनीत कुमार ♦ मल्हारगंज थाने में उसके खिलाफ आईपीसी के सेक्शन – 295 ए के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। ये वो धारा है, जिसे कि समाज के किसी तबके की धार्मिक भावना को भड़काने के संदर्भ में लगाया जाता है। उसके साथ बहुत ही बुरा सलूक किया गया। अभी भाजपा समर्थक लोग मुस्सिवर को अलग-अलग तरीके से परेशान कर रहे हैं।
मीडिया मंडी, मोहल्ला पटना, संघर्ष »

विनीत कुमार ♦ खबर के नाम पर आप जो देख/पढ़ रहे हैं, वो नीलामी के बाद का निकला हुआ माल है, जिसके लगातार उपयोग से आप बहुत बड़े कुकर्म का साथ दे रहे हैं। आप उसकी खाल मजबूत कर रहे हैं जो कि अब तक के शोषण के तमाम औजारों से भी ज्यादा घातक हमले कर रहा है।


