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वीएन राय ♦ रोशनी ने रात का तिलिस्म तार-तार कर दिया था। दुनिया भर में हत्यारे अंधेरा पसंद करते हैं। रोशनी उनके अंदर खौफ भरती है। यहां भी हत्यारे रोशनी से डरे और उनमें से दो-तीन अपनी रायफलें ताने सामने वाली गाड़ी की तरफ दौड़े। ट्रक के पिछ्ले हिस्से में खड़े बाबूदीन को जितना कुछ दिखा, उससे यह समझ में आ गया कि गालियों और रायफलों की मदद से वे अगली गाड़ी के ड्राइवर को अपनी हेडलाइट बुझाने के लिए कह रहे थे। घबराये हुए उस ड्राइवर ने गालियों की अच्छी-खासी बरसात झेलने और रायफलों के दो-चार बट अपने शरीर पर खाने के बाद रोशनियां बुझा दी।
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विभूति नारायण राय ♦ मैं लगातार सोचता रहा हूं कि कैसे और क्यों हुई होगी ऐसी लोमहर्षक घटना? होशो-हवास में कैसे एक सामान्य मनुष्य किसी की जान ले सकता है? वह भी एक की नहीं, पूरे समूह की? बिना किसी ऐसी दुश्मनी के, जिसके कारण आप क्रोध से पागल हुए जा रहे हों, कैसे आप किसी नौजवान के सीने से सटाकर अपनी रायफल का घोड़ा दबा सकते हैं? बहुत सारे प्रश्न हैं, जो आज भी मुझे मथते हैं।
नज़रिया, विश्वविद्यालय, शब्द संगत »
डेस्क ♦ हमने जिस गम को भूला हुआ समझ लिया था, उसका दर्द अब भी किसी किसी की जबान से छलक जाता है। विभूति नारायण राय की बदजुबानी का किस्सा कुछ ऐसा ही है कि लोग उस मसले को भूल गये थे। लेकिन पिछले दिनों जनसत्ता में कृष्ण सोबती ने उस प्रसंग पर अपनी कलम चला कर फिर से उस जख्म को हरा कर दिया, जिसे अब मद्धिम नहीं पड़ना था। सांस्थानिक गठजोड़ों वाली हिंदी में लेखकीय अस्मिता यूं भी कोई मायने रखने वाली चीज नहीं है – लेकिन फिर लेखक विरोध करते हैं और संस्थान अपनी जगह बने रहते हैं। खैर, कृष्ण सोबती की इस प्रतिक्रिया की नकलचेंपी हम पहले ही कर चुके होते, अगर मोहल्ला लाइव के मॉडरेटर का यात्रा संबंधी खलल इसमें नहीं पड़ता। खैर, देर आयद दुरुस्त आयद।
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वर्धा संवाददाता ♦ >कुलदीप नैयर, रजी अहमद आदि की उपस्थिति में राय ने अपनी छद्म प्रतिबद्धता का नया स्वांग रचा। हम सब को फिर से चौंकाते हुए बंधु ने विनायक सेन के खिलाफ कोर्ट के फैसले की खूब आलोचना की। अभी बहुत दिन नहीं हुए हैं, जब राय को 31 जुलाई को हंस की संगोष्ठी से भागना पड़ा था, राज्य के पक्ष में मानवाधिकार कार्यकर्ताओं पर दमन को जायज ठहराने के बाद। दरअसल यह सारी कवायद छिनाल प्रकरण से अपनी फजीहत को कम करने के प्रयास के तौर पर है। अब हमारी त्रासदियों में प्रतिबद्धता के प्रहसन से बेहतर तरीका और क्या हो सकता था। वैसे विभूति एक अनिवार्य परिघटना हैं, एक आईना भी, जो अपने जैसे कई विदूषकों का प्रतिरूप खोज रहा है, राजकिशोर, आलोकधन्वा, रामशरण जोशी, जैसा कोई भी।
विश्वविद्यालय, शब्द संगत »
इलाहाबाद डेस्क ♦ 26 नवंबर यानी कल इलाहाबाद में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय का क्षेत्रीय विस्तार केंद्र “आलोचना इस समय” विषय पर एक गोष्ठी का आयोजन कर रहा है। गोष्ठी की अध्यक्षता कोई ओपी मालवीय करेंगे। मुख्य अतिथि होंगे स्वयं कुलपति वीएन राय। वक्ता रहेंगे जीवन सिंह, भारत भारद्वाज, सूरज पालीवाल, शंभू गुप्त, श्रीराम त्रिपाठी, रघुवंश मणि और निशांत। वक्ताओं में इलाहाबाद का कोई व्यक्ति नहीं है। जाने माने आलोचक डॉ राजेंद्र कुमार को इस गोष्ठी से दूर रखा गया है। छिनाल प्रकरण से पहले डॉ राजेंद्र कुमार हिंदी विश्वविद्यालय की पत्रिका बहुवचन के संपादक थे। छिनाल प्रकरण के बाद यह पहला अवसर है, जब कुलपति वीएन राय इलाहाबाद आ रहे हैं।
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वर्धा डेस्क ♦ विभूति नारायण राय अपने माफीनामे से पलट गये हैं। नागपुर के हाई कोर्ट में उन्होंने पिछले दो अगस्त को अपने बिना शर्त माफीनामे को अपनी सफाई बतायी है और फिर से “छिनाल” शब्द की व्याख्या प्रस्तुत की है। पिछले 21 अक्तूबर को राय साहब ने नागपुर उच्च न्यायालय में हलफनामा दाखिल कर दो अगस्त को अपने बिना शर्त माफीनामे को “सफाई” बताते हुए वर्धा कोर्ट में उनपर चल रहे इस मामले के मुकदमे को ख़ारिज करने की अर्जी डाल दी है। इस क्रम में उन्होंने याचिकाकर्ता संजीव चंदन के साथ ही रवींद्र कालिया, राकेश मिश्रा और महाराष्ट्र सरकार को नोटिस भिजवायी है।
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डेस्क ♦ महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय से दूसरी खबर ये है कि पिछले दिनों निलंबित किये गये छात्र उत्पल कांत अनीश को कुलपति विभूति नारायण राय ने दो सालों के लिए निष्कासित कर दिया। इसके पहले 7 सितंबर को अनीश को निलंबित करने के बाद 17 सितंबर को “क्यों नहीं निलंबन किया जाए” आशय का कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। लगभग डेढ़ महीने बाद जब नोटिस अनीश को थमाया गया और इससे पहले कि अनीश इसका जवाब दे, उसे निष्कासित कर दिया गया। निष्कासन के लिए अनीश के जो अपराध गिनाये गये हैं, उसमें कहा गया है कि उसने कुलपति के खिलाफ आंदोलन छेड़ने का प्रयास किया व विवि मे मौजूद होमगार्डों के साथ मारपीट की।
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डेस्क ♦ खबर है कि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय के कुलाधिपति का पद नामवर सिंह से खाली होना है और उनके बाद इस पद के लिए महात्मा गांधी के पौत्र और राजगोपालाचारी के दौहित्र गोपालकृष्ण गांधी के नाम का एलान किया गया, लेकिन उन्होंने इस पद को लेने से इनकार कर दिया। भारत के राष्ट्रपति ने बंगाल के पूर्व गवर्नर गोपालकृष्ण गांधी को महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय का कुलाधिपति बनाने का निर्देश जारी किया था। गोपालकृष्ण गांधी ने दो नवंबर को राष्ट्रपति को पत्र लिखकर उक्त पद को स्वीकार करने से मना कर दिया… इधर सूत्र बताते हैं कि विभूति अपने नये पैंतरे के तौर पर महाश्वेता देवी को कुलाधिपति बनाना चाहते हैं।
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व्योमेश शुक्ल ♦ मेले में मूंगफली बेचने लगता है लेटरप्रेस में सही वाक्य संभव करने वाला आविष्कारक वैज्ञानिक कंप्यूटर नहीं सीख पाता | अश्लील भोजपुरी में गर्क होने को है भाषा की शख्सियत | यहीं टूटने थे खड़ी बोली के गुंबद
यहीं बक सकता था गाली दारोगा – मां की, बहन की, दुनिया के सभी भाइयों और बेटों और प्रेमियों को
यहीं बनना था आस्था को सबसे बड़ा तर्क
यहीं तय होने थे हिंदू-मुसलमान, आदमी-औरत, ज्यादा आदमी और कम औरत, काव्यात्मक-अकाव्यात्मक के फर्क
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संजीव चंदन ♦ जिन दिनों वर्धा में ब्लागिंग पर अंकुश के लिए आचार संहिता बनाये जाने पर बहस चल रही थी, उन्हीं दिनों वर्धा के पुलिसिया कुलपति विभूति नारायण राय ने हमें धमकी भिजवायी कि अपनी हरकतों से बाज आओ, वरना उनके बापों को उठवा लेंगे। साथ में उन्होंने यह भी जोड़ा कि यूपी के कई थानों में उन पर केस करवाएंगे। यदि उन पर किया केस हमने वापस नहीं लिया तो… गौरतलब है कि मैंने और राजीव सुमन तथा भारतीय महिला फेडरेशन की हसोता गोरडे ने विभूति नारायण राय, रवींद्र कालिया, और राकेश मिश्र के खिलाफ मुकदमा किया था, जिसकी सुनवाई वर्धा न्यायालय में हो रही है। दरअसल धमकी और आचार संहिता का पाठ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं…


